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January 21, 2026

Madhya Pradesh: हजारों पद खाली, फिर भी सिर्फ 155 भर्तियां, राज्य सेवा परीक्षा-2026 पर भड़के अभ्यर्थी, सरकार से तीखे सवाल

The CSR Journal Magazine
राज्य सेवा परीक्षा-2026 को लेकर प्रदेश के युवाओं में जबरदस्त नाराजगी देखने को मिल रही है। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) द्वारा केवल 155 पदों की घोषणा किए जाने के बाद अभ्यर्थियों ने सरकार और आयोग की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद वर्षों से खाली पड़े हैं, तो इतनी कम भर्तियां निकालना युवाओं के साथ अन्याय है।

तीन साल से दोहराई जा रही वही स्थिति

अभ्यर्थियों का आरोप है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। पिछले तीन वर्षों से राज्य सेवा परीक्षाओं में पदों की संख्या लगातार कम रखी जा रही है। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के सपनों पर असर पड़ रहा है। युवाओं का कहना है कि सीमित पदों के कारण प्रतियोगिता अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे मेहनती और योग्य उम्मीदवार भी चयन से वंचित रह जाते हैं।

155 पदों में सिमटी पूरी राज्य सेवा परीक्षा

एमपीपीएससी ने 31 दिसंबर 2025 को राज्य सेवा परीक्षा-2026 की अधिसूचना जारी की थी। इसके अंतर्गत प्रारंभिक परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया 10 जनवरी से शुरू होकर 9 फरवरी तक चलेगी। अधिसूचना के अनुसार 21 विभागों के कुल 155 पद शामिल किए गए हैं। इनमें 17 डिप्टी कलेक्टर, 18 उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी), तीन वाणिज्यकर अधिकारी, 15 पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, चार जनसंपर्क विभाग, 16 सहकारिता विभाग और 10 आबकारी विभाग के पद शामिल हैं। इतनी कम संख्या में पद घोषित होने से अभ्यर्थियों में निराशा और गुस्सा दोनों साफ नजर आ रहे हैं।

खाली पदों की अनदेखी का आरोप

अभ्यर्थियों का कहना है कि कई विभागों में वर्षों से पद रिक्त हैं, लेकिन सरकार उन्हें भरने को लेकर गंभीर नजर नहीं आती। इससे न सिर्फ युवाओं के रोजगार के अवसर घट रहे हैं, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो रही है। उनका दावा है कि अगर वास्तविक रिक्तियों के अनुसार भर्तियां निकाली जाएं, तो न केवल बेरोजगारी कम हो सकती है, बल्कि सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

प्रदर्शन की कोशिश, लेकिन अनुमति नहीं मिली

अपनी मांगों को लेकर हाल ही में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए अभ्यर्थी इंदौर के भंवरकुआं क्षेत्र स्थित एक उद्यान में एकत्र हुए थे। वे आयोग कार्यालय जाकर धरना-प्रदर्शन करना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बावजूद अभ्यर्थियों का विरोध खत्म नहीं हुआ। वे लगातार ई-मेल और ज्ञापन के माध्यम से आयोग और शासन से पदों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

बेरोजगारी पर सरकार के दावों पर सवाल

अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार मंचों से युवाओं की बेरोजगारी दूर करने की बात तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। सीमित भर्तियां निकालकर सरकार अपने ही दावों को कमजोर कर रही है। युवाओं का मानना है कि अगर समय रहते पद नहीं बढ़ाए गए, तो इसका सीधा असर आने वाले वर्षों में प्रशासन और रोजगार दोनों पर पड़ेगा।

आयोग ने शासन पर डाली जिम्मेदारी

मामले में मप्र लोक सेवा आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पदों की संख्या बढ़ाने का निर्णय शासन के स्तर पर होता है। आयोग का कहना है कि जैसे ही शासन से अतिरिक्त पदों की स्वीकृति मिलेगी, अधिसूचना में संशोधन कर दिया जाएगा। फिलहाल अभ्यर्थी सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी आवाज सुनी जाएगी।
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