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March 9, 2026

स्वर्ग जैसा नजारा, पांडवों की कथा और रोमांचक ट्रेक, क्यों खास है पंचाचूली पर्वत? मार्च से जून के बीच बनाएं यात्रा का प्लान

The CSR Journal Magazine
भारत के पर्वतीय राज्यों में प्राकृतिक सुंदरता की बात हो और उत्तराखंड का नाम न आए, ऐसा संभव नहीं है। इसी राज्य के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित पंचाचूली पर्वत अपनी भव्यता और रहस्यमयी सुंदरता के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। दारमा घाटी के दुग्तू गांव के पास स्थित यह पर्वत दरअसल हिमालय की पांच ऊंची बर्फीली चोटियों का समूह है।
इन चोटियों की ऊंचाई लगभग 6,334 मीटर से लेकर 6,904 मीटर तक मानी जाती है। साल के अधिकतर समय ये पर्वत बर्फ की सफेद चादर से ढके रहते हैं। सूर्योदय के समय जब सूर्य की किरणें इन चोटियों पर पड़ती हैं, तो पूरा पर्वत लालिमा से चमक उठता है और नजारा बेहद अद्भुत दिखाई देता है।

मुनसियारी से मिलता है सबसे खूबसूरत नजारा

अगर कोई पर्यटक पंचाचूली पर्वत को नजदीक से देखना चाहता है, तो उसके लिए सबसे लोकप्रिय स्थान मुनसियारी है। समुद्र तल से लगभग 2,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह हिल स्टेशन पंचाचूली चोटियों का शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है।
यहां से बर्फ से ढके पहाड़, ग्लेशियर और शांत घाटियां प्रकृति प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

पांडवों से जुड़ी है पंचाचूली नाम की पौराणिक कथा

पंचाचूली नाम के पीछे एक दिलचस्प पौराणिक कहानी भी जुड़ी हुई है। माना जाता है कि यह कथा महाभारत काल से संबंधित है। किंवदंती के अनुसार, जब पांडव स्वर्ग की यात्रा पर निकल रहे थे, तब उन्होंने अपना अंतिम भोजन इसी स्थान पर पकाया था। पांचों भाइयों ने यहां पांच चूल्हे जलाए थे, इसलिए इस स्थान को “पंचाचूली” कहा जाने लगा। ‘पंच’ यानी पांच और ‘चूली’ यानी चूल्हा।

ट्रेकिंग और रोमांच के शौकीनों के लिए स्वर्ग

पंचाचूली क्षेत्र एडवेंचर पसंद लोगों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहां कई प्रसिद्ध ट्रेकिंग रूट मौजूद हैं, जहां से हिमालय की शानदार झलक देखने को मिलती है। सबसे लोकप्रिय ट्रेक में खालिया टॉप ट्रेक, मिलम ग्लेशियर ट्रेक और रालम ग्लेशियर ट्रेक शामिल हैं। इन रास्तों से गुजरते हुए पर्यटक घने जंगल, बर्फीले ग्लेशियर और शांत घाटियों का अनुभव कर सकते हैं।
हालांकि, यहां का मौसम काफी चुनौतीपूर्ण होता है। ऊंचाई अधिक होने के कारण बर्फीले तूफान और ग्लेशियर चढ़ाई को कठिन बना देते हैं। यही कारण है कि यह क्षेत्र खासतौर पर अनुभवी पर्वतारोहियों को आकर्षित करता है।

मार्च से जून के बीच बनाएं यात्रा का प्लान

अगर आप पंचाचूली की यात्रा करना चाहते हैं, तो मार्च से जून और सितंबर से नवंबर का समय सबसे अनुकूल माना जाता है। इस दौरान मौसम अपेक्षाकृत साफ रहता है और पर्वतों का दृश्य भी बेहद स्पष्ट दिखाई देता है।
रोमांच, प्राकृतिक सुंदरता और पौराणिक रहस्यों से भरा पंचाचूली पर्वत उत्तराखंड के उन खास स्थानों में से एक है, जहां पहुंचकर ऐसा लगता है मानो धरती पर ही स्वर्ग उतर आया हो।
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