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February 23, 2026

सुप्रीम कोर्ट में मेटा-वॉट्सएप प्राइवेसी पॉलिसी पर सुनवाई आज: 213 करोड़ रुपए के जुर्माने के खिलाफ फैसला संभव

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट में आज मेटा और वॉट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी मामले पर सुनवाई होने जा रही है। मेटा ने 2021 में अपनी प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर 213 करोड़ रुपए के जुर्माने के खिलाफ याचिका दायर की थी। भारत के कंपटीशन कमीशन (CCI) ने नवंबर 2024 में इस कंपनी पर यह जुर्माना लगाया था। 3 फरवरी को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मेटा और वॉट्सएप को उनकी प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि वह किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने की अनुमति नहीं देगी।

नागरिकों के अधिकारों का सुरक्षात्मक दृष्टिकोण

मुख्य न्यायाधीश सूर्याकांत की बेंच ने यह भी कहा है कि देशवासियों के प्राइवेसी अधिकारों की सुरक्षा बेहद जरूरी है। कोर्ट ने मेटा और वॉट्सएप की प्राइवेसी संबंधित शर्तों को इस हद तक जटिल बताया कि आम लोग उन्हें समझ नहीं पाते। यह एक ऐसा तरीका है जिससे लोगों की निजी जानकारी चुराई जा रही है। न्यायालय ने कहा कि अगर मेटा और वॉट्सएप अपनी नीतियों में सुधार नहीं करते, तो कोर्ट को अपनी कार्रवाई करनी पड़ेगी।

सुनवाई में विलंब, स्वास्थ्य कारणों से टली सुनवाई

इस मुद्दे पर अगली सुनवाई 9 फरवरी को होनी थी, लेकिन वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की तबीयत खराब होने के कारण इसे टालना पड़ा। पिछली सुनवाई 3 जनवरी 2026 को हुई थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने मेटा और वॉट्सएप को भारत छोड़ने की कड़ी चेतावनी दी थी। अदालत ने कहा था कि यदि कंपनियां कानून नहीं मानेंगी, तो उन्हें यहां बने रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

भारत में वॉट्सएप का भविष्य खतरे में?

भारत में 140 करोड़ की जनसंख्या के साथ वॉट्सएप के 85 करोड़ से अधिक यूजर हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सएप को चेतावनी दी है कि यदि वे प्राइवेसी पर ध्यान नहीं देंगे, तो उन्हें भारत छोड़ना पड़ सकता है। इसका कारण है एडवर्टाइजिंग, यूजर डेटा और प्राइवेसी के मुद्दे। लोग अपनी निजी जानकारी की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं और अदालत इस दिशा में सख्ती बरत रही है।

कानूनी चुनौतियों का सामना करती मेटा

मेटा के लिए यह याचिका एक बड़ी चुनौती बन गई है। अदालत ने ये बातें स्पष्ट की हैं कि यदि कंपनियों का व्यवहार नहीं सुधरता है, तो उन्हें अपनी नीतियों में सुधार करना होगा। अदालत ने कहा कि डेटा गोपनीयता पर ध्यान न देने वाले एप्स के प्रति वे बर्दाश्त नहीं करेंगे। अब इन कंपनियों के लिए यह तय करना होगा कि वे अपने यूजर्स की प्राइवेसी को प्राथमिकता दें या कानूनी दांव-पेच में उलझें।
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