क़तर-ईरान टकराव से बढ़ा ऊर्जा संकट भारत की गैस आपूर्ति पर मंडराया खतरा

The CSR Journal Magazine
क़तर के रास लाफ़ान गैस कॉम्प्लेक्स पर ईरानी हमलों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झटका दिया है। तेल-गैस की कीमतों में उछाल के बीच भारत की एलएनजी आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

खाड़ी में हमलों से वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल

पश्चिम एशिया में ईरान-इसराइल संघर्ष के बीच क़तर के प्रमुख गैस केंद्र रास लाफ़ान पर मिसाइल हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल देखा गया, जहां ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। होर्मुज़ जलडमरूमध्य पहले ही तनाव में है, जिससे दुनिया के लगभग 20% तेल व्यापार पर असर पड़ रहा है। ऐसे हालात में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

रास लाफ़ान: क़तर की ऊर्जा ताकत का केंद्र

रास लाफ़ान क़तर की एलएनजी सप्लाई का सबसे अहम केंद्र है, जिसे देश का ‘क्राउन ज्वेल’ माना जाता है। यहीं गैस को लिक्विड में बदलकर टैंकरों के जरिए एशिया और यूरोप भेजा जाता है। क़तर वैश्विक एलएनजी सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा देता है और इसमें इस प्लांट की अहम भूमिका है। हमलों के बाद इस सुविधा के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें बढ़ने लगी हैं और सप्लाई चेन पर दबाव साफ दिख रहा है।

साउथ पार्स गैस फील्ड दुनिया का सबसे बड़ा भंडार

ईरान और क़तर द्वारा साझा किया जाने वाला साउथ पार्स/नॉर्थ फील्ड दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडारों में से एक है। इसमें करीब 51 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर गैस मौजूद है। ईरान अपनी घरेलू जरूरतों का लगभग 80% इसी फील्ड से पूरा करता है। इस क्षेत्र पर हमलों ने न केवल उत्पादन बल्कि भविष्य की सप्लाई योजनाओं को भी खतरे में डाल दिया है, जिससे वैश्विक गैस बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।

भारत पर सीधा असर 55% एलएनजी आयात प्रभावित होने का खतरा

भारत अपनी एलएनजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा क़तर और यूएई से आयात करता है। आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल एलएनजी आयात का लगभग 50-55% इन्हीं देशों से आता है और यह आपूर्ति होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर गुजरती है। रास लाफ़ान प्लांट बंद होने और शिपिंग रूट बाधित होने से भारत की गैस सप्लाई पर सीधा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि प्लांट को नुकसान ज्यादा हुआ तो सप्लाई सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं।

एलएनजी रिज़र्व की कमी बढ़ा रही चिंता

भारत के पास तेल की तरह एलएनजी का कोई बड़ा रणनीतिक भंडार नहीं है। मौजूदा गैस स्टॉक केवल ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करने के लिए है, जो सीमित समय तक ही चल सकता है। हालांकि पहले से भेजे गए कुछ कार्गो भारत पहुंच रहे हैं, लेकिन नई सप्लाई रुकने से आने वाले समय में संकट गहरा सकता है। विकल्प के तौर पर ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका या रूस से गैस ली जा सकती है, लेकिन ऊंची कीमतें भारत के लिए चुनौती बन सकती हैं।

आगे क्या कीमतें, महंगाई और ऊर्जा सुरक्षा पर असर

अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव जारी रहता है तो भारत में गैस और बिजली की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका असर उर्वरक, बिजली उत्पादन और सीएनजी-पीएनजी जैसे सेक्टरों पर पड़ेगा। ऊर्जा लागत बढ़ने से महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में भारत के लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना और दीर्घकालिक रणनीति बनाना बेहद जरूरी हो गया है।

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