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March 14, 2026

महाराष्ट्र: धर्मांतरण के बाद बच्चों के अधिकारों पर नया कानून

The CSR Journal Magazine

धर्मांतरण नियमों में कड़ाई

महाराष्ट्र विधानसभा में हाल ही में ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’ पेश किया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य धर्मांतरण के नियमों को सख्त करना है। इसमें खास तौर पर उन मामलों का ध्यान रखा गया है जहां अवैध धर्मांतरण के बाद बच्चे का जन्म होता है। बिल में प्रावधान है कि ऐसे बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी। मसलन, वे मां के मूल धर्म और संपत्ति में हिस्सेदारी के हकदार होंगे।

बच्चों के धर्म का निर्धारण

इस विधेयक के अनुसार, अगर किसी अवैध धर्म परिवर्तन की वजह से शादी होती है और बच्चा पैदा होता है, तो उस बच्चे को मां के मूल धर्म का माना जाएगा। यह स्पष्ट है कि बच्चे को उसी धर्म में रखा जाएगा जो उसकी मां ने शादी से पहले अपनाया था। इसके साथ ही, बच्चे को माता-पिता की संपत्ति में उत्तराधिकार और भरण-पोषण का अधिकार भी मिलेगा।

60 दिन पहले सूचना देना अनिवार्य

विधेयक में धर्म परिवर्तन के लिए कई नियम भी बताए गए हैं। अगर कोई व्यक्ति धर्म बदलना चाहता है, तो उसे कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित सूचना देनी होगी। इस सूचना में व्यक्ति के नाम, उम्र, पता, वर्तमान धर्म और वो किस धर्म को अपनाना चाहता है, इसकी जानकारी आवश्यक होगी। इसके साथ ही जिला प्रशासन यह जांच भी करेगा कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से हो रहा है या किसी दबाव या धोखे के कारण।

कानूनी कार्रवाई का प्रावधान

अगर कोई व्यक्ति नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अगर धर्म परिवर्तन के लिए नियमों का पालन नहीं किया गया तो ऐसा धार्मिक परिवर्तन अवैध माना जाएगा। इस स्थिति में व्यक्ति को गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

सख्त सजाएं और दंड

नए नियमों में धर्म परिवर्तन के लिए कड़ी सजाओं का प्रावधान किया गया है। इसके तहत, अवैध धर्मांतरण के मामलों में 7 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि मामला महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति या जनजाति से जुड़ा होता है, तो जुर्माना 5 लाख रुपये तक बढ़ सकता है।

मास कन्वर्ज़न पर विशेष ध्यान

इसके अलावा, दो या उससे अधिक लोगों के एक साथ धर्म परिवर्तन को ‘मास कन्वर्ज़न’ माना जाएगा। ऐसे मामलों में सख्त सजाओं का प्रावधान है। यदि इसी तरह का अपराध दोबारा होता है, तो व्यक्ति को 10 साल तक की जेल और 7 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

शिकायत कैसे दर्ज होगी?

धर्म परिवर्तन के खिलाफ शिकायत स्वयं व्यक्ति, उसके माता-पिता, भाई-बहन या अन्य रिश्तेदार कर सकते हैं। पुलिस के लिए ऐसी शिकायत दर्ज करना अनिवार्य होगा। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि जबरन धर्म परिवर्तन के शिकार लोगों के पुनर्वास और सुरक्षा की व्यवस्था की जाएगी।

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