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January 30, 2026

अब गुटका-सिगरेट छोड़ना हुआ आसान: MP के सरकारी अस्पतालों में फ्री निकोटीन च्युइंग गम, सैकड़ों लोग छुड़ा रहे नशा

The CSR Journal Magazine
मध्य प्रदेश में तंबाकू, गुटका और सिगरेट की बढ़ती लत के खिलाफ सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। राज्य के सरकारी अस्पतालों में अब निकोटिन रिप्लेसमेंट थैरेपी (NRT) के तहत निकोटीन च्युइंग गम मुफ्त में बांटी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है, जो नशा छोड़ना तो चाहते हैं, लेकिन विथड्रावल इफेक्ट और तेज क्रेविंग के कारण सफल नहीं हो पाते।

शहडोल के तीन अस्पतालों से हुई शुरुआत

शहडोल जिले में जिला अस्पताल के साथ-साथ सिविल अस्पताल ब्यौहारी और जयसिंहनगर में यह सुविधा शुरू की गई है। यहां ओपीडी में अलग से डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की गई है। जो भी व्यक्ति गुटका, तंबाकू या सिगरेट की लत छोड़ना चाहता है, वह इन अस्पतालों में पहुंचकर न सिर्फ च्युइंग गम ले सकता है, बल्कि विशेषज्ञों से मार्गदर्शन भी पा रहा है।

च्युइंग गम के साथ मिल रही काउंसलिंग

इस योजना की खास बात यह है कि सिर्फ दवा देकर जिम्मेदारी खत्म नहीं की जा रही। मरीजों को नियमित काउंसलिंग भी दी जा रही है, ताकि मानसिक रूप से भी वे नशे से बाहर आ सकें। डॉक्टर मरीजों को समझा रहे हैं कि कब और कैसे च्युइंग गम का इस्तेमाल करना है और किन परिस्थितियों में सावधानी जरूरी है। इससे नशा छोड़ने की संभावना कई गुना बढ़ रही है।

कैसे काम करती है निकोटीन च्युइंग गम?

जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. पुनीत श्रीवास्तव के अनुसार, तंबाकू में मौजूद निकोटीन अत्यधिक एडिक्टिव होता है। एनआरटी च्युइंग गम में निकोटीन तो होता है, लेकिन तंबाकू के अन्य जहरीले तत्व जैसे टार और कार्बन मोनोक्साइड नहीं होते। यह गम शरीर को धीरे-धीरे नियंत्रित मात्रा में निकोटीन देकर विथड्रावल के लक्षणों, बेचैनी और तंबाकू की तलब को कम करती है।

200 से ज्यादा लोग ले चुके फायदा

तीनों अस्पतालों में अब तक 200 से अधिक लोग नियमित रूप से एनआरटी च्युइंग गम ले रहे हैं और करीब 3 हजार च्युइंग गम का वितरण हो चुका है। कई लोगों का कहना है कि शुरुआत में कुछ दिन अजीब जरूर लगा, लेकिन डॉक्टरों के संपर्क में रहकर गम चबाने से तंबाकू की लत धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगी। अब जब भी गुटका या सिगरेट की इच्छा होती है, वे उसके स्थान पर च्युइंग गम का इस्तेमाल कर लेते हैं।

प्रचार की कमी, फिर भी उम्मीद

हालांकि इस योजना के बारे में अभी व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं हो पाया है, जिस कारण अस्पतालों में पहुंचने वालों की संख्या सीमित है। इसके बावजूद जो लोग इस सुविधा से जुड़े हैं, वे इसे नशा मुक्ति की दिशा में एक प्रभावी कदम मान रहे हैं।

पूरे प्रदेश में लागू हो रही योजना

सीएमएचओ डॉ. राजेश मिश्रा ने बताया कि शहडोल ही नहीं, बल्कि प्रदेश के करीब आधा सैकड़ा जिला और सिविल अस्पतालों में यह सुविधा शुरू की गई है। सरकार का मानना है कि नियमित उपयोग और सही काउंसलिंग के साथ यह च्युइंग गम तंबाकू जैसी लत से छुटकारा दिलाने में कारगर साबित होगी।

नशा छोड़ने वालों के लिए नई उम्मीद

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर एनआरटी के साथ परामर्श और इच्छाशक्ति जुड़ जाए, तो नशा छोड़ना असंभव नहीं है। मुफ्त इलाज और मार्गदर्शन के साथ यह सरकारी पहल हजारों लोगों को स्वस्थ जीवन की ओर ले जा सकती है।
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