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February 25, 2026

केरलम का नामकरण: राजनीतिक खेल या सांस्कृतिक अस्मिता? ममता बनर्जी ने उठाया ‘बांग्ला’ का सवाल

The CSR Journal Magazine

केरलम का नया नाम, बहस का नया आधार

केरल का नाम बदलने का केंद्रीय मंत्रिमंडल का फैसला अब देश में एक नई बहस का विषय बन गया है। प्रसिद्ध राज्य का नाम ‘केरलम’ रखने का निर्णय सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक समझा जा रहा है। वहीं, यह राजनीतिक रणनीतियों की चर्चा को भी जन्म दे रहा है। यह कदम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उठाया गया है, जो कि चुनावी राजनीति में अपनी पहचान बनाने का प्रयास हो सकता है। इस बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले का स्वागत करने के साथ ही केंद्र सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया है।

बंगाल का नाम: उलझनें और आरोप

ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य का नाम ‘बांग्ला’ करने का प्रस्ताव 2018 में ही केंद्र को भेजा गया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उनके मुताबिक, केंद्र सरकार का पक्ष असमान है, क्योंकि केरलम का पक्का निर्णय लेने में तो तेजी दिखा रही है, लेकिन बांग्ला के मामले में कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा। इसके अलावा, भाजपा द्वारा यह कहा गया है कि बांग्ला नाम की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

पार्लियामेंट्री मंजूरी की जरूरत

केंद्रीय कैबिनेट ने केरल का नाम बदलने के लिए प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन इसका क्रियान्वयन संसद से मंजूरी के बाद ही संभव होगा। राजनीतिक विश्लेषक इस निर्णय को क्षेत्रीय अस्मिता की अवधारणा से जोड़कर देख रहे हैं। क्या केरलम का नामकरण चुनावी रणनीति का एक हिस्सा है? इस पर कई मत हैं, परंतु यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है।

शासनिक प्रक्रिया और चुनौती

राज्य का नाम बदलना हमेशा से एक जटिल प्रशासनिक प्रक्रिया रही है, जिसमें कई विभागों जैसे रेलवे, डाक और उड्डयन को प्रभावित किया जाता है। इसी बीच, विदेश मंत्रालय भी इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति दर्ज कर चुका है। ऐसे में, क्या केंद्र वास्तव में बांग्ला नाम को स्वीकार करेगा, यह देखना होगा।

एक ऐतिहासिक संदर्भ

1947 के विभाजन के बाद बंगाल को पूर्व और पश्चिमी भागों में बांट दिया गया। इसके बाद से पश्चिम बंगाल का नाम कायम है, जबकि पूर्वी बंगाल ने फिर बांग्लादेश के रूप में अपनी पहचान बनायी। ममता बनर्जी बांग्ला नाम की जरुरत बताते हुए इसे सांस्कृतिक पहचान का अग्रदूत मानती हैं, वहीं केंद्र सरकार कई ऐतिहासिक व प्रशासनिक जटिलताओं को ध्यान में रखकर इस पर दूरी बनाये हुए है।

चुनावी राजनीति का नया औजार?

क्या नाम बदलना सिर्फ पहचान की लड़ाई है या यह चुनावी राजनीति का एक नया औजार भी बन सकता है? इस पर बहस जारी है। केरलम का नामकरण निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जिसने न केवल राजनीति में हलचल मचाई है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान को भी नया दिशा देने का प्रयास किया है।

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