JNU प्रोफेसर व कांग्रेस सांसद पर यौन शोषण के संगीन आरोप, भाजपा ने पूछा–राहुल गांधी चुप क्यों?

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JNU में हड़कंप: यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में घिरे कांग्रेस सांसद व प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम, दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में उस वक्त भारी राजनीतिक और प्रशासनिक भूचाल आ गया, जब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आंतरिक जांच समिति की सिफारिश पर सख्त कदम उठाते हुए कांग्रेस सांसद और विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजाम को सेवा से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। यह बड़ी कार्रवाई कुल 11 छात्राओं द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के गंभीर आरोपों के बाद की गई है। इस प्रशासनिक कदम के ठीक दो दिन बाद, दिल्ली पुलिस ने भी इस मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में प्रोफेसर अकोइजाम के खिलाफ एक आपराधिक मुकदमा (एफआईआर) दर्ज कर लिया है, जिससे उनकी मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजाम लोकसभा में मणिपुर की इनर मणिपुर (आंतरिक मणिपुर) सीट से कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं। देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के एक मौजूदा सांसद-प्रोफेसर पर इस तरह के गंभीर आरोपों और उसके बाद की गई कड़ी कार्रवाई ने पूरे देश के शैक्षणिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।

JNU आंतरिक समिति की जांच और बर्खास्तगी का आदेश

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब JNU की कई छात्राओं ने लिखित शिकायत दर्ज कराकर आरोप लगाया कि प्रोफेसर अकोइजाम द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में लगातार अनुचित व्यवहार किया जा रहा था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और शिकायतों के मुताबिक, वाइबा (मौखिक परीक्षा) में नंबर या ग्रेड बढ़ाने के नाम पर छात्राओं को परेशान करने और उनसे अनुचित फेवर मांगने के भी इनपुट्स सामने आए थे। हालांकि, आरोपी प्रोफेसर ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है। छात्राओं की शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए, विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति (Internal Committee – IC) ने इस मामले की गहन जांच शुरू की। समिति ने शिकायतकर्ताओं, गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन किया। सूत्रों के अनुसार, आंतरिक समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में प्रोफेसर को दोषी पाते हुए विश्वविद्यालय के सेवा नियमों के तहत ‘बड़ा दंड’ (Major Punishment) देने की पुरजोर सिफारिश की थी।

JNU परिसर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन

समिति की सिफारिशों के आधार पर, जेएनयू की कुलपति संतिक्षी डी. पंडित ने 9 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक आदेश जारी किया। विश्वविद्यालय द्वारा जारी बर्खास्तगी आदेश में स्पष्ट कहा गया, “छात्राओं द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद आंतरिक समिति द्वारा उचित प्रक्रिया के तहत जांच की गई। उपलब्ध तथ्यों और समिति की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के सेवा नियमों और केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियमों के तहत प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम पर तत्काल प्रभाव से विश्वविद्यालय की सेवाओं से बर्खास्तगी का दंड लगाया जाता है।”
इस आदेश के सार्वजनिक होते ही जेएनयू परिसर में छात्रों के विभिन्न समूहों द्वारा भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। जहां एक तरफ पीड़ित छात्राओं को न्याय देने के समर्थन में नारे लगे, वहीं दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन से इस मामले में तत्काल कानूनी कदम उठाने की मांग की गई।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई: कई धाराओं में मुकदमा दर्ज

