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January 17, 2026

मौनी अमावस्या 2026: क्यों रखा जाता है मौन और क्या है इसका असली पुण्य? जानें शुभ योग, मौन व्रत और पितृ तर्पण का महत्व

The CSR Journal Magazine
वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार को मनाई जाएगी। यह अमावस्या तिथि 18 जनवरी को रात 12:03 बजे शुरू होकर 19 जनवरी को रात 1:21 बजे तक रहेगी। इस दौरान कई शुभ योग और नक्षत्र बन रहे हैं, जिससे यह दिन धार्मिक अनुष्ठान, स्नान और दान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

मौनी अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व

हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व होता है, लेकिन माघ महीने की अमावस्या, जिसे मौनी अमावस्या कहा जाता है, इसे सबसे पवित्र माना जाता है। “मौनी” का अर्थ है मौन धारण करने वाला, और इस दिन मौन व्रत रखने से मन, वाणी और विचारों की शुद्धि होती है। शास्त्रों के अनुसार मौन व्रत आत्मचिंतन और संयम की ओर प्रेरित करता है और गुस्सा, झूठ तथा नकारात्मक सोच से मुक्ति मिलती है।
मौनी अमावस्या पितरों से जुड़ी होने के कारण इस दिन तर्पण और दान करने का विशेष महत्व है। श्रद्धा और भक्ति से किया गया तर्पण पितरों को तृप्त करता है और पितृ दोष को कम करने में मददगार माना जाता है। यह दिन साधक के भीतर शांति, संतुलन और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ाता है।

स्नान और दान के शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या का सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 10:14 बजे से अगले दिन 7:31 बजे तक रहेगा। इसके अलावा दिनभर हर्षण योग और शिव वास योग भी बने रहेंगे। नक्षत्रों में पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा का संयोग भी है।
स्नान और दान के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
  • ब्रह्म मुहूर्त: 05:32 AM से 06:23 AM तक
  • प्रातः संध्या: 05:58 AM से 07:15 AM तक
  • अभिजीत मुहूर्त: 12:27 PM से 01:11 PM तक
  • पितृ तर्पण और श्राद्ध हेतु शुभ मुहूर्त: 11:30 AM से 02:30 PM तक
पवित्र नदियों में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यदि किसी कारणवश यह संभव न हो, तो घर पर स्नान करते समय थोड़ा गंगाजल मिलाकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान किया जा सकता है, जिसे भी गंगा स्नान के समान पुण्यकारी माना गया है।

मौनी अमावस्या पर उपाय और दान

इस दिन मौन व्रत रखना अत्यंत शुभ होता है। दिनभर कम से कम बोलने और नकारात्मक भावनाओं से दूर रहने से मन शांत और शुद्ध रहता है। साथ ही, जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, कंबल, तिल, गुड़ या काले तिल का दान करना चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गौसेवा और पशु-पक्षियों को चारा डालना भी विशेष पुण्य प्रदान करता है। संध्या समय घर की दक्षिण दिशा में चौमुखी दीपक जलाना पितरों की कृपा और घर में शांति एवं खुशहाली लाने में सहायक माना जाता है।

आसान मंत्र और पूजा विधि

मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद कुछ छोटे मंत्रों का जप करने से विशेष फल प्राप्त होता है। प्रमुख मंत्र हैं:
  • पितरों के लिए:  ॐ पितृभ्यो नमः
  • भगवान विष्णु के लिए:  ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  • मौन व्रत के लिए:  ॐ मौनं परमं तपः

पूजा विधि:

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो नदी में स्नान करें, अन्यथा घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें और साफ कपड़े पहनकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। तुलसी दल, फूल और दीपक चढ़ाएं और विष्णु मंत्र या गायत्री मंत्र का जप करें। अंत में अपनी क्षमता अनुसार दान करें और दिनभर संयम बनाए रखें।

मौनी अमावस्या का सार

मौनी अमावस्या केवल मौन व्रत और पितृ तर्पण का दिन ही नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक साधना, आत्मनिरीक्षण और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का अवसर भी है। इस दिन किये गए स्नान, दान, पूजा और जप से जीवन में शांति, सुख और समृद्धि आती है।
वर्ष 2026 की मौनी अमावस्या पर धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के यह शुभ योग इसे विशेष बनाते हैं। इसलिए श्रद्धा और भक्ति भाव से यह पर्व मनाना हर व्यक्ति के लिए लाभकारी और पुण्यकारी माना गया है।
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