नागपुर में बोले भागवत- ‘युद्ध स्वार्थी हितों का परिणाम, दुनिया को संघर्ष की नहीं, सद्भाव की जरूरत’

The CSR Journal Magazine

भागवत ने कहा, शांति के लिए एकता जरूरी

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को नागपुर में एक सभा के दौरान कहा कि दुनिया में होने वाले संघर्षों की असली वजह स्वार्थी हित और वर्चस्व की चाहत है। उन्होंने बताया कि स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म को मानने से ही हासिल की जा सकती है। वे विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।

मनुष्य का नियम निभाता है भारत

भागवत ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत मानवता के नियम का पालन करता है। उन्होंने इस पर जोर दिया कि अन्य देशों में ‘योग्यतम की उत्तरजीविता’ का सिद्धांत है, जो अक्सर स्वार्थ पर आधारित होता है। उनकी बातें यह स्पष्ट करती हैं कि मानवता के लिए एक बेहतर दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

खुद को मजबूत करने की राह

अपने भाषण में भागवत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के ढांचे में बदलाव का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि RSS को अब 86 छोटे संभागों में बांटा जाएगा। इसका उद्देश्य स्वयंसेवकों को मजबूत करना और काम को अधिक व्यवस्थित तरीके से करना है। भागवत ने कहा कि संगठन में यह परिवर्तन स्थानीय स्तर पर बेहतर कार्य करने के लिए किया जा रहा है।

स्थानीय स्तर पर काम का नया तरीका

भागवत ने यह भी बताया कि पहले RSS में 46 प्रांत थे, जिन्हें अब बढ़ाकर 86 छोटे-छोटे इकाईयों में विभाजित किया जाएगा। यह निर्णय संघ की कार्यप्रणाली को और भी अधिक दक्ष बनाने के लिए लिया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संघ का कामकाज का तरीका नहीं बदलेगा और मित्रता के साथ समाज में बदलाव लाना ही संघ का मुख्य उद्देश्य रहेगा।

संघ की दृष्टि: उदाहरण बनना

भागवत ने आगे कहा कि संघ का दृष्टिकोण हमेशा दोस्ती बनाकर और अच्छे उदाहरण पेश करके समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रक्रिया के जरिए समाज में बदलाव लाने में सफलता मिलेगी। यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उनके विचार आज की चुनौतियों का सामना करने का मार्गदर्शन कर सकते हैं।

स्वार्थ के संघर्षों का समाधान

सख्त शांति की आवश्यकता पर उन्होंने जोर दिया, यह कहते हुए कि पिछले 2,000 वर्षों में कई विचारों पर प्रयोग किए गए हैं, लेकिन उन्हें बहुत कम सफलता मिली। अब समय आ गया है कि मानवता को साथ लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उनका दृष्टिकोण भले ही सांस्कृतिक हो, लेकिन इसका उद्देश्य शांति और सद्भाव को बढ़ावा देना है।

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