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February 25, 2026

‘केरलम’ पर छिड़ा सियासी संग्राम , शशि थरूर ने सरकार पर साधा निशाना

The CSR Journal Magazine

क्या नाम बदलने से होगा बदलाव?

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार द्वारा केरल का नाम बदलने के फैसले पर तंज कसा है। थरूर का कहना है कि केरल का नाम बदलना किसी समझदारी का फैसला नहीं है। उनका कहना है कि मलयालम में केरल का नाम पहले से ‘केरलम’ है, तो ऐसे में इसे बदलने की जरूरत समझ में नहीं आती। उन्होंने यह भी कहा कि पता नहीं इस नाम बदलने से क्या फर्क पड़ेगा।

केंद्र सरकार पर उठे सवाल

केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर केरल का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा कि सरकार को राज्य के विकास पर ध्यान देना चाहिए था, न कि नाम बदलने पर। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले बजट में केरल के लिए कोई नया प्रोजेक्ट नहीं दिया गया है, जबकि नाम बदलने के प्रस्ताव को तुरंत मंजूरी मिल गई। इस स्थिति को देखते हुए थरूर ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं।

राज्य सरकार की मांग का समर्थन

केरल विधानसभा पहले ही दो बार प्रस्ताव पारित कर चुकी है, जिसमें केंद्र से संविधान में संशोधन की मांग की गई थी। इस मांग का उद्देश्य है कि राज्य का नाम मलयालम वर्तनी के अनुसार ‘केरलम’ किया जाए। हाल ही में केंद्र की कैबिनेट ने भी नाम बदलने की मांग पर मुहर लगा दी है, जिससे जल्द ही आधिकारिक तौर पर राज्य का नाम बदला जा सकेगा।

शशि थरूर का मजाकिया अंदाज

थरूर ने इस मुद्दे को हल्का करते हुए सोशल मीडिया पर एक मजेदार सवाल पूछा। उन्होंने अंग्रेजी बोलने वालों के लिए ‘केरलाइट’ और ‘केरलम’ शब्दों का क्या होगा? उन्होंने मजाक में कहा कि ‘केरलमाइट’ किसी सूक्ष्म जीव जैसा लगता है और ‘केरलमियन’ किसी खनिज का नाम जैसे। यह टिप्पणी सियासत में हलका-फुलका माहौल लाने का प्रयास है।

सियासत का नया मोड़

केरल में सियासी हलचलें बढ़ गई हैं और विरोधी पार्टियों ने इस फैसले पर अपनी राय व्यक्त करना शुरू कर दिया है। मोदी सरकार के इस कदम को लेकर अलग-अलग पार्टियों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ नेताओं ने सवाल उठाया है कि क्या नाम बदलने से वास्तविक समस्या का समाधान होगा? इस सियासी बवाल में कई और मुद्दे भी उठने लगे हैं, जिससे केरल का राजनीतिक माहौल और भी गरम हो गया है।

केंद्र और राज्य के बीच छिड़ी बहस

केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है। ये बहस उस समय और तेज हो गई जब थरूर ने यह कहा कि जब सरकार को केरल के विकास के लिए कोई सहायता नहीं मिल रही, तो फिर नाम बदलने का यह खेल आखिर क्यों? सरकार को चाहिए कि वह लोगों की जरूरतों पर ध्यान दे, न कि सिर्फ नामों पर।

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