विश्वविद्यालय स्तर पर हुई बर्खास्तगी के बाद यह मामला अब पूरी तरह से कानूनी रूप ले चुका है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी (Chief Security Officer) की शिकायत के आधार पर 11 अक्टूबर 2026 को वसंत कुंज नॉर्थ थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने इस FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अत्यंत गंभीर धाराएं लगाई हैं:
1. धारा 75 और 75(1)(i): यह धारा किसी महिला की मर्जी के बिना उसके साथ अनचाहा शारीरिक संपर्क बनाने या शारीरिक रूप से आगे बढ़ने के प्रयासों (यौन उत्पीड़न) से जुड़ी है।
2. धारा 75(1)(iv): यह धारा यौन संकेत वाले शब्दों या टिप्पणियों को करने के अपराध को रेखांकित करती है।
3. धारा 79: यह धारा किसी महिला की लज्जा को भंग करने के इरादे से कहे गए शब्दों, किए गए इशारों या किसी भी तरह के कृत्य से संबंधित है।
पुलिस का कहना है कि एफआईआर में ‘लगातार और बार-बार किए जाने वाले अनुचित आचरण’ (Recurring Pattern of Inappropriate Conduct) का जिक्र किया गया है। दिल्ली पुलिस अब आंतरिक समिति की रिपोर्ट और पीड़ित छात्राओं के बयानों को जुटाकर आगे की कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

आरोपी सांसद का पलटवार: “राजनीतिक षड्यंत्र और मीडिया ट्रायल”

अपने ऊपर लगे इन तमाम संगीन आरोपों और विश्वविद्यालय से अचानक हुई इस बर्खास्तगी पर कांग्रेस सांसद डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजाम ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन की इस कार्रवाई को पूरी तरह से एक राजनीतिक द्वेष से प्रेरित ‘विपक्ष विरोधी अभियान’ (Witch-hunt) करार दिया है। सांसद ने मीडिया के सामने आकर कहा कि उन्हें बदनाम करने के लिए जानबूझकर ‘मीडिया ट्रायल’ चलाया जा रहा है ताकि उनकी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को धूल धूसरित किया जा सके। अकोइजाम ने विश्वविद्यालय की कुलपति और प्रशासन पर सीधे हमला बोलते हुए कहा, “कुलपति सरेआम झूठ बोल रही हैं कि मैंने अपनी बेगुनाही के लिए कोई गवाह पेश नहीं किए। जबकि हकीकत यह है कि मेरे गवाहों ने 14 अगस्त 2026 को ही समिति के सामने अपने बयान दर्ज करा दिए थे।”
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि उन्होंने 31 मई को ही आरोपों का लिखित जवाब दे दिया था और 16 जुलाई को खुद समिति के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखा था। विश्वविद्यालय के इस दावे पर कि उन्हें जांच के दौरान लगभग 300 ईमेल भेजे गए थे, अकोइजाम ने कहा कि उन्हें केवल 43 ईमेल मिले थे जिनका उन्होंने विधिवत जवाब भी दिया था। सांसद ने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ किसी भी शिकायत में ‘नंबरों के बदले शारीरिक संबंध’ (Sex for grades) जैसी बात नहीं थी, इसे केवल सनसनी फैलाने के लिए बाहर फैलाया जा रहा है। उनकी कानूनी टीम इस पक्षपातपूर्ण कार्रवाई को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।

राजनीतिक घमासान: भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व को घेरा

इस संवेदनशील मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मुद्दे को लपकते हुए कांग्रेस पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा देश में “पितृसत्ता को खत्म करो” और महिला अधिकारों के बड़े-बड़े खोखले नारे लगाती है, लेकिन जब उनकी ही पार्टी के एक मौजूदा सांसद पर 11 छात्राओं के यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप साबित हो जाते हैं, तो राहुल गांधी की रहस्यमयी खामोशी उनकी कथनी और करनी के अंतर को साफ उजागर कर देती है।

बांसुरी स्वराज ने उठाए सवाल

वहीं भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने भी प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी को घेरते हुए सवाल पूछा कि ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा देने वाले नेता अब अपने ही सांसद की इस घिनौनी करतूत पर चुप क्यों हैं? भाजपा की महिला विंग ने आरोपी सांसद के इस्तीफे और उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर जेएनयू परिसर और दिल्ली की सड़कों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू करने का एलान कर दिया है। फिलहाल, जेएनयू प्रशासन ने अपनी तरफ से कार्रवाई पूरी कर दी है, लेकिन अब गेंद दिल्ली पुलिस और अदालत के पाले में है। आने वाले दिनों में यह मामला देश की राजनीति और कैंपस पॉलिटिक्स दोनों को गहराई से प्रभावित करने वाला है।

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