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February 9, 2026

Maharashtra Government Hospital New Rate: महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में अब फ्री नहीं होगा इलाज, गरीबों से वसूलेगी पैसा

The CSR Journal Magazine
महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी अस्पतालों (Maharashtra Government Hospital New Rate) में इलाज और जांच सेवाओं के लिए नया रेट लागू करने का बड़ा फैसला किया है। जनवरी 16 को जारी सरकारी प्रस्ताव (GR) के तहत अब राज्य के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मूल रूप से पहले मुफ्त या अत्यंत कम शुल्क में दी जाने वाली सेवाओं के लिए भी निर्धारित कीमतें चुकानी होंगी।

Maharashtra Government Hospital New Rate: नई दरें क्या-क्या हैं?

सरकार द्वारा जारी रेट कार्ड के मुताबिक अब मरीजों को ये शुल्क लागू होंगे:
OPD पंजीकरण: ₹5
इनपेशेंट (रहने) चार्ज: ₹10/दिन
आम लैब जांच (जैसे हीमोग्लोबिन, यूरिन): ₹15 प्रति टेस्ट
इमेजिंग/डायग्नोस्टिक टेस्ट: X-रे/CT/MRI के लिए ₹100–₹1,600 तक
सर्जरी लागत: ₹60 से लेकर ₹40,000 तक (जोड़ बदलना जैसी बड़ी सर्जरी)
ICU चार्ज: ₹100/दिन
डायलिसिस: ₹150/सेशन
डिलीवरी चार्ज: पहली डिलीवरी फ्री, दूसरी ₹50, तीसरी और आगे ₹250 तक
कमरे का चार्ज: AC ₹150/दिन, Non-AC ₹75/दिन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में इलाज को रोकना या स्थगित नहीं किया जाएगा, और हर उपचार में चिकित्सा अधिकारी का नाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होना चाहिए।

Maharashtra Government Hospital New Rate: क्या बदलाव लागू हो गए हैं?

हालांकि नई फीस संरचना आधिकारिक रूप से जारी हो चुकी है, अभी तक जमीनी स्तर पर इसे लागू नहीं किया गया है। कई जिलों के सिविल सर्जनों ने कहा है कि पिछले प्रावधानों के साथ नया रेट कार्ड कुछ स्थानों पर विरोधात्मक है और इसे लेकर स्पष्ट कार्य निर्देशों की आवश्यकता है।

सरकार के इस फैसले का हो रहा है जमकर विरोध

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की दरें सरकारी अस्पतालों की सेवा गुणवत्ता, संसाधन प्रबंधन और पारदर्शिता को बढ़ा सकती हैं, जिससे मरीजों को बेहतर सुविधाएं समय पर मिलें। लेकिन स्वास्थ्य कार्यकर्ता और सामाजिक समूह इसे कम आय वर्ग के लिए बोझ भी बता रहे हैं। उनका तर्क है कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले अधिकतर मरीज आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं, और अब इन निर्धारित शुल्कों के कारण उन्हें इलाज कराने में कठिनाई हो सकती है। इसके अलावा, कुछ विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि ऐसे शुल्क उपचार लागत को निजी अस्पतालों जैसे स्तर पर ले जा सकते हैं, जिससे गरीब मरीजों पर भार बढ़ सकता है।

सरकार का उद्देश्य और आगे की राह

सरकार का कहना है कि इन दरों का उद्देश्य उपचार में देरी और संसाधनों का दुरुपयोग रोकना, पारदर्शिता लागू करना और सरकारी अस्पतालों के भीतर मरीजों को बेहतर अनुभव प्रदान करना है। साथ ही गरीबों और विशेष श्रेणियों के लिए कुछ सेवाएं पहले की तरह मुफ्त ही रखी जाएंगी। यह भी ध्यान देने योग्य है कि राज्य में अन्य स्वास्थ्य योजनाएं जैसे Mahatma Jyotiba Phule Jan Arogya Yojana भी सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में निष्पक्ष और किफायती इलाज सुनिश्चित करती हैं, हालांकि उनका दायरा अलग है। महाराष्ट्र में सरकारी अस्पतालों की दरों में यह बड़ा बदलाव स्वास्थ्य सेवा पहुँच, इलाज की लागत और मरीजों के अनुभव को प्रभावित कर सकता है। हालांकि सरकार ने इलाज रोकने के खिलाफ दिशा-निर्देश जारी किए हैं, गरीब और निम्न आय वर्ग तक बेहतर इलाज पहुंचाने का सबसे बड़ा प्रश्न अब भी जमीनी स्तर पर लागू होने पर ही स्पष्ट होगा।

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