मुंबई के कांदिवली वेस्ट स्थित महावीर नगर में रहने वाले 32 वर्षीय भारतीय नाविक दिक्षित सोलंकी की ईरान–इज़राइल संघर्ष के बीच समुद्र में हुए हमले में मौत हो गई। हालांकि घटना के कई दिन बाद भी उनका शव नहीं मिल पाया है। इसी कारण उनके पिता अमरतलाल सोलंकी ने बेटे की तस्वीर पर माला चढ़ाने से इनकार कर दिया है और उनका कहना है कि जब तक बेटे का शव घर नहीं आएगा, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
तेल टैंकर धमाके में दीक्षित की मौत
जानकारी के अनुसार, 1 मार्च को एमकेडी व्योम (MKD Vyom) नामक तेल टैंकर ओमान के मस्कट तट से लगभग 52 नॉटिकल मील दूर था। उसी दौरान एक मानव रहित नाव (ड्रोन बोट) से हमला हुआ, जिससे जहाज के इंजन रूम में जोरदार विस्फोट और आग लग गई। उस समय दिक्षित सोलंकी अपनी ड्यूटी के लिए इंजन रूम में मौजूद थे और विस्फोट में उनकी मौत हो गई। जहाज में मौजूद अन्य 21 क्रू सदस्य, जिनमें भारत, यूक्रेन और बांग्लादेश के नागरिक शामिल थे, सुरक्षित बचा लिए गए और ओमान में उतार दिए गए।
कंपनी प्रबंधन पर भ्रामक जानकारी देने का आरोप
दिक्षित के पिता अमरतलाल सोलंकी, जो खुद भी पूर्व नाविक रह चुके हैं, का कहना है कि उन्हें शुरुआत से ही अलग-अलग तरह की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि जहाज प्रबंधन कंपनी के अधिकारियों ने पहले कहा कि दिक्षित की सांसें बंद हो गई हैं, बाद में संदेश भेजकर बताया कि उनकी मौत हो चुकी है और शव जल्द भारत भेजा जाएगा। लेकिन बाद में कहा गया कि शव को जहाज से निकालने की कोशिश सफल नहीं हो सकी।अमरतलाल का सवाल है कि यदि क्रू सदस्यों ने शव को ऊपर डेक तक खींच लिया था तो उसे बाहर क्यों नहीं लाया गया। उन्होंने इस मामले में सीमेन एम्प्लॉयमेंट ऑफिस और नाविकों के यूनियन को पत्र लिखकर जांच की मांग की है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हस्तक्षेप करने की अपील करने की बात कही है।
हादसे ने बदली परिवार की तस्वीर
दिक्षित सोलंकी गुजरात के खारवा समुदाय से थे, जो परंपरागत रूप से मछली पकड़ने और समुद्री काम से जुड़ा रहा है। वे पिछले आठ वर्षों से समुद्री जहाजों पर काम कर रहे थे और तेल टैंकर पर ओइलर के पद पर तैनात थे। उनके पिता ने ही उन्हें उसी कंपनी में नौकरी दिलाई थी। परिवार पहले से ही दुख में था क्योंकि दिक्षित की मां का पिछले साल अक्टूबर में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। दिक्षित उसी समय आखिरी बार घर आए थे। इसके बाद परिवार बहन की शादी की तैयारी कर रहा था, लेकिन इस हादसे ने सब कुछ बदल दिया।
मौत से पहले परिवार के नाम आखिरी संदेश
घटना से कुछ घंटे पहले दिक्षित ने परिवार को संदेश भेजा था कि समुद्र में “युद्ध जैसे हालात” हैं और वे अपनी शिफ्ट के लिए इंजन रूम में जा रहे हैं। इसके कुछ समय बाद ही जहाज पर हमला हुआ। इस घटना के बाद राष्ट्रपति की ओर से भी परिवार को संवेदना व्यक्त की गई और शव की तलाश के लिए प्रयास जारी रखने का आश्वासन दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, उस समय एमकेडी व्योम जहाज में लगभग 58 हजार मीट्रिक टन पेट्रोल लदा हुआ था।
इंतज़ार में परिवार
महावीर नगर में पिछले 40 वर्षों से रह रहे सोलंकी परिवार के पड़ोसी भी इस खबर से स्तब्ध हैं। पड़ोसियों का कहना है कि दिक्षित बहुत शांत और अच्छे स्वभाव के युवक थे। फिलहाल परिवार गहरे सदमे में है और पिता अपने बेटे के शव का इंतजार कर रहे हैं, ताकि वे उसका अंतिम संस्कार कर सकें।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!
App Store – https://apps.apple.com/in/ app/newspin/id6746449540
Google Play Store – https://play.google.com/

