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सीएसआर पर जोर देगा मोदी का नया मंत्रिमंडल

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सीएसआर पर जोर देगा मोदी का नया मंत्रिमंडल
 
केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव के बाद सभी मंत्रियों ने अपने-अपने मंत्रालयों का कार्यभार संभाल लिया और अपने मंत्रालयों का रिव्यु भी करने लगे है। जैसे कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी मंत्रियों को पारदर्शी कार्य और हर कार्य जनता के लिए समर्पित हो ऐसे कड़े निर्देश भी दिए है लिहाजा हर मंत्री जनता के हितों के कामों पर जोर भी देना शुरू कर दिया है। इस कड़ी में सीएसआर यानी कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी एक अहम भूमिका निभायेगा।

मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद सीएसआर व कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री बनें राव इंद्रजीत सिंह

मंत्रिमंडल के फेरबदल में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय में कैबिनेट मिनिस्टर तो निर्मला सीतारमण ही बनी है लेकिन राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर की जगह ली है राव इंद्रजीत सिंह ने। मंत्रालय के जानकारों की मानें तो राव इंद्रजीत सिंह ने सीएसआर (Corporate Social Responsibility) कानून और नियम को बेहतर ढंग और आम जनमानस के लिए सीएसआर फंड का बखूबी इस्तेमाल हो इस पर जोर दिया जायेगा। इसके साथ ही अन्य मंत्रालय भी CSR Funds का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से लागू करेंगे।

मंत्रिमंडल में सीएसआर पर जोर दिया जायेगा

वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि सभी बंदरगाह अपनी कंपनी सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के माध्यम से कोविड-19 के खिलाफ अभियान में अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कच्छ के रामबाग में सरकारी अस्पताल में मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन इकाई के उद्घाटन करने के बाद यह भी कहा कि यह बंदरगाहों की जिम्मेदारी है कि वे आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने में मदद करें।

नयी मंत्रिमंडल सीएसआर की मदद से बढ़ाएगी मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर

आपको बता दें कि दीनदयाल पोर्ट ने अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए करीब 50 लाख रुपये की लागत से यह सुविधा स्थापित की है। ऑक्सीजन संयंत्र की उत्पादन क्षमता पांच से छह के दबाव पर बीस हजार लीटर प्रति घंटा है। सीएसआर फंड से विकास हो ये हमेशा से ही सरकार चाहती रही है और नयी मंत्रिमंडल भी इसी पर जोर देगी। इसके साथ ही कोरोना की तीसरी लहर को रोकने के लिए भी मोदी की नयी मंत्रिमंडल सीएसआर की मदद से मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर भी जोर दे रही है।

15 हज़ार कंपनियां ही आती है सीएसआर के दायरे में

गौरतलब है कि भारत में करीब 8 लाख रजिस्टर्ड कंपनियां हैं जिनमें से लगभग 15,000 कंपनी अधिनियम के सीएसआर नियम के तहत आती हैं। इसके तहत कंपनी को अपने लाभ का 2 फीसदी हिस्सा सीएसआर गतिविधियों के लिए खर्च करना पड़ता है। सीएसआर की इन गतिविधियों के सही क्रियान्वयन के लिए मंत्रालय ने इस साल की शुरुआत में सीएसआर से जुड़े कानूनों में बेहद जरूरी बदलाव किए थे जिनका उद्देश्य कार्यान्वयन की प्रक्रिया को ज्यादा विस्तृत करना है।