तालाबों की मिट्टी कितनी उपयोगी हो सकती है इसका अंदाजा इस खबर से लगाया जा सकता है। तालाबों की मिट्टी का खेतों में उपयोग किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। कर्णाटक के गडग जिले में किसानों की ज़िन्दगी में इस पहल ने जबरदस्त बदलाव आया है। पहले जहां किसान एक साल में केवल एक ही फसल उगाते थे और मुनाफा सीमित होता था, वहीं अब तालाबों की मिट्टी के इस्तेमाल से न केवल खेतों की उर्वरता में वृद्धि हुई है, बल्कि फसल चक्र भी बदल गया है। अब किसान एक साल में दो फसलें उगा रहे हैं और उनकी आय में भारी इजाफा हो रहा है।
कैसे हुई खेती में क्रांति?
दरअसल एसबीआई फाउंडेशन (SBI Foundation) और संकल्प रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (Sankalpa Rural Development Society (SRDS) ने मिलकर कर्नाटक के गडग जिले में सामुदायिक तालाबों का कायाकल्प कर रही है जिसका दो तरीके से फायदा गांव वालों, छोटे और सीमांत किसानों को हो रहा है। Gram Saksham Project के तहत एसबीआई फाउंडेशन और संकल्प रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी एक साथ मिलकर एक तो गडग जिले के कई गावों में जल संरक्षण को बढ़ने के लिए तालाबों के सिल्ट को निकालकर उनको गहरा करने का काम कर रही है। जिसकी वजह से बारिश के समय पर तालाब भर जाते है और जल भण्डारण को बढ़ावा मिलता है। इसके साथ ही तालाबों की मिट्टी को ऐसे खेतों में डाला जाता है जिस खेत की मिट्टी उपजाऊ नहीं है।
बढ़ गयी है मिट्टी की गुणवत्ता, उर्वरता और किसानों की आय
तालाबों की मिट्टी, जिसे कृषि विज्ञान में बेहद पोषक माना जाता है, को किसानों के खेतों में डाले जाने से खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हुआ और उर्वरता बढ़ गई। इस मिट्टी के उपयोग के बाद, खेतों में नमी बनाए रखने की क्षमता बढ़ गई, जिससे फसलों की पैदावार में वृद्धि हुई। इससे पहले किसान एक साल में केवल एक ही फसल ले पाते थे, लेकिन अब वे साल में दो बार खेती कर रहे हैं। जब The CSR Journal
जनथली गांव के किसान रामप्पा रुद्रप्पा हुगर से बात की तो उन्होंने बताया कि “पहले हम सिर्फ एक फसल उगाते थे और उससे ज्यादा मुनाफा नहीं होता था। अब तालाब की मिट्टी डालने के बाद हम साल में दो फसलें उगाते हैं और हमारी आय दोगुनी हो गई है। पहले हम केवल खाद्यान्न उगाते थे, लेकिन अब हम व्यावसायिक फसलों की ओर भी बढ़ रहे हैं, जिससे हमारी कमाई में भी सुधार हुआ है।”
तालाब की मिट्टी किसानों की जमीन को नई ज़िन्दगी दी
Sankalpa Rural Development Society (SRDS) के Sikandar Meeranaik ने The CSR Journal से ख़ास बातचीत करते हुए बताया कि तालाब की मिट्टी किसानों की जमीन को नई ज़िन्दगी दी है। पहले किसानों को सिंचाई के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ती थी, लेकिन अब मिट्टी में नमी ज्यादा देर तक बनी रहती है, जिससे सिंचाई की जरूरत भी कम हो गई है और अगर जरुरत पड़ती है तो तालाब से सिंचाई हो जाती है। इससे न केवल हमें पानी की बचत हो रही है, बल्कि मेहनत और खर्च भी कम हो रहा है।”
इस पहल से किसानों की आय में हुई बढ़ोतरी
इस पहल का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ा है। पहले जहां किसान सिर्फ एक फसल से मामूली मुनाफा कमा पाते थे, अब वे दो फसलें उगाकर दोगुना मुनाफा कमा रहे हैं। इसके साथ ही, व्यावसायिक फसलों जैसे कपास, मूंगफली, और सब्जियों की खेती ने भी उनकी आर्थिक स्थिति को और मजबूत किया है। एक सर्वे के अनुसार, तालाब पुनर्जीवित करने और उसकी मिट्टी का उपयोग करने के बाद किसानों की आय में 30 से 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखी गई है। किसानों का कहना है कि इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है और अब वे बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रहे हैं।
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