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February 28, 2026

जयपुर में टीचर ने अपने घर को बनाया साइंस म्यूजियम: 35-40 लाख खर्च कर 22 देशों से मंगवाए 500 उपकरण

The CSR Journal Magazine

एक अनोखी पहल, खेल-खेल में फिजिक्स सिखाते हैं

जयपुर के जीएस मेनारिया ने स्कूली स्टूडेंट्स में फिजिक्स के प्रति रुचि जगाने के लिए अपने तीन मंजिला घर को साइंस म्यूजियम में बदल दिया है। यहां बच्चे मस्ती करते हुए विज्ञान सीखते हैं। मेनारिया के पास 20 साल में 22 देशों से इकट्ठा किए गए दुर्लभ भौतिकी मॉडल और उपकरण हैं। उनका कहना है कि उनके पास 150 से ज्यादा इंटरएक्टिव ‘खिलौने’ हैं, जो देश के किसी भी शैक्षणिक संस्थान में नहीं मिलते। मेनारिया का उद्देश्य बच्चों को जटिल सिद्धांतों को बिना डर और रट्टा के समझाना है।

पिता की विरासत, शिक्षा का जुनून

चितौड़गढ़ के बड़ीसादड़ी के निवासी जीएस मेनारिया के पिता भगवान लाल गांव के स्कूल में फिजिक्स लैब सहायक थे, और उन्होंने 40 साल तक सेवा की। मेनारिया कहते हैं कि जिस विषय ने उनके परिवार का जीवन यापन किया, उस विषय को उन्होंने पूजा की। 1996 में पिता के रिटायरमेंट के बाद, मेनारिया ने स्कूल को 10,000 रुपए का ड्राफ्ट दिया ताकि फिजिक्स टॉपर को स्कॉलरशिप मिल सके। आज यह राशि 5 लाख रुपए तक पहुंच चुकी है। हर साल तीन छात्रों को इस छात्रवृत्ति का लाभ मिलता है।

शिक्षा में क्रांति का आगाज

मेनारिया ने सुखाड़िया यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने जयपुर में बच्चों को फिजिक्स पढ़ाना शुरू किया। उनकी शिक्षा देने की विधि में बदलाव की ख्वाहिश ने उन्हें प्रेरित किया। 1988 में, उन्होंने ऑल इंडिया फिजिक्स टीचर्स एसोसिएशन की परीक्षा में ‘फिजिक्स को लोकप्रिय कैसे बनाया जाए’ विषय पर अपना पेपर प्रस्तुत किया, जो राजस्थान में पहले स्थान पर रहा। आज मेनारिया इस परीक्षा के स्टेट को-ऑर्डिनेटर हैं।

अनूठा आइडिया और इंकलाब

2005 में आयोजित इंटरनेशनल ईयर ऑफ फिजिक्स के तहत, मेनारिया ने मैसूर में एक सम्मेलन में ‘कोऑपरेटिव लर्निंग के जरिए फिजिक्स पढ़ाने की डायनामिक्स’ पर रिसर्च पेपर प्रस्तुत किया। इस पेपर ने न केवल सराहना हासिल की, बल्कि यह दुनिया भर से आए चुनिंदा रिसर्च पेपर में भी शामिल हो गया। इस दौरान उन्होंने देखा कि कैसे खिलौनों और मॉडल्स के माध्यम से फिजिक्स को सरलता से समझाया जा सकता है।

अनलिमिटेड रिसोर्स और उपकरण

जीएस मेनारिया के पास 500 से ज्यादा उपकरण हैं, जिसमें से 300 से अधिक उनके प्रतापनगर स्थित घर में प्रदर्शित हैं। मेनारिया का दावा है कि इनमें 150 से ज्यादा ऐसे इंटरएक्टिव मॉडल हैं, जो देश के किसी शैक्षणिक संस्थान में नहीं पाए जाते। इन उपकरणों के लिए उन्होंने 35-40 लाख रुपए खर्च किए हैं।

नया म्यूजियम, नई संभावनाएं

नए भवन के ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर पर पिछले दो दशकों की मेहनत, शोध और प्रयोगों का अनमोल संग्रह सुसज्जित किया गया है, जहां भौतिकी से जुड़े दुर्लभ उपकरण, मॉडल और प्रयोगात्मक संरचनाएं प्रदर्शित की गई हैं। वहीं, तीसरे फ्लोर को पूरी तरह एक वर्कशॉप के रूप में विकसित किया गया है, जहां नए प्रयोग, मॉडल निर्माण और वैज्ञानिक नवाचार पर काम किया जाता है।
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