मां वैष्णो देवी का प्रसिद्ध मंदिर जम्मू और कश्मीर के रियासी जिले में स्थित त्रिकुटा पहाड़ियों पर बसा है। यह पवित्र धाम कटरा शहर के नजदीक लगभग 5,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। श्रद्धालु आमतौर पर कटरा से लगभग 13 किलोमीटर की पदयात्रा करके मुख्य भवन तक पहुंचते हैं। इस वर्ष भक्तों की संख्या में स्पष्ट कमी दर्ज की गई है। जहां सामान्यतः कटरा में भारी भीड़ उमड़ती है, वहीं इस बार यात्रियों का आगमन लगभग 20 प्रतिशत कम रहा। यह गिरावट उन सभी स्थानीय क्षेत्रों और व्यवसायों के लिए चुनौती बनी हुई है जो मां वैष्णो देवी यात्रा पर निर्भर करते हैं और हर सीजन इसी भीड़ से अपनी आजीविका चलाते हैं।
मौसम और आर्थिक स्थिति ने डाला असर
यामी के पीछे मौसम की मार और आर्थिक मंदी को प्रमुख कारणों के रूप में देखा जा रहा है। कई बार अचानक हुई भारी बारिश ने न सिर्फ यात्रा मार्ग बल्कि यात्री योजनाओं को भी प्रभावित किया। आर्थिक सुस्ती के चलते कई परिवारों ने धार्मिक यात्राओं को फिलहाल टाल दिया है। स्थानीय व्यापारी बताते हैं कि पिछली कुछ तिमाहियों में देशभर की आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती का असर धार्मिक पर्यटन पर भी दिख रहा है।
रेल सेवाएं बाधित, यात्रा पर सीधा प्रभाव
इस वर्ष बरसात के बाद जम्मू–कश्मीर और पंजाब के कई हिस्सों में रेल पटरियों को नुकसान पहुंचा था, जिसकी मरम्मत अभी भी जारी है। इसी कारण कई ट्रेनें रद्द हैं और कुछ सीमित मार्ग पर ही चलाई जा रही हैं। कटड़ा आने वाले अधिकांश श्रद्धालुओं की पहली पसंद रेल यात्रा होती है, ऐसे में ट्रेन सेवाओं के बाधित होने से यात्री संख्या स्वाभाविक रूप से घट गई। हालांकि कुछ ट्रेने नियमित रूप से कटड़ा बेस कैंप तक पहुंच रही हैं, पर संख्या सीमित होने से कुल फुटफॉल कम ही दिख रहा है।
व्यवस्थाएं बेहतर, पर भीड़ कम
यात्रा में कमी के बावजूद, श्रद्धालुओं के लिए सभी तरह की सुविधाएं इस साल भी पूरी तरह उपलब्ध हैं। श्राइन बोर्ड और स्थानीय प्रशासन ने रहने, खाने, मेडिकल सहायता, सुरक्षा तथा ट्रैक प्रबंधन जैसी हर सुविधा को दुरुस्त रखा है। सेवाओं के देखने पर यह साफ है कि सुविधा की कोई कमी नहीं है। फिर भी यात्रियों में कमी का ट्रेंड रुक नहीं रहा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यात्रा में गिरावट सुविधा की कमी से नहीं, बल्कि बाहरी परिस्थितियों और परिवहन बाधाओं के कारण आ रही है।
कटड़ा के व्यापारी परेशान, व्यवसाय में 30–40% गिरावट
कटड़ा नगर के बाजारों में इस समय जिस रौनक की उम्मीद रहती है, वह नजर नहीं आ रही। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, इस सीजन में कई दुकानों की बिक्री 30–40% तक गिर चुकी है। प्रसाद विक्रेताओं, होटल व्यवसायियों, ढाबा मालिकों, टैक्सी चालकों, पोनी–पिट्ठू सेवाओं और टूर ऑपरेटरों पर इस गिरावट का सीधा असर पड़ा है। एक स्थानीय व्यापारी कहते हैं, “सुविधाएं तो पूरी हैं, पर यात्रियों के बिना बाजार चल नहीं सकता। इतना शांत सीजन पहले कभी नहीं देखा था।”
आशा का कुल दीपक अभी भी जल रहा
व्यापारियों और स्थानीय प्रशासन को उम्मीद है कि जैसे ही रेल सेवाएं सामान्य होंगी और मौसम स्थिर होगा, यात्री संख्या में फिर से वृद्धि देखी जा सकती है। आने वाले महीनों में छुट्टियां और त्योहारी सीजन भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। धार्मिक आस्था से जुड़ी होने के कारण यह यात्रा लंबे समय तक मंदी में नहीं रह सकती ऐसा स्थानीय लोग मानते हैं।
परिस्थिति सुधारने के लिए प्रशासन सक्रिय
श्राइन बोर्ड श्रद्धालुओं के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है। सुरक्षा व्यवस्था, सफाई अभियान, आपातकालीन सुविधाएं, हेलीकॉप्टर सेवा और बैटरी कार सेवा सब कुछ पहले की तरह सुचारु है। कम भीड़ के बावजूद व्यवस्थाओं में कोई ढील नहीं दी गई है, ताकि किसी भी समय पहुंचने वाला हर श्रद्धालु सहजता से यात्रा कर सके।
जल्द लौट सकती है रौनक
पर्यटन विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि परिस्थितियां सामान्य रहीं और रेल नेटवर्क पूरी तरह संचालित हो गया, तो अगले दो–तीन महीनों में यात्रा में फिर तेजी आ सकती है।स्थानीय लोगों का मानना है कि मां वैष्णो देवी की कृपा से पवित्र यात्रा जल्द ही फिर से अपने पुराने उत्साह और भीड़भाड़ वाले रूप में लौट आएगी।
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