बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले Congress ने अपनी राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। लंबे समय तक Mahagathbandhan में ‘छोटे भाई’ की भूमिका निभाने वाली पार्टी अब अपने दम पर भी मजबूती से खड़े होने का संकेत दे रही है। पार्टी ने इस बार साफ कर दिया है कि बिहार में उसकी भूमिका सिर्फ supporting partner की नहीं, बल्कि ‘Equal Stakeholder’ की होगी।
Rahul Gandhi की Voter Adhikar Yatra और Priyanka Gandhi की Entry
कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार Rahul Gandhi की Voter Adhikar Yatra से हुआ है। खासकर जब प्रियंका गांधी Priyanka Gandhi इसमें शामिल हुईं, तो पार्टी कार्यकर्ताओं के उत्साह को और बल मिला। पार्टी का कहना है कि यह अभियान ग्रामीण इलाकों, चौक-चौराहों और गांव-गांव तक कांग्रेस को सीधा जनता से जोड़ रहा है।
1990 के बाद से कांग्रेस का सफर
90 के दशक के बाद कांग्रेस की बिहार राजनीति में पकड़ लगातार कमजोर होती गई। 1990 में पार्टी का वोट शेयर लगभग 25% था जो बाद में घटकर 10% से भी नीचे चला गया।
2000: कांग्रेस केवल 11 सीटों पर सिमटी।
2010: महज 4 सीटों पर जीत मिली।
2015: महागठबंधन में कांग्रेस को 27 सीटें मिलीं और सभी पर जीत हासिल हुई।
2020: कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सिर्फ 19 सीटें जीतीं। वोट शेयर लगभग 9.5% और जीत दर 27% रही।
सीट बंटवारे पर नया रुख
इस बार कांग्रेस ने संकेत दे दिया है कि महागठबंधन में सीट बंटवारे (Seat Sharing) का पुराना फार्मूला अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। 2020 में RJD को 144, कांग्रेस को 70 और Left Parties को 29 सीटें मिली थीं। लेकिन 2025 में कांग्रेस न सिर्फ seat numbers increase करने की मांग कर रही है, बल्कि वह उन सीटों पर जोर दे रही है जहां पार्टी की जीत की संभावना ज्यादा है।
CM Face पर चुप्पी लेकिन बड़ा संकेत
अब तक राहुल गांधी ने CM Faceपर कोई बयान नहीं दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस चाहती है कि इस बार निर्णय दिल्ली और पटना मिलकर करें। यानी पार्टी साफ कर रही है कि वह सिर्फ चुनावी सहयोगी नहीं, बल्कि decision making process का हिस्सा बनेगी।
2025 में कांग्रेस की मांग
सीटों की संख्या में बढ़ोतरी
Winning Potential वाली सीटों पर दावा
CM Face के फैसले में सक्रिय भूमिका
कुल मिलाकर, Bihar Assembly Election 2025 कांग्रेस के लिए बेहद अहम है। पार्टी अब अपनी पारंपरिक ‘छोटे भाई’ की छवि से निकलकर महागठबंधन में ‘Equal Partner’ के रूप में उभरने की कोशिश कर रही है। राहुल और प्रियंका गांधी की सक्रियता ने कार्यकर्ताओं में जोश भरा है, लेकिन अंतिम चुनौती सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति पर निर्भर करेगी।