Maharashtra Politics | BMC Election से पहले बदले सियासी संकेत
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अपने चाचा और राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार से मुंबई स्थित ‘सिल्वर ओक’ आवास पर हुई मुलाकात ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इस मुलाकात को पवार चाचा–भतीजे के बीच बढ़ती नजदीकियों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है और इसी के साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संभावित गठबंधन की अटकलें भी तेज हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब महाराष्ट्र में आगामी महानगर पालिका चुनाव यानी BMC Election को लेकर सभी दल अपनी रणनीति नए सिरे से तैयार कर रहे हैं। ऐसे में NCP Gathbandhan की चर्चा सिर्फ पार्टी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर पूरे राज्य की राजनीति पर पड़ता दिख रहा है।
दिल्ली में हुई अहम बातचीत, भाजपा नेतृत्व भी रहा भरोसे में
सूत्रों के मुताबिक, दोनों राष्ट्रवादी गुटों के एक साथ आने को लेकर सभी अहम और निर्णायक बातचीत दिल्ली में हुई है। बताया जा रहा है कि अजित पवार ने दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को विश्वास में लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस के गठबंधन और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की है। इस पहलू ने Maharashtra Politics में नए समीकरणों की संभावना को और मजबूत कर दिया है। इससे पहले राष्ट्रवादी सांसद सुप्रिया सुले की अजित पवार से हुई मुलाकात ने भी इन अटकलों को हवा दी थी। लगातार हो रही इन बैठकों से यह संकेत मिल रहा है कि दोनों गुटों के बीच संवाद की प्रक्रिया दोबारा शुरू हो चुकी है। चर्चा का केंद्र पार्टी की आगे की दिशा, संगठन की मजबूती और आने वाले स्थानीय निकाय चुनाव बताए जा रहे हैं।
स्थानीय चुनावों से पहले क्यों अहम है यह एकजुटता
दरअसल, राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेद, सत्ता में भूमिका को लेकर असहमति और आगामी स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव इस एकजुटता की चर्चा को और अहम बना देते हैं। यदि पवार परिवार के भीतर संवाद बढ़ता है, तो इसका सकारात्मक संदेश पार्टी कार्यकर्ताओं तक भी पहुंच सकता है, जिससे संगठन को नई ताकत मिलने की संभावना है। फिलहाल, इन सभी घटनाक्रमों पर किसी भी गुट की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन सिल्वर ओक पर हुई मुलाकात और दिल्ली में चल रही राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अब पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पवार चाचा–भतीजा सच में एक मंच पर आएंगे या यह मुलाकात सिर्फ सियासी शिष्टाचार तक सीमित रह जाएगी।
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