मोहन भागवत का संबोधन: पीएम मोदी ने की तारीफ, भारत में सत्ता परिवर्तन नहीं होगा

The CSR Journal Magazine
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन की प्रशंसा की है। नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने उन ताकतों पर भी निशाना साधा जो व्यवस्था को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। भागवत ने कहा कि फ्रांस, अल्बानिया और बांग्लादेश में चल रही अशांति एक ‘पश्चिमी तूफान’ का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री का प्रेरणादायी संबोधन पर जोर

मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, “नागपुर में शताब्दी वर्ष श्री विजयादशमी उत्सव के दौरान मोहन भागवत जी का अत्यंत प्रेरणादायी संबोधन हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता की आवश्यकता और समाज के चरित्र को सुदृढ़ करने जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।” पीएम मोदी ने भागवत के ‘राष्ट्र निर्माण’ पर दिए गए विचारों की भी सराहना की।

सेवा और राष्ट्र निर्माण की प्रतिबद्धता

मोदी ने आगे कहा, “विशेष रूप से उल्लेखनीय था उनका जोर, जो उन्होंने ‘सेवा’ और ‘राष्ट्र निर्माण’ के प्रति उस प्रतिबद्धता पर दिया, जो हर RSS स्वयंसेवक के जीवन का अभिन्न अंग है।” उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जो सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाने में सहायक हो सकते हैं।

मोहन भागवत के विचारों की मुख्य बातें

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में भी ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जब भारत आगे बढ़ेगा, तो वह ऐसी हरकतों को रोक देगा। उन्होंने भारत की विविधता और वैश्विक मंच पर इसके बढ़ते कद की सराहना की। भागवत ने कहा, “फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल या बांग्लादेश में जो हुआ, उसे देखिए। वहां कहा जाता है कि सत्ता बदलने से हालात बदल जाएंगे। लेकिन ऐसा कहीं कभी नहीं हुआ।”

भारत की ताकत और एकता का संदेश

भागवत ने स्पष्ट किया कि दुनिया भर में संकीर्ण स्वार्थों को साधने वाले लोग प्रभावशाली बने रहने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा, “जब भारत आगे बढ़ेगा, तो वह ऐसी हरकतों को रोक देगा।” यह बयान भारत की एकता और ताकत को दर्शाता है, जो किसी भी बाहरी दबाव का सामना करने में सक्षम है।

कार्यक्रम की शुरुआत और महत्व

इस कार्यक्रम की शुरुआत RSS प्रमुख के औपचारिक स्वागत, संगठन के संस्थापक हेडगेवार को पुष्पांजलि अर्पित करने और ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ के साथ हुई। यह कार्यक्रम RSS की स्थापना के 101वें वर्ष का प्रतीक है। इससे पहले, भागवत ने नागपुर के धंतोली स्थित श्री-श्री सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में पूजा-अर्चना की। महाअष्टमी के अवसर पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि भक्त देवी मां का आशीर्वाद मांगते हैं, क्योंकि इस दुनिया में सब कुछ उन्हीं की कृपा से चलता है।

भारत की प्रगति का संकल्प

मोहन भागवत के संबोधन ने यह स्पष्ट किया कि RSS का लक्ष्य न केवल भारत की संस्कृति और एकता को बनाए रखना है, बल्कि इसे आगे बढ़ाना भी है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई प्रशंसा ने इस संदेश को और मजबूत किया है कि भारत का भविष्य उज्ज्वल है और इसे किसी भी बाहरी ताकत से प्रभावित नहीं किया जा सकता।

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