महाराष्ट्र MLC चुनाव: MVA ने रोकी महायुति की रफ्तार, शरद पवार फिर हुए साबित

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महाराष्ट्र MLC चुनाव: MVA ने दो सीटें जीतकर तोड़ा महायुति का ‘क्लीन स्वीप’ का सपना, शरद पवार का सियासी दबदबा फिर साबित

महाराष्ट्र की पांच विधान परिषद सीटों (स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र) के चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन (भाजपा, शिवसेना-शिंदे गुट, और एनसीपी-अजित पवार गुट) सभी पांचों सीटों पर जीत हासिल कर ‘क्लीन स्वीप’ करने का सपना देख रहा था, लेकिन विपक्षी महाविकास आघाड़ी (MVA) ने दो प्रमुख सीटों पर ऐतिहासिक बढ़त और जीत दर्ज कर सत्तापक्ष के इन मंसूबों पर पानी फेर दिया है। इन चुनावी नतीजों में सबसे बड़ा आकर्षण राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार का रणनीतिक कौशल रहा, जिन्होंने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि महाराष्ट्र की जमीनी राजनीति पर उनका प्रभाव आज भी अटूट है। यह चुनाव परिणाम इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि इन्हें आगामी विधानसभा चुनावों के सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा था। महायुति जहां लोकसभा चुनावों के झटकों से उबरकर राज्य में अपना एकछत्र राज स्थापित करने की कोशिश में जुटी थी, वहीं महाविकास आघाड़ी ने दो सीटों पर बाजी मारकर सत्ता विरोधी लहर और युवाओं तथा शिक्षित वर्ग के मन में चल रही हलचल को उजागर कर दिया है।

कांटे की टक्कर और सीटों का गणित

महाराष्ट्र विधान परिषद की जिन 5 सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था, उनमें पुणे स्नातक, छत्रपति संभाजीनगर स्नातक, नागपुर स्नातक, पुणे शिक्षक और अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। मतगणना की शुरुआत से ही मुकाबला बेहद दिलचस्प और उतार-चढ़ाव भरा रहा। ताजा नतीजों और रुझानों के अनुसार, पांच सीटों का मुकाबला 3-2 के समीकरण पर आकर टिका है:
1. पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार कौस्तुभ गावड़े ने इस सीट पर 20,118 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की है। उन्होंने कांग्रेस के निवर्तमान एमएलसी जयंत आसगांवकर को पराजित कर महायुति का खाता खोला।
2. नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: भाजपा के सुधाकर कोहले ने शुरुआती दौर से ही बढ़त बनाए रखी। हालांकि, कांग्रेस के निवर्तमान एमएलसी अभिजीत वंजारी और निर्दलीय प्रत्याशी नितेश कराळे ने उन्हें कड़ी टक्कर दी।
3. अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के किरण सरनाईक इस सीट पर आगे रहे, जिससे महायुति ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत की।
4. पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: यह सीट इस चुनाव का सबसे बड़ा रणक्षेत्र साबित हुई। यहां से शरद पवार गुट की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख-जाधव ने भाजपा की स्मिता जाधव को पछाड़ते हुए शानदार बढ़त हासिल की और जीत के मुहाने पर पहुंच गईं।
5. छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: मराठवाड़ा के इस महत्वपूर्ण गढ़ में शरद पवार की पार्टी (NCP-SP) के प्रतापसिंह पाटिल ने अजित पवार गुट के मौजूदा एमएलसी सतीश चव्हाण को भारी अंतर से पछाड़ते हुए शानदार प्रदर्शन किया।

महायुति के ‘क्लीन स्वीप’ के सपने को झटका

चुनावों की घोषणा के समय से ही भाजपा और महायुति के शीर्ष नेता यह दावा कर रहे थे कि वे सभी पांचों सीटों पर एकतरफा जीत हासिल करेंगे। जून में हुए विधान परिषद के पिछले चुनावों में 11 में से 9 सीटों पर मिली शानदार सफलता से उत्साहित महायुति इस बार भी अति-आत्मविश्वास में थी। लेकिन पुणे और छत्रपति संभाजीनगर जैसी प्रतिष्ठित स्नातक सीटों पर हार ने उनके रणनीतिकारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। पार्टी के भीतर छिपी आंतरिक बगावत और गुटबाजी भी महायुति की इस हार की बड़ी वजह बनी। उदाहरण के लिए, छत्रपति संभाजीनगर में शिंदे गुट के मंत्री अब्दुल सत्तार द्वारा महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार का परोक्ष रूप से समर्थन करने की खबरों ने अजित पवार गुट की राह बेहद कठिन बना दी।

शरद पवार का ‘मास्टरस्ट्रोक’ और सियासी पुनरागमन

इन चुनावों ने एक बार फिर 85 वर्षीय राजनेता शरद पवार के राजनीतिक प्रभाव और उनकी सूझबूझ को रेखांकित किया है। अजित पवार द्वारा पार्टी तोड़ने के बाद, कई विश्लेषक मान रहे थे कि शरद पवार का जादू अब कमजोर पड़ चुका है। लेकिन छत्रपति संभाजीनगर (मराठवाड़ा) और पश्चिमी महाराष्ट्र (पुणे स्नातक) में उनके उम्मीदवारों द्वारा दर्ज की गई जीत ने यह साफ कर दिया कि आज भी राज्य का शिक्षित और युवा वर्ग शरद पवार के नाम पर भरोसा करता है। विशेषकर छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट पर अजित पवार गुट के सतीश चव्हाण को हराना शरद पवार के लिए एक बड़ी व्यक्तिगत और राजनीतिक जीत है। पवार ने जिस तरह से जमीनी स्तर पर जाकर स्नातकों और युवाओं को लामबंद किया, उसी का नतीजा रहा कि प्रतापसिंह पाटिल ने अजित पवार के उम्मीदवार पर 13 हजार से अधिक वोटों की निर्णायक बढ़त बना ली।

आगामी विधानसभा चुनावों पर प्रभाव

विधान परिषद के इन नतीजों का असर सिर्फ सदन की संख्या बल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव राज्य की आगामी राजनीतिक दिशा पर पड़ेगा। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान करने वाले लोग समाज के सबसे प्रबुद्ध, शिक्षित और जागरूक वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। यदि यह वर्ग महायुति के दावों के खिलाफ जाकर महाविकास आघाड़ी और शरद पवार के उम्मीदवारों को चुन रहा है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि राज्य सरकार की कुछ नीतियों, विशेष रूप से रोजगार, बेरोजगारी और पुरानी पेंशन योजना (OPS) जैसे मुद्दों पर शिक्षित वर्ग में गहरा असंतोष है।

‘पतन की ओर महायुती’- MVA

महाविकास आघाड़ी के नेताओं ने इन नतीजों पर खुशी जताते हुए कहा है कि यह महायुति के पतन की शुरुआत है और जनता ने आगामी विधानसभा चुनाव का ट्रेलर दिखा दिया है। वहीं, महायुति के नेताओं का मानना है कि इन चुनावों के नतीजों का आम चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा और वे आगामी दिनों में अपनी कमियों को सुधारकर पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेंगे। बहरहाल, इन दो सीटों पर महाविकास आघाड़ी की जीत ने महाराष्ट्र की सियासत को बेहद रोमांचक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां शरद पवार एक बार फिर राज्य के सबसे बड़े ‘किंगमेकर’ बनकर उभरे हैं।

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