एक्स्ट्रा-मैरिटल ऐप ‘Gleeden’ पर NHRC का शिकंजा: 40 लाख भारतीयों की पसंद अब विवादों में

The CSR Journal Magazine

ग्लीडेन ऐप: एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स के लिए 40 लाख भारतीयों का पसंदीदा प्लेटफॉर्म

आधुनिक तकनीक और बदलती जीवनशैली ने मानवीय रिश्तों के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। इसी क्रम में, विवाहेतर संबंधों (Extra-marital affairs) को बढ़ावा देने वाला फ्रांसीसी डेटिंग ऐप ‘ग्लीडेन’ (Gleeden) भारत में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हाल ही में, भारत में इसके 40 लाख से अधिक यूजर्स होने और समाज पर इसके संभावित नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। यह मामला न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता से जुड़ा है, बल्कि भारतीय विवाह संस्था की नैतिकता और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

ग्लीडेन ऐप की बढ़ती लोकप्रियता

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स का मुद्दा देश में हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। इस बार इसकी चर्चा का कारण बना है एक डेटिंग ऐप, जिसका नाम है ग्लीडेन। इस ऐप पर लगभग 40 लाख भारतीय रजिस्टर्ड हैं, जो इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपने संबंधों को नए रंग में रंगने के लिए कर रहे हैं। यह ऐप लोगों को अपनी इच्छाओं के अनुसार पार्टनर्स खोजने की सुविधा देता है। भारत में इस ऐप के करीब 40 लाख सक्रिय यूजर्स हैं। बेंगलुरु इस ऐप के उपयोग में नंबर-1 पर है, जिसके बाद हैदराबाद, दिल्ली, मुंबई और पुणे का नंबर आता है। ऐप के अनुसार, पिछले दो सालों में महिलाओं के रजिस्ट्रेशन में 148% की बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में यहाँ लगभग 65% पुरुष और 35% महिला यूजर्स हैं।

NHRC की चिंता और नोटिस

हाल ही में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को एक नोटिस भेजा है, जिसमें ग्लीडेन ऐप के बारे में चिंताओं का जिक्र किया गया है। NHRC ने इस ऐप के जरिए होने वाली गतिविधियों को लेकर गंभीरता दिखाई है। मशहूर फ्रेंच ऐप ‘ग्लीडेन’ के खिलाफ इस नोटिस के बाद से कई सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह ऐप समाज पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।

ग्लीडेन ऐप क्या है?

ग्लीडेन एक ऐसा ऐप है जो शादीशुदा लोगों को एक-दूसरे से मिलाने का काम करता है। अपने यूजर्स को अनाम पहचान और सुरक्षित वातावरण में जोड़ने का दावा करते हुए, यह ऐप लोगों को नए संबंध बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। यहां पर बहुत से एडल्ट्स अपने शादीशुदा जीवन में ताजगी लाने के लिए इस ऐप का सहारा ले रहे हैं।

नोटिस के पीछे के मुख्य कारण

NHRC ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर चिंताओं को रेखांकित किया है। शिकायत में कहा गया है कि ऐप पर फर्जी पहचान (Fake Profiles) के जरिए महिलाओं का शोषण हो सकता है। साथ ही, नाबालिगों द्वारा इस ऐप के उपयोग का जोखिम भी बताया गया है। सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन द्वारा दर्ज शिकायत में तर्क दिया गया है कि यह ऐप “विवाह” जैसी संस्था को कमजोर कर रहा है और समाज में नैतिक मूल्यों को नुकसान पहुँचा रहा है। आयोग ने सरकार से पूछा है कि इस तरह के ऐप्स को विनियमित (Regulate) करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए 23 अप्रैल 2026 तक का समय दिया गया है।

समाज में बहस का मुद्दा

इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है, जिसमें कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक भाग मानते हैं जबकि अन्य इसे नैतिक दृष्टि से गलत ठहराते हैं। NHRC के नोटिस ने इस चर्चा को और भी गरमा दिया है। बहुत से लोग इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या एक ऐसा ऐप जो पारिवारिक रिश्तों में दरार डाल सकता है, समाज के लिए सही है या नहीं।

भारत में विवाहेतर संबंधों की कानूनी स्थिति

व्यभिचार (Adultery) अपराध नहीं: 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी की धारा 497 को खत्म कर दिया था, जिसका मतलब है कि एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर अब भारत में आपराधिक अपराध नहीं है। हालाँकि यह अपराध नहीं है, लेकिन यह अभी भी तलाक (Divorce) और भरण-पोषण (Maintenance) के मामलों में एक मजबूत कानूनी आधार माना जाता है।

सरकारी पहल और डिजिटल सुरक्षा

NHRC के नोटिस के बाद, सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने की बात कही है कि इस तरह के ऐप्स से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह ऐप्स न केवल व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित कर रहे हैं बल्कि समाज में भी असुरक्षित स्थिति पैदा कर सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस तरह की तकनीकी प्लेटफॉर्म के फायदों और नुकसान दोनों पर विचार करना चाहिए।

भविष्य की संभावनाएँ

 ग्लीडेन ऐप पर NHRC की हालिया सख्ती यह दर्शाती है कि डिजिटल युग में अभिव्यक्ति और व्यक्तिगत पसंद की आजादी के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा और नैतिक मूल्यों का संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है। हालांकि 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने व्यभिचार (Adultery) को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था, लेकिन महिलाओं के खिलाफ शोषण और डेटा सुरक्षा जैसे जोखिम अभी भी गंभीर चिंता का विषय हैं। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह तकनीकी प्लेटफार्मों के लिए ऐसे कड़े नियम (Regulations) बनाए, जो आधुनिकता के नाम पर किसी के अधिकारों या पारिवारिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ न होने दें। ग्लीडेन ऐप जैसे प्लेटफॉर्म की बढ़ती लोकप्रियता के बीच, समाज में इसे लेकर नजरिया कैसे बदलेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। क्या लोग इस ऐप का सहारा लेना जारी रखेंगे, या फिर इसे समाज के नियमों के खिलाफ मानेंगे, इस पर सबकी निगाहें बनी रहेंगी।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos