मुंबई की राजनीति इस समय समंदर की लहरों से भी तेज़ हो गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) का चुनाव अब सिर्फ एक नगर निगम की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह सत्ता, अस्तित्व और साख का निर्णायक रणक्षेत्र बन गया है। BMC का सालाना बजट 74,000 करोड़ रुपये से अधिक है, जो कई छोटे राज्यों के कुल बजट से बड़ा है। इस वजह से इसे ‘मिनी विधानसभा’ कहा जाता है। जो पार्टी BMC पर राज करेगी, उसका प्रभाव सीधे मुंबई की धड़कन और अर्थव्यवस्था पर होगा।
तीन खेमों में महासंग्राम
इस बार के चुनाव में पहले जैसी सीधी लड़ाई नहीं है। 227 सीटों पर अब तीन बड़े खेमों की टक्कर है:
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महायुति (BJP + शिंदे शिवसेना)
BJP इस बार किसी भी कीमत पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना का लंबा कब्जा तोड़ने के लिए मैदान में है। एकनाथ शिंदे के लिए यह साबित करने की परीक्षा है कि वे ‘असली शिवसेना’ हैं। बीजेपी 137 और शिंदे गुट 90 सीटों पर फोकस कर रहे हैं।
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ठाकरे ब्रदर्स का गठजोड़ (UBT + MNS + NCP-SP)
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का गठजोड़ राजनीतिक इतिहास में पहली बार हो रहा है। उद्धव के लिए यह अपनी पार्टी और कैडर बचाने की चुनौती है, जबकि राज ठाकरे अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना चाहते हैं। UBT 163, MNS 53 और NCP 11 सीटों पर तालमेल कर रही है। मराठी वोटों के बंटवारे को रोकने में यह गठजोड़ शिंदे गुट के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
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कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA)
कांग्रेस 167 और VBA 46 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही हैं। ये दल धर्मनिरपेक्ष और दलित वोट बैंक के सहारे पासा पलटने की कोशिश में हैं।

