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February 22, 2026

OTT कंटेंट पर संघ प्रमुख का बड़ा बयान, जानिए क्यों कही ‘खुद तय करो क्या देखना है?

The CSR Journal Magazine
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में ओटीटी प्लेटफार्मों पर दिखाई जा रही सामग्री के विषय में अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्लेटफार्मों पर क्या देखना है, यह पूरी तरह से व्यक्ति के विवेक पर निर्भर करता है। इस दौरान उन्होंने दर्शकों को धार्मिक सामग्री देखने की सलाह दी। संघ प्रमुख ने समझाया कि ओटीटी पर हर प्रकार की सामग्री उपलब्ध है, चुनना आपकी जिम्मेदारी है।

चित्रा वाघ ने की अश्लील सामग्री पर प्रतिबंध की मांग

बीजेपी की नेत्री चित्रा वाघ ने हाल ही में अश्लील वेब सीरीज पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। उनका कहना था कि यह सामग्री बच्चों के लिए खतरा बन रही है। इस मांग के समर्थन में उन्होंने महाराष्ट्र में एक विशेष वेब सीरीज ‘हाउस अरेस्ट’ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की। उन्होंने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री से इस तरह की आपत्तिजनक कंटेंट पर रोक लगाने का आग्रह किया।

सांस्कृतिक सामग्री की ओर ध्यान देने की अपील

भागवत ने मेरठ में आयोजित एक कार्यक्रम में सुझाव दिया कि दर्शकों को फालतू की चीजें देखने के बजाय सांस्कृतिक और धार्मिक मुददों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल मनोरंजन नहीं बल्कि ज्ञान का भी एक अच्छा स्रोत है। भागवत ने ओटीटी प्लेटफार्मों पर उपलब्ध धार्मिक सामग्री को देखकर समाज को सशक्त करने की बात भी की।

केंद्र सरकार द्वारा की गई समस्या की पहचान

केंद्र सरकार ने पहले ही ओटीटी प्लेटफार्मों पर प्रसारित हो रही आपत्तिजनक सामग्री के खिलाफ कदम उठाने का कार्य शुरू किया है। दिसंबर 2024 में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री ने जानकारी दी थी कि 18 ओटीटी प्लेटफार्मों को अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री के लिए ब्लॉक किया गया है। यह कदम दर्शाता है कि सरकार इस क्षेत्र में सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।

सुप्रीम कोर्ट की चिंताएं भी हैं प्रासंगिक

सुप्रीम कोर्ट ने भी सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफर्म्स पर प्रसारित हो रही सामग्री के खिलाफ चिंता व्यक्त की है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह इन प्लेटफार्मों पर नियंत्रित सामग्री की सुरक्षा को लेकर कदम उठाए। यह संकेत है कि सरकार और न्यायपालिका दोनो इस विषय पर गंभीर हैं।

क्या आगे की योजना है?

जैसे-जैसे ओटीटी प्लेटफार्मों की लोकप्रियता बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस क्षेत्र में नई चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। सामग्री के चुनाव का अधिकार व्यक्तिगत विवेक पर निर्भर होना दर्शकों के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। इस बाबत संघ और बीजेपी की इस सक्रियता से यह मूल प्रश्न सामने आता है कि समाज और संस्कृति के लिए क्या उचित है।
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