ईरान-यूएस सीजफायर के बाद भी होर्मुज में महाजाम! युद्धविराम के बाद भी फंसे हैं 800 जहाज

The CSR Journal Magazine

US-ईरान सीजफायर के बाद होर्मुज से गुजरे सिर्फ 9 जहाज, करीब 800 शिप अभी भी फंसे!

7 अप्रैल 2026 को घोषित अमेरिका-ईरान के बीच ऐतिहासिक 14-दिवसीय युद्धविराम ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में राहत की उम्मीद तो जगाई, लेकिन धरातल पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। जहाँ एक ओर युद्धविराम के बाद केवल 9 जहाजों ने इस संकरे जलमार्ग को पार किया है, वहीं दूसरी ओर फारस की खाड़ी में लगभग 800 वाणिज्यिक जहाजों का विशाल जमावड़ा लगा हुआ है। यह स्थिति न केवल वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की जटिलताओं को भी रेखांकित करती है। स्ट्रैट ऑफ होर्मुज, जो कि एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, इन दिनों संकट के दौर से गुजर रहा है। हाल ही में US और ईरान के बीच हुई सीजफायर के बाद, मात्र 9 जहाज इस क्षेत्र से गुजर पाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है।

फंसे हुए जहाजों की संख्या

समुद्री खबरें साझा करने वाली वेबसाइट Lloyd’s List के एडिटर-इन-चीफ, रिचर्ड मीड ने जानकारी दी है कि इस क्षेत्र में करीब 800 जहाज फंसे हुए हैं। इन जहाजों में विभिन्न देशों के झंडे लगे हुए हैं, जो संकट के स्थितियों का सामना कर रहे हैं। वर्तमान में फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के अंदर लगभग 800 वाणिज्यिक जहाज फंसे हुए हैं। इन जहाजों में से अधिकांश पूरी तरह से माल से लदे हुए हैं, जिनमें कच्चे तेल और LNG के टैंकर प्रमुख हैं। खाड़ी में फंसे इन जहाजों में 16 भारतीय ध्वज वाले जहाज भी शामिल हैं, जो कच्चे तेल और अन्य कार्गो की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं।

कम होते व्यापारिक गतिविधियां

MarineTraffic, एक प्रमुख शिप ट्रैकिंग सर्विस, ने बताया कि बुधवार को सिर्फ दो जहाज होर्मुज से गुजरे। इनमें से एक ग्रीस का झंडा लगा जहाज और दूसरा लाइबेरिया का था। इस धीमी गति से चलने वाले व्यापारिक गतिविधियों ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है।

ईरान की सख्त शर्तें और चुनौतियां

ईरान ने युद्धविराम के बावजूद जलमार्ग पर अपना कड़ा नियंत्रण बनाए रखा है, जिससे शिपिंग कंपनियों में डर का माहौल है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि गुजरने वाले हर जहाज को ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ समन्वय करना होगा और उनके द्वारा निर्धारित मार्गों का ही पालन करना होगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि मुख्य ट्रैफिक ज़ोन में ‘एंटी-शिप माइन्स’ हो सकती हैं, इसलिए सुरक्षा कारणों से यातायात को सीमित रखा जा रहा है और यदि इजरायल ने लेबनान पर हमले बंद नहीं किए, तो वह इस युद्धविराम समझौते से पीछे हट सकता है और होर्मुज को पूरी तरह बंद कर सकता है। ऐसी खबरें भी हैं कि ईरान और ओमान इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर 2 मिलियन डॉलर तक का भारी टोल टैक्स लगाने पर विचार कर रहे हैं, जिससे वैश्विक शिपिंग लागत और बढ़ सकती है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं- वैश्विक कारोबारी नीतियों पर असर

शिपिंग विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट रातों-रात खत्म नहीं होगा। कई बड़ी शिपिंग कंपनियां जैसे Maersk ने कहा है कि जब तक समुद्री सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं मिलती, वे अपने जहाजों को वहां भेजने में सावधानी बरतेंगे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 800 जहाजों के इस विशाल बैकलाग को पूरी तरह खत्म करने और यातायात को सामान्य होने में 1.5 से 2 महीने का समय लग सकता है

गलती से बढ़ता तनाव- समय पर समाधान की आवश्यकता

सीजफायर के बाद भी तनाव कम नहीं हुआ है। परीक्षणों और सैन्य गतिविधियों में वृद्धि ने वैश्विक शांति को खतरे में डाल दिया है। ऐसे में, व्यापारिक समुदाय को इन गतिविधियों पर नजर रखनी होगी। समस्या का समाधान समय पर न किया गया, तो स्थिति और जटिल हो सकती है। समुद्री व्यापारियों और नाविकों के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है कि वे फंसे हुए जहाजों का क्या करेंगे। जहाजों के फंसे रहने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर होगा। शिपिंग क्षेत्र में निरंतरता बनाए रखना जरूरी है। अगर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया, तो स्थितियाँ और बिगड़ सकती हैं।

भविष्य की अनिश्चितता

होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का यह ‘महाजाम’ यह स्पष्ट करता है कि युद्धविराम की घोषणा मात्र से समुद्री व्यापार सामान्य नहीं हो सकता। ईरान का कड़ा सैन्य नियंत्रण, समुद्री बारूदी सुरंगों का डर और लेबनान में जारी क्षेत्रीय तनाव इस संकट को और गहरा बना रहे हैं। यदि अगले कुछ दिनों में 800 फंसे हुए जहाजों की निकासी के लिए कोई सुरक्षित और पारदर्शी गलियारा नहीं बनाया गया, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल और आपूर्ति में कमी देखी जा सकती है। वर्तमान परिस्थिति में, इस व्यापारिक गतिरोध को सुलझाने के लिए केवल युद्धविराम ही नहीं, बल्कि एक ठोस अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गारंटी की तत्काल आवश्यकता है।

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