मध्य-पूर्व तनाव की चपेट में राजस्थान सीकर के युवक विक्रम की ओमान में ड्रोन हमले में मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

The CSR Journal Magazine
मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध जैसे हालात अब भारत के घरों तक असर दिखाने लगे हैं। राजस्थान के सीकर जिले के एक युवा मजदूर की ओमान में ड्रोन हमले में मौत ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि विदेश में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

रोज़गार की तलाश में गया, मौत बनकर लौटा

सीकर जिले के खंडेला क्षेत्र के अगलोई गांव निवासी 22 वर्षीय विक्रम वर्मा 23 फरवरी को बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर ओमान गया था। वह वहां एक निर्माण कंपनी में सड़क परियोजनाओं पर मजदूरी कर रहा था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसने विदेश जाने का फैसला किया था। लेकिन महज 20 दिनों के भीतर ही उसकी जिंदगी खत्म हो गई। 13 मार्च को हुए ड्रोन हमले में वह गंभीर रूप से घायल हुआ और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जिस सपने के साथ वह घर से निकला था, वह अधूरा ही रह गया।

आखिरी बातचीत में जताई थी चिंता

मौत से एक दिन पहले, 12 मार्च की रात विक्रम ने अपने परिवार से वीडियो कॉल पर बात की थी। उसने बताया था कि वहां हालात लगातार खराब हो रहे हैं और युद्ध जैसा माहौल बन चुका है। उसने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई थी। परिवार ने उसे हिम्मत बंधाई और जल्द लौटने की बात कही, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी। अगले ही दिन उसके ममेरे भाई ने हादसे की सूचना दी, जिससे पूरे परिवार में कोहराम मच गया।

परिवार का इकलौता सहारा था विक्रम

विक्रम अपने परिवार का मुख्य कमाने वाला सदस्य था। उसके पिता की आय सीमित थी और घर पहले से कर्ज में डूबा हुआ था। मां पिछले छह महीनों से बीमार होकर बिस्तर पर थीं। तीन बहनों में वह इकलौता भाई था। बड़ी बहन की शादी हो चुकी थी, जबकि दो छोटी बहनों की पढ़ाई और शादी की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। इन्हीं जिम्मेदारियों को निभाने के लिए उसने विदेश जाने का जोखिम उठाया था। अब उसके जाने के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया है और भविष्य अनिश्चितता में घिर गया है।

एक ही हादसे में दो घरों के चिराग बुझ गए

इस दर्दनाक घटना राजस्थान के ब्यावर जिले के रायपुर उपखंड के लालपुरा निवासी पप्पू सिंह की भी मौत हो गई। वह भी 23 फरवरी को विक्रम के साथ ही ओमान गया था। मंगलवार को दोनों युवकों के पार्थिव शरीर जयपुर लाए गए और फिर एम्बुलेंस के जरिए उनके गांवों तक पहुंचाए गए। अगलोई गांव में जब विक्रम का अंतिम संस्कार हुआ, तो सैकड़ों ग्रामीण नम आंखों से उसे अंतिम विदाई देने पहुंचे। परिजनों की चीख-पुकार और बहनों का विलाप वहां मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर गया। ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश भी था कि दो देशों के संघर्ष की कीमत एक निर्दोष मजदूर को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
यह घटना न केवल एक परिवार के टूटने की कहानी है, बल्कि उन हजारों भारतीय मजदूरों की हकीकत भी है जो रोज़ी-रोटी के लिए विदेश जाते हैं। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच उनकी सुरक्षा और सरकार की जिम्मेदारी पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos