महाराष्ट्र के 1.5 करोड़ सूखा प्रभावित किसानों को मिलेगी ₹5,000 की अग्रिम राहत, ₹7,500 करोड़ का भारी बजट मंजूर
महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति से जूझ रहे अन्नदाताओं के लिए राज्य सरकार ने आज एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में आयोजित राज्य कैबिनेट की बैठक में महाराष्ट्र के करीब 1.5 करोड़ किसानों के लिए 5,000 रुपये प्रति किसान की अग्रिम सूखा राहत राशि देने के प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी दे दी गई है। कैबिनेट के इस बड़े फैसले के बाद सरकार इस योजना के क्रियान्वयन के लिए कुल ₹7,500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम वित्तीय पैकेज जारी करने जा रही है। आगामी त्योहारी सीजन (दिवाली) को ध्यान में रखते हुए सरकार का प्रयास है कि यह सहायता राशि बिना किसी देरी के सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचाई जाए, ताकि उनके त्योहारों का रंग फीका न पड़े।
सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर होगी राशि, बैंक नहीं कर सकेंगे कोई कटौती
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस कल्याणकारी फैसले के तुरंत बाद प्रशासन और वित्तीय संस्थानों को सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह राहत राशि किसानों को बिना किसी परेशानी के पूरी की पूरी मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने बैंकों को विशेष रूप से निर्देश दिए हैं कि सूखा राहत के तहत जारी किए जा रहे ₹5,000 में से किसी भी पुरानी उधारी, बकाया कर्ज की किश्त या न्यूनतम बैलेंस न होने के नाम पर ₹1 की भी कटौती न की जाए। यह पूरी तरह से किसानों की अंतरिम सहायता के लिए है और इसे सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से किसानों के खातों में तत्काल प्रभाव से भेजा जाएगा।
305 तालुका सूखाग्रस्त घोषित, मराठवाड़ा और विदर्भ पर विशेष ध्यान
राज्य में मानसून की बेरुखी और बारिश की भारी कमी के कारण ग्रामीण इलाकों में हालात काफी चिंताजनक बने हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शुरुआत में राज्य के 265 तालुकों को सूखाग्रस्त माना गया था, लेकिन स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करने के बाद अब सूखाग्रस्त तालुकों की संख्या बढ़ाकर 305 कर दी गई है। यह राज्य के कुल 358 उपखंडों (तालुकाओं) का लगभग 85 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा है। यह सूखा संकट मुख्य रूप से महाराष्ट्र के छह प्रमुख राजस्व विभागों में फैला हुआ है, जिसमें मराठवाड़ा, विदर्भ और उत्तरी महाराष्ट्र के क्षेत्र सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। राज्य के इन 19 प्रमुख जिलों में फसलों का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है, जिसके कारण किसानों की आर्थिक कमर पूरी तरह टूट गई है।
97% पंचनामे पूरे, केंद्र सरकार को भेजा जाएगा विस्तृत ज्ञापन
कैबिनेट बैठक में राजस्व विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सूखा प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए कराए जा रहे 97 प्रतिशत से अधिक सर्वेक्षण (पंचनामे) का काम पूरा हो चुका है। इस सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार फसल क्षति, पेयजल संकट और पशुओं के चारे की जरूरतों का एक व्यापक विस्तृत ज्ञापन (मेमोरेंडम) तैयार कर रही है, जिसे वित्तीय सहायता के लिए जल्द ही केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा। राज्य सरकार का कहना है कि यह ₹5,000 की मदद केवल एक शुरुआती अंतरिम राहत (Advance Relief) है और भविष्य में केंद्रीय टीम के दौरे और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद प्रभावितों को और भी अधिक मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
सिर्फ नकद राहत ही नहीं, सरकार ने लिए कई और बड़े फैसले
सूखे के बहुआयामी प्रभाव को देखते हुए महाराष्ट्र कैबिनेट ने केवल आर्थिक मदद देने तक ही अपने हाथ नहीं रोके हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए कई अन्य बड़े और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले भी लिए हैं:
1. ‘मिशन मुरघास’ और चारे पर सब्सिडी: सूखे में पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों के सामने सबसे बड़ा संकट मवेशियों के चारे का खड़ा हो गया है। इसके समाधान के लिए सरकार ने ‘मिशन मुरघास’ (Mission Murghas) योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत साइलेज (पौष्टिक हरा चारा) की खरीद पर पशुपालकों को 3 रुपये प्रति किलोग्राम की सीधी सब्सिडी दी जाएगी, जिससे विदर्भ और मराठवाड़ा के दुग्ध उत्पादकों को बड़ी राहत मिलेगी।
2. छात्रों की फीस माफी: सूखा प्रभावित घोषित किए गए 305 तालुकों के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले और खेती पर निर्भर परिवारों के विद्यार्थियों की शैक्षणिक शुल्क (फीस) पूरी तरह माफ करने का निर्णय लिया गया है, ताकि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई न छूटे।
3. 3 लाख किसानों की कर्जमाफी सूची प्रमाणित: किसानों को कर्ज के जाल से मुक्त करने के उद्देश्य से सरकार ने 3 लाख से अधिक किसानों की कर्जमाफी की सूची को अंतिम रूप से प्रमाणित कर दिया है, जिससे उन्हें बैंकों से नया कृषि ऋण मिलने का रास्ता साफ होगा।
4. मातोश्री ग्रामसमृद्धि योजना को गति: ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और जल संरक्षण के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ‘मातोश्री ग्रामसमृद्धि योजना’ के बजट और क्रियान्वयन को भी कैबिनेट ने हरी झंडी दी है।
विपक्ष और किसानों का मिलाजुला रुख
हालांकि, सरकार के इस कदम की जहां एक तरफ सत्तापक्ष के नेताओं और कई किसान संगठनों ने सराहना की है, वहीं दूसरी तरफ कुछ इलाकों से इस राशि को नाकाफी बताने की खबरें भी आ रही हैं। धाराशिव (उस्मानाबाद) जिले के सूरेदी गांव के एक सोयाबीन उत्पादक किसान ने सरकार द्वारा घोषित ₹5,000 की इस अंतरिम सहायता को बेहद मामूली और ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ बताते हुए, विरोध स्वरूप मुख्यमंत्री कार्यालय को ₹5,000 का मनी ऑर्डर वापस भेजकर अपना रोष प्रकट किया था। किसान का तर्क था कि डेढ़ एकड़ में सोयाबीन की खेती करने पर ₹25,000 से अधिक की लागत आई थी, जबकि सूखे के कारण कुल उपज से मात्र ₹3,900 की कमाई हुई। विपक्षी दलों ने भी मांग की है कि प्रति हेक्टेयर के हिसाब से नुकसान का वास्तविक मुआवजा कम से कम ₹25,000 से ₹50,000 होना चाहिए। इन आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने साफ किया है कि यह राशि अंतिम मुआवजा नहीं है, बल्कि संकट की इस घड़ी में त्योहारों के समय किसानों के हाथ में तत्काल नगद पैसा पहुंचाने की एक अग्रिम कोशिश है।
प्रशासन युद्धस्तर पर सक्रिय
राहत पैकेज की घोषणा के साथ ही महाराष्ट्र का पूरा प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर आ गया है। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के लिए टैंकरों की व्यवस्था दुरुस्त रखें और चारा छावनियां खोलने की आवश्यकता पर तुरंत कदम उठाएं। सरकार का यह चौतरफा प्रयास निश्चित रूप से राज्य के डेढ़ करोड़ किसान परिवारों को इस प्राकृतिक आपदा का सामना करने का संबल प्रदान करेगा।
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