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February 6, 2026

रेलवे का यू-टर्न: कश्मीर में तीन रेल प्रोजेक्ट रोके, 7 लाख सेब के पेड़ कटने से बचे

The CSR Journal Magazine
रेल मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में बनने वाली तीन नई रेल लाइनों के सर्वे पर रोक लगा दी है। ये प्रोजेक्ट दिसंबर 2023 में मंजूर किए गए थे, लेकिन अब इन पर ब्रेक लग गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह बनें इलाके के स्थानीय किसान, जिन्होंने सेब के बागानों को बचाने के लिए विरोध जताया था।

किन प्रोजेक्ट्स पर लगी है रोक

जिन तीन रेल प्रोजेक्ट्स को रोक दिया गया है, उनमें सोपोर से कुपवाड़ा (33.7 किमी), अवंतीपोरा से शोपियां (27.6 किमी) और अनंतनाग-बिजबेहारा-पहलगाम (77.5 किमी) लाइनें शामिल थीं। ये सभी लाइन्स दक्षिण कश्मीर के ऐसे हिस्सों से गुजरतीं, जो बागवानी के लिए जाने जाते हैं।

सेब के बागों पर मंडरा रहा था संकट

इन रेल ट्रैकों को बिछाने से करीब 7 लाख से ज्यादा सेब के पेड़ खतरे में आ जाते। जम्मू-कश्मीर के इन इलाकों में सेब की खेती किसानों की मुख्य आजीविका है। ऐसे में हजारों परिवारों पर रोज़गार का संकट खड़ा हो सकता था। इसी बात को देखते हुए स्थानीय लोगों ने ज़ोरदार विरोध किया था।

रेल मंत्री ने कहा- बागवानी को बचाना पहली प्राथमिकता

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ये तीनों प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर सरकार और सांसदों की सिफारिशों के बाद रोके गए हैं। उनका कहना है कि फिलहाल इन इलाकों में रेल लाइन के काम पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा, ताकि सेब के बागानों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।

श्रीनगर से बारामूला तक पहले से है रेल ट्रैक

फिलहाल श्रीनगर से बारामूला तक की रेल लाइन पहले से चालू है। प्रस्तावित नई लाइनों से जो इलाके जुड़े हुए थे, वे कश्मीर के बागवानी हब माने जाते हैं। जैसे अनंतनाग, पुलवामा, शोपियां और अवंतीपोरा। किसान इन्हीं जगहों से ज़्यादातर सेब की खेती करते हैं।

मुख्यमंत्री ने दिया नया सुझाव

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कहना है कि अगर ये रेलवे लाइन लद्दाख या राजौरी-पुंछ को जोड़ने के लिए बनाई जाती, तो उस पर विचार किया जा सकता था। लेकिन जिन रास्तों से ये लाइनें जातीं, वे केवल बागवानी इलाकों को पार करती थीं, जिससे नुकसान तय था।

किसानों ने राहत की सांस ली

रेल परियोजनाएं रुकने के बाद इलाके के किसानों को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से वे इस बात की मांग कर रहे थे कि उनकी ज़मीन और पेड़ सुरक्षित रहें। अब जब सरकार ने प्रोजेक्ट पर रोक लगाई है, तो किसान इसे अपनी जीत मान रहे हैं।

आगे क्या होगा, ये सरकार के फैसले पर निर्भर

फिलहाल ये प्रोजेक्ट रोक दिए गए हैं। आगे क्या रास्ता अपनाया जाएगा, इसका निर्णय सरकार की रणनीति पर निर्भर करेगा। हालांकि इतना तय है कि सेब की खेती को नुकसान पहुंचाए बिना ही कोई आगे की योजना बनाई जाएगी।

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