जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित विल्सन क्रायो गैसेज ऑक्सीजन प्लांट में हुए भीषण धमाके ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। 31 जनवरी की शाम सिलेंडर भरते समय हुए इस विस्फोट में फैक्ट्री मैनेजर सहित तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। धमाका इतना जबरदस्त था कि 2 किलोमीटर तक का इलाका दहल उठा, मकानों की खिड़कियां टूट गईं और लोग इसे भूकंप जैसा महसूस करने लगे।
सिलेंडर भरते वक्त हुआ जोरदार धमाका
31 जनवरी की शाम करीब 7:45 बजे जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र के रोड नंबर 17 स्थित करणी विहार कॉलोनी में ऑक्सीजन सिलेंडर भरने का काम चल रहा था। फैक्ट्री में 100 से ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर रखे हुए थे। इसी दौरान अचानक एक सिलेंडर फट गया, जिसके बाद तीन से चार अन्य सिलेंडरों में भी विस्फोट हो गया। धमाके की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि फैक्ट्री का टिन शेड उड़ गया और एक दीवार पूरी तरह ढह गई। आसपास के घरों और दुकानों में रखे शीशे टूट गए और दीवारों में दरारें आ गईं।
मजदूर के शरीर के उड़ गए चीथड़े
हादसे में फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूर मुन्ना राय उर्फ विकास राय (30), निवासी धनबाद, झारखंड, की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। धमाके के बाद उसका सिर और धड़ अलग-अलग जगह मिले, जबकि शरीर के कई टुकड़े फैक्ट्री परिसर और मलबे में बिखर गए। राहत और बचाव कार्य में जुटे लोगों और पुलिस को देर तक शव के अंग इकट्ठा करने पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक शव ऐसा था, जिसका सिर तो मिल गया लेकिन धड़ मलबे के नीचे दबा मिला।

मैनेजर सहित तीन की इलाज के दौरान मौत
हादसे में फैक्ट्री मैनेजर विनोद गुप्ता (45), निवासी मुरलीपुरा, जयपुर, गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनका एक पैर और हाथ का पंजा धमाके में कटकर दूर जा गिरा। उन्हें पहले मणिपाल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां शनिवार रात करीब साढ़े दस बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं, गंभीर रूप से घायल शिबू उर्फ अनुवा नागटीटी (40), निवासी बोकारो, झारखंड, को SMS हॉस्पिटल रेफर किया गया था, जहां देर रात करीब डेढ़ बजे उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इस तरह हादसे में कुल तीन लोगों की मौत हो चुकी है।
जांच शुरू, CCTV फुटेज आया सामने
धमाके के बाद पुलिस, दमकल और आपदा राहत टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। फैक्ट्री और आसपास के इलाके को सील कर दिया गया। ब्लास्ट का CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें धमाके से पहले कॉलोनी में सामान्य गतिविधियां और बाद में मची अफरा-तफरी साफ दिखाई दे रही है। पुलिस ने बताया कि विस्फोट के कारणों की पुष्टि एफएसएल जांच के बाद ही होगी। फैक्ट्री के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और फैक्ट्री मालिक की तलाश जारी है। धमाके में बिखरे मानव अंगों की पहचान DNA जांच से की जाएगी।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
स्थानीय निवासियों ने फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि हादसे के बाद कुछ अहम कागजात जलाने की कोशिश की गई। लोगों ने फैक्ट्री को बंद करने की मांग की है। मृतक मैनेजर विनोद गुप्ता के घर में मातम पसरा हुआ है। पत्नी और 13 वर्षीय बेटी का रो-रोकर बुरा हाल है। यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी की ओर इशारा करता है।


