क्रिकेट के सपने को छोड़कर योग के लिए निकले कृष्णा नायक ने की 20,000 किमी की पैदल यात्रा

The CSR Journal Magazine
कमर में चोट के कारण क्रिकेटर बनने का सपना टूट गया। लेकिन कृष्णा नायक ने इस चुनौती को स्वीकार किया और योग के माध्यम से अपने सपने को नया रंग दिया। 32 वर्षीय कृष्णा, जिन्होंने मैसूर से अपनी यात्रा शुरू की थी, ने अब तक 20,000 किमी की पैदल यात्रा की है। इस सफर के दौरान उन्होंने भारत के 25 राज्यों के साथ-साथ नेपाल और भूटान में भी योग का प्रचार किया है।

किडनैपिंग का डर और फिर प्यार

कृष्णा नायक की यात्रा में एक कठिन मोड़ भी आया जब उन्होंने छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के चंगुल में फंस गए। लेकिन एक बार जब उनकी सच्चाई सामने आई, तो नक्सलियों ने न केवल उन्हें छोड़ा, बल्कि प्यार से खाना भी खिलाया और पैसे भी दिए। यह घटना कृष्णा की यात्रा का एक अनोखा हिस्सा बन गई है।

योग के महत्व को समझाते हुए कृष्णा

कृष्णा ने बताया कि उनके द्वारा की गई यात्रा का मुख्य उद्देश्य युवाओं को योग के महत्व के बारे में जागरूक करना है। उन्होंने स्कूल और कॉलेजों में जाकर अरबों युवाओं को योग के लाभ बताए हैं। उनका मानना है कि योग से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य सुधारता है, बल्कि मानसिक स्थिति को भी मजबूत बनाता है।

पद यात्रा में आने वाली चुनौतियाँ

यात्रा के दौरान कृष्णा नायक ने कई समस्याओं का सामना किया, जिसमें नक्सलियों के अलावा स्थानीय लोगों से भेदभाव भी शामिल था। छत्तीसगढ़ के इंद्रावती नेशनल पार्क में उन्हें नक्सलियों ने पकड़ लिया था। वे सही तरीके से हिंदी बोल नहीं पा रहे थे, लेकिन जैसे ही उनकी यात्रा की जानकारी मिली, सब कुछ बदल गया।

कौन है कृष्णा का सपोर्ट सिस्टम?

कृष्णा का कहना है कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी जवागल श्रीनाथ ने उन्हें सबसे ज्यादा सपोर्ट किया। उन्होंने उनकी यात्रा को प्रारंभ करने के लिए हरी झंडी दिखाई और उनकी यात्रा के अधिकांश खर्चों का ध्यान रखा। इसके अलावा, उनके परिवार और दोस्तों ने भी कृष्णा का पूरी यात्रा में समर्थन किया है।

आगामी यात्रा की योजना

कृष्णा ने बताया कि उनकी यात्रा का अगला पड़ाव राजस्थान के बाद गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आखिर में चेन्नई होगा। वह अपनी यात्रा को पूरा करने के लिए अगले छह महीने तक पैदल चलते रहेंगे। उनका लक्ष्य है कि यह यात्रा लोगों को स्वस्थ रहने के प्रति जागरूक करे।

पैदल यात्रा और परिवार

कृष्णा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान किसी भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग नहीं किया है। उनका 100% ध्यान अपने लक्ष्यों पर है। परिवार से संपर्क के बावजूद, वह मानते हैं कि पूरा देश ही उनका परिवार है और वह सभी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए तत्पर हैं।

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