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February 22, 2026

शादीशुदा रिश्तों में संदेह बढ़ने से प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसियों का बढ़ता दखल, विशेषकर NRI मामलों में

The CSR Journal Magazine
शादीशुदा रिश्तों पर शक अब केवल चारदीवारी तक सीमित नहीं रह गया है। कई कपल प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसियों की मदद ले रहे हैं ताकि अपने संदेहों की पुष्टि कर सकें। एजेंसियों के अनुसार, उनके पास आने वाले केसों में लगभग 40 प्रतिशत मामले एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर से जुड़े होते हैं। जहां एक ओर लोग अपनी घर की शांति को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हर 10 में से 9 शक सही साबित होते हैं। यह एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जिसमें विश्वास की कमी साफ नजर आती है।

सर्विलांस की लागत: कितना खर्च होता है?

डिटेक्टिव एजेंसियों की सेवाएं महंगी होती हैं। एक दिन की फिजिकल सर्विलांस का खर्च 6 से 7 हजार रुपए तक आता है, जबकि एक हफ्ते की जांच 40 से 50 हजार रुपए तक पहुंच सकती है। ये लागतें कपल की मानसिक स्थिति को और कठिन बना देती हैं, जो पहले से ही तनाव में होते हैं। न केवल वित्तीय दबाव होता है, बल्कि मानसिक दबाव भी लोगों को परेशान कर रहा है।

NRI मामलों में वृद्धि: मुख्य कारण

दिल्ली और अन्य बड़े शहरों की डिटेक्टिव एजेंसियां पंजाब में तेजी से सक्रिय हो रही हैं। एनआरआई मामलों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इस कारण, पंजाब में हर महीने लगभग 300 केस एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की जांच के लिए आ रहे हैं। यह वर्षा की तरह रिश्तों में दरार डालने वाला एक गंभीर मुद्दा बन गया है।

केस स्टडी: शक ने बदल दी दिशा

हर केस में अलग सी कहानी होती है। पहली स्टडी में, एक पत्नी विदेश में रहने वाले पति से 15 दिन के लिए भारत आई थी। पति का शक सही नहीं था, क्योंकि डिटेक्टिव एजेंसी ने जांच के बाद कोई ठोस सबूत नहीं पाया। दूसरी स्टडी में, एक आर्मी ऑफिसर की पत्नी खुद एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में थी और बच्चों को अपने पति के खिलाफ भड़काती रही। यह बात कुछ समय बाद उजागर हुई।

रिश्तों की कड़वाहट: टकराव की घटनाएं

तीसरे केस में, मोहाली के एक रियल एस्टेट कर्मी को उसकी पत्नी ने ऑफिस में किसी के साथ अफेयर करने का शक किया। जब वास्तविकता सामने आई, तो सार्वजनिक स्थान पर हाथापाई तक हुई। ऐसे स्टॉरीज़ यह दिखाते हैं कि संदेह और सच्चाई का सामना होना कभी-कभी बेहद खतरनाक हो सकता है।

सत्य की खोज: जरूरी लेकिन चुनौतीपूर्ण

एक केस स्टडी में, एक वर्किंग महिला पर उसके पति को शक था कि उसके अफेयर हो सकते हैं। जांच के बाद सबूत मिले और मामला वकीलों तक पहुंचा। डिटेक्टिव एजेंसियों का कहना है कि यह सबूत केवल सच की पुष्टि नहीं करते, बल्कि रिश्तों को अधिक मजबूत बनाने का भी एक तरीका हो सकते हैं।

समस्या का मूल: घटते संवाद और बढ़ती दूरी

चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर विकास सोनकर कहते हैं कि जो लोग डिटेक्टिव एजेंसी की मदद लेते हैं, वे हल्के में नहीं आते। मानसिक तनाव और बढ़ती दूरी रिश्तों को कमजोर कर रही है। इस सबके बीच सच को जानना जरूरी है, लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण है कि बातचीत के जरिए समस्याओं को हल किया जाए।
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