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March 11, 2026

मध्य पूर्व में तनाव का असर, क्या भारत की बिजली व्यवस्था होगा प्रभावित?

The CSR Journal Magazine
मध्य पूर्व में जारी बढ़ते तनाव और उनके प्रभाव से भारत की बिजली व्यवस्था पर असर पड़ेगा या नहीं, यह सवाल खड़ा हो गया है। भारत, जिसकी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है, अब स्थिति को लेकर चिंतित है। ऐसी आशंकाएं हैं कि अगर स्थिति बिगड़ती है, तो इसका असर हमारी बिजली आपूर्ति पर पड़ सकता है।

एलएनजी का संकट

मध्य पूर्व का क्षेत्र दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा सप्लाई क्षेत्र है, और भारत के लिए कतर से एलएनजी (Liquefied Natural Gas) की आपूर्ति एक प्रमुख स्रोत है। हाल ही में कतर एनर्जी ने क्योंकि क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है, अपने प्लांट और प्रोडक्शन को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है। इसके चलते वैश्विक स्तर पर एलएनजी गैस आधारित बिजली उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आ सकती है।

भारत की ऊर्जा संरचना

भारत में बिजली उत्पादन का लगभग 70 से 75 प्रतिशत हिस्सा कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स से आता है। गैस आधारित बिजली केवल 5 से 7 प्रतिशत के आसपास है। इस वजह से, यदि एलएनजी की आपूर्ति बाधित होती है तो उसके प्रभाव सीमित रह सकते हैं। साथ ही, भारत में 400 अरब टन से अधिक कोयले का भंडार भी है, जो इस संकट के समय में सहारा बन सकता है।

चार प्रमुख ऊर्जा स्रोत

भारत की बिजली का उत्पादन मुख्य रूप से चार स्रोतों पर निर्भर है: कोयला, जलविद्युत, गैस आधारित और नवीकरणीय ऊर्जा। जलविद्युत परियोजनाओं से करीब 10 से 12 प्रतिशत और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सौर और पवन से लगभग 15 प्रतिशत ऊर्जा मिलती है। लेकिन कोयला आधारित थर्मल पावर अब भी ऊर्जा की रीढ़ बना हुआ है।

गर्मी में बिजली की अधिकतम मांग

गर्मी के मौसम में भारत में बिजली की मांग तेजी से बढ़ जाती है, और इस वर्ष औसत बिजली की मांग 260 से 270 गीगावाट तक पहुंच सकती है। इस बार सरकार ने पहले से ही तैयारी कर ली है और सभी कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी आवश्यक भंडार बनाए रखें।

रिकॉर्ड स्तर पर बिजली उत्पादन की योजना

सरकार का लक्ष्य इस वर्ष बिजली उत्पादन को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचाना है। अनुमान है कि 2025-26 के दौरान कुल बिजली उत्पादन लगभग 1,900 से 2,000 बिलियन यूनिट होगा। नवीकरणीय ऊर्जा पर भी तेजी से काम किया जा रहा है, जबकि 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार की रणनीति

यदि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है एवं एलएनजी आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका निश्चित रूप से कुछ असर पड़ेगा, खासकर गैस आधारित उद्योगों पर। लेकिन बिजली उत्पादन के मामले में भारत की स्थिति मजबूत है। सरकार का दावा है कि देश में बिजली की कोई कमी नहीं होगी और उत्पादन को बढ़ा कर मांग को पूरा किया जाएगा।

बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित

ऊर्जा राज्य मंत्री ने बताया है कि देश में चालू वर्ष के दौरान 14 लाख 27 हजार 436 मिलियन यूनिट की ऊर्जा की जरूरत होती है, जबकि आपूर्ति 14 लाख 27 हजार 9 मिलियन यूनिट की रही। इस तरह, आने वाले महीनों में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए सभी तैयारियां पूर्ण हैं।
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