नेहा बोरा ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पीस बॉंड साइन करने से इनकार किया, कहा शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार लोकतांत्रिक है

The CSR Journal Magazine
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा ने शनिवार को स्पष्ट किया कि वह शांति बनाए रखने के लिए ₹10 हजार का पर्सनल बॉंड साइन नहीं करेंगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके द्वारा पुलिस के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। नेहा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार से जवाब मांगने को शांति के लिए खतरा कैसे माना जा सकता है।

हाईकोर्ट का आदेश और नेहा का जवाब

नेहा बोरा ने कहा कि हाईकोर्ट ने उनके मामले के गुण-दोष पर फैसला देने के बजाय उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने चल रही जांच में शामिल होने का आदेश दिया। उनका कहना था कि मजिस्ट्रेट केवल कारण बताओ नोटिस जारी करके किसी को बॉंड साइन करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत लागू होने चाहिए।

AISA का समर्थन

नेहा ने कहा कि AISA पीस बॉंड को चुनौती देता रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अदालतें पीस बॉंड के इस्तेमाल और असहमति के संवैधानिक अधिकार के बीच के विरोधाभास को समझेंगी। यह मामला अब न्यायालय में है, और नेहा की उम्मीदें अदालत से जुड़ी हुई हैं।

प्रदर्शन के दौरान हिरासत

नेहा बोरा 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल हुई थीं। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और SIR के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के विरोध में किया गया था। प्रदर्शन शुरू होने के करीब 10 मिनट बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। उन्हें रातभर हिरासत में रखने के बाद 17 अक्टूबर की सुबह रिहा किया गया।

नोटिस का विवरण

स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने 17 अक्टूबर को BNSS की धारा 126 और 130 के साथ धारा 135(3) के तहत नोटिस जारी किया था। नेहा को यह नोटिस 18 अक्टूबर को मिला। इसमें जांच की अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए ₹10 हजार का पर्सनल बॉंड और एक जमानतदार देने के संबंध में जवाब मांगा गया था। नोटिस में मंडी हाउस में नारेबाजी करने और जंतर-मंतर के आसपास प्रतिबंधात्मक आदेशों के बावजूद बार-बार प्रदर्शन करने के आरोपों का जिक्र किया गया था।

केंद्र का पक्ष

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने दलील दी कि नेहा ने बार-बार नियमों का उल्लंघन किया। उन्होंने 12 बार उल्लंघन होने का दावा किया। शर्मा ने कहा कि स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उपलब्ध सामग्री पर दो बार विचार किया था। जांच अधिकारी से मिली जानकारी की पुष्टि के बाद ही नोटिस जारी किया गया।

लोकतंत्र में असहमति का अधिकार

नेहा के वकील ने अदालत में कहा कि लोकतंत्र में सरकार बदलने की मांग करना गलत नहीं है। केंद्र की ओर से इसका विरोध करते हुए ASG ने कहा कि सरकारें वोट के जरिए बदलती हैं, न कि दिल्ली के केंद्र में जुटने वाले ‘उपद्रवी तत्वों’ के जरिए। यह बहस अदालत में जारी है और दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद ही अदालत अपना फैसला सुनाएगी।

नेहा का संघर्ष जारी

नेहा बोरा का यह मामला न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे छात्र समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपने अधिकारों के लिए लड़ने का संकल्प लिया है और उम्मीद जताई है कि न्यायालय उनके पक्ष में फैसला देगा। उनका यह संघर्ष लोकतंत्र में असहमति और प्रदर्शन के अधिकार को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

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