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March 7, 2026

युद्ध की आग में झुलसेगा भारत का फ्यूल बाजार? पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के संकेत

The CSR Journal Magazine
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मचा दी है। इसका सीधा असर भारत के पेट्रोल-डीजल बाजार पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही तेल आपूर्ति पूरी तरह बाधित न हो, लेकिन बढ़ती लागत के कारण ईंधन की कीमतों में इजाफा लगभग तय नजर आ रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां संभावित घाटे को लेकर चिंतित हैं और कीमतें बढ़ाने के लिए सरकारी अनुमति का इंतजार कर रही हैं।

ब्रेंट क्रूड में तेज उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। केवल 24 घंटे में करीब नौ प्रतिशत और एक सप्ताह में लगभग 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने तेल कंपनियों की लागत बढ़ा दी है। कुछ समय पहले तक जो कच्चा तेल 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मिल रहा था, वह अब 80 डॉलर से ऊपर चला गया है।

 होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट की तलवार

मध्य पूर्व से दुनिया के कई देशों को तेल आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होती है। यदि इस मार्ग पर किसी प्रकार की बाधा आती है तो भारत सहित कई देशों को आपूर्ति संकट का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल भारत के पास लगभग ढाई महीने का कच्चे तेल का भंडार मौजूद है, लेकिन यदि संघर्ष लंबा चला तो स्थिति जटिल हो सकती है।

वैकल्पिक बाजारों की तलाश

तेल कंपनियां अब मध्य पूर्व के अलावा अन्य क्षेत्रों से कच्चा तेल खरीदने के विकल्प तलाश रही हैं। वैश्विक स्तर पर हर रात नीलामी के माध्यम से खरीद प्रक्रिया चल रही है। हालांकि नई आपूर्ति के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। कंपनियां किसी भी स्थिति में आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश में जुटी हैं।

 डॉलर और परिवहन लागत का दबाव

अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से आयात लागत और बढ़ गई है। यदि पारंपरिक मार्गों के बजाय वैकल्पिक समुद्री रास्तों से तेल लाया जाता है तो शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त प्रीमियम वसूल रही हैं। कई मामलों में भाड़ा डेढ़ गुना तक बढ़ चुका है, जिससे अंतिम लागत में भारी इजाफा हो रहा है।

 एडवांस भुगतान से नकदी संकट

मौजूदा हालात में तेल निर्यातक देश 100 प्रतिशत अग्रिम भुगतान की शर्त पर ही सौदे कर रहे हैं। इससे भारतीय तेल कंपनियों पर पूंजी निवेश का दबाव बढ़ गया है और नकदी प्रवाह प्रभावित हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बनी रही तो आने वाले हफ्तों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता। अब सबकी नजर सरकार की रणनीति और पश्चिम एशिया में युद्ध की दिशा पर टिकी है।
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