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January 1, 2026

कौन होगा मुंबई का असली बॉस? BMC चुनाव में तीन खेमों की भिड़ंत, मुस्लिम वोटर तय करेंगे अंजाम

The CSR Journal Magazine
मुंबई की राजनीति इस समय समंदर की लहरों से भी तेज़ हो गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) का चुनाव अब सिर्फ एक नगर निगम की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह सत्ता, अस्तित्व और साख का निर्णायक रणक्षेत्र बन गया है। BMC का सालाना बजट 74,000 करोड़ रुपये से अधिक है, जो कई छोटे राज्यों के कुल बजट से बड़ा है। इस वजह से इसे ‘मिनी विधानसभा’ कहा जाता है। जो पार्टी BMC पर राज करेगी, उसका प्रभाव सीधे मुंबई की धड़कन और अर्थव्यवस्था पर होगा।

तीन खेमों में महासंग्राम

इस बार के चुनाव में पहले जैसी सीधी लड़ाई नहीं है। 227 सीटों पर अब तीन बड़े खेमों की टक्कर है:
  1. महायुति (BJP + शिंदे शिवसेना)

    BJP इस बार किसी भी कीमत पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना का लंबा कब्जा तोड़ने के लिए मैदान में है। एकनाथ शिंदे के लिए यह साबित करने की परीक्षा है कि वे ‘असली शिवसेना’ हैं। बीजेपी 137 और शिंदे गुट 90 सीटों पर फोकस कर रहे हैं।
  2. ठाकरे ब्रदर्स का गठजोड़ (UBT + MNS + NCP-SP)

    उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का गठजोड़ राजनीतिक इतिहास में पहली बार हो रहा है। उद्धव के लिए यह अपनी पार्टी और कैडर बचाने की चुनौती है, जबकि राज ठाकरे अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना चाहते हैं। UBT 163, MNS 53 और NCP 11 सीटों पर तालमेल कर रही है। मराठी वोटों के बंटवारे को रोकने में यह गठजोड़ शिंदे गुट के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
  3. कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA)

    कांग्रेस 167 और VBA 46 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही हैं। ये दल धर्मनिरपेक्ष और दलित वोट बैंक के सहारे पासा पलटने की कोशिश में हैं।

मुंबई में मुस्लिम मतदाता निर्णायक

मुंबई में मुस्लिम आबादी इस चुनाव में अहम भूमिका निभाएगी। 1961 में 8% की जनसंख्या बढ़कर 2011 में 21% हो गई थी और 2026 में यह 22% से अधिक होने का अनुमान है। TISS के अनुसार, यदि वर्तमान रुझान जारी रहे तो 2051 तक यह 30% तक पहुंच सकती है। मुंबादेवी, भायखला, मानखुर्द-शिवाजी नगर और धारावी जैसे क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाता निर्णायक हैं। परंपरागत रूप से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी इनके पसंदीदा रहे हैं, लेकिन शिवसेना (UBT) और AIMIM ने भी अपनी पैठ बनाई है। BJP मुख्य रूप से अपने कोर वोट बैंक को जोड़कर मुकाबला कर रही है।

BJP की बढ़ती ताकत

1980 और 1990 के दशक में बीजेपी शिवसेना की जूनियर पार्टनर रही, लेकिन 2017 में उसने 31 सीटों से छलांग लगाकर 82 सीटें जीतीं। गैर-मराठी और प्रवासी वोटों के बढ़ते समर्थन से अब BJP बीएमसी में स्वतंत्र शक्ति के रूप में उभर चुकी है।

उद्धव और शिंदे के लिए अस्तित्व की लड़ाई

उद्धव ठाकरे ने 2002 से बीएमसी में शिवसेना के प्रभुत्व को संभाला है। अब यह चुनाव उनके लिए पार्टी बचाने और अपनी साख कायम रखने की लड़ाई है। वहीं, शिंदे गुट के लिए चुनौती यह है कि मराठी वोट ठाकरे की तरफ न चले। BJP के लिए यह मौका है कि वे मुंबई पर पूर्ण नियंत्रण साबित कर सकें। मुंबई की राजनीति अब सिर्फ मराठी अस्मिता बनाम विकास की लड़ाई नहीं रह गई है। असली जंग उस 74,000 करोड़ रुपये की चाबी की है, जो शहर के संसाधनों और सत्ता को नियंत्रित करती है।
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