ईरान में फांसी का खौफनाक रिकॉर्ड: 2025 में 1,639 लोगों को मिली सजा-ए-मौत

The CSR Journal Magazine

ईरान में साल 2025 में फांसी की सजा के आंकड़ों ने दुनिया को झकझोरा

हालिया मानवाधिकार रिपोर्टों के अनुसार, ईरान में साल 2025 में फांसी की सजा के आंकड़ों ने दुनिया को झकझोर कर रख दिया। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में फांसी की सजा के आंकड़े चिंताजनक हैं। 2025 में 1,639 लोगों को फांसी दी गई, जो ईरान के इतिहास में सबसे ज्यादा है। पिछले साल 2024 में यह संख्या 975 थी, जो कि इस साल के आंकड़ों की तुलना में 68% अधिक है। ऐसा प्रतीत होता है कि देश में फांसी की सजा में पिछले 36 साल का रिकॉर्ड टूट गया है।

हर दिन 4 से अधिक को मिली फांसी की सजा

नार्वे स्थित ‘ईरान ह्यूमन राइट्स’ (IHR) और पेरिस के ‘टुगेदर अगेंस्ट द डेथ पेनल्टी’ (ECPM) के अनुसार, 2025 में ईरान ने कम से कम 1,639 लोगों को फांसी देकर 36 साल का रिकॉर्ड तोड़ा। यह 1989 के बाद से ईरान में दर्ज की गई फांसी की सबसे बड़ी संख्या है। 2025 के दौरान ईरान में औसतन हर दिन 4 से अधिक लोगों को फांसी दी गई। अकेले दिसंबर 2025 में 376 लोगों को फांसी दी गई, जिसका मतलब है कि साल के अंत में रोजाना लगभग 12 लोगों को मौत की सजा दी जा रही थी। फांसी पाने वालों में कम से कम 48 महिलाएं शामिल थीं, जो पिछले 20 वर्षों में महिलाओं के लिए सबसे अधिक संख्या है। इनमें से लगभग आधी फांसी (796 मामले) नशीली दवाओं (drugs) से संबंधित अपराधों के लिए दी गई।

अल्पसंख्यक समूहों पर प्रभाव

 रिपोर्टों के अनुसार, ईरान में जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि अल्पसंख्यक (जैसे कुर्द और बलूच) ईरान की कुल जनसंख्या का एक छोटा हिस्सा हैं, लेकिन फांसी पाने वालों में उनकी संख्या बहुत अधिक है। बलूच समुदाय, जो ईरान की आबादी का केवल 2-6% है, 2025 के कुछ महीनों (जैसे अप्रैल) में हुई कुल फांसियों में से लगभग एक-तिहाई का हिस्सा था। कुर्द समुदाय पर अक्सर “ईश्वर के खिलाफ युद्ध” (Moharebeh) या जासूसी जैसे आरोप लगाकर उन्हें फांसी दी जा रही है। 2025 में दर्ज की गई कुल फांसियों में कुर्द कैदियों की हिस्सेदारी लगभग 14% रही है। मानवाधिकार निरीक्षकों का कहना है कि नशीली दवाओं से जुड़े आरोपों का इस्तेमाल अक्सर इन क्षेत्रों में राजनीतिक स्वतंत्रता आंदोलनों को दबाने के लिए किया जाता है।

महिलाओं पर प्रभाव

2025 में कम से कम 48 महिलाओं को फांसी दी गई। इनमें से कई महिलाएं वे थीं जिन्होंने घरेलू हिंसा या बाल विवाह से तंग आकर अपने पति की हत्या की थी, क्योंकि ईरान में महिलाओं के लिए ऐसे मामलों में कानूनी सुरक्षा की कमी है।

बहुत दिनों से चल रहा सिलसिला

ईरान में प्रति दिन लगभग 4 से 5 लोगों को फांसी के फंदे पर लटकाने का मामला एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। यह आंकड़े न केवल मानवाधिकार संगठन के लिए, बल्कि विश्व समुदाय के लिए भी एक बड़ा अलार्म हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या ईरानी न्याय प्रणाली इस तरह के कठोर दंडों के जरिए सही दिशा में बढ़ रही है? या यह एक ऐसे तंत्र का प्रतीक है जिसमें सत्ता का दुरुपयोग छुपा है?

ईरान की जेलों में कैदियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन

ईरान की जेलों में इन सजाओं के खिलाफ कैदियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने एक ऐतिहासिक और साहसी मोर्चा खोल रखा है। अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, जेलों के अंदर विरोध की स्थिति कुछ इस प्रकार है।

 “फांसी के खिलाफ मंगलवार” (No to Execution Tuesdays) अभियान

कैदियों ने फांसी की सजा के विरोध में एक अनूठा अभियान शुरू किया है, जो अब देशव्यापी आंदोलन बन चुका है। अप्रैल 2026 तक, ईरान की 56 अलग-अलग जेलों में कैदी हर मंगलवार को सामूहिक भूख हड़ताल पर रहते हैं। यह अभियान लगातार 115 से अधिक हफ्तों से चल रहा है, जिसमें राजनीतिक कैदियों के साथ-साथ सामान्य अपराधों (जैसे नशीली दवाओं) के लिए सजा काट रहे कैदी भी शामिल हो रहे हैं। यह आंदोलन तेहरान की कुख्यात इविन जेल और करज की गेज़ेल हेसार जेल से शुरू हुआ था, जो अब देश के लगभग हर बड़े प्रांत की जेलों तक फैल गया है।

जेलों के अंदर धरना और विरोध

 अक्टूबर 2025 में, गेज़ेल हेसार जेल के कैदियों ने फांसी के लिए ले जाए जा रहे 16 साथियों को बचाने के लिए जेल के अंदर ही धरना (sit-in) दिया था। कैदी अक्सर अपनी सेल से “फांसी बंद करो” और “तानाशाही मुर्दाबाद” के नारे लगाकर फांसी की सजा का विरोध करते हैं।

महिला कैदियों का साहस

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी जैसी कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में इविन जेल की महिला कैदी इन सजाओं के खिलाफ सबसे मुखर रही हैं। उन्होंने भूख हड़ताल के साथ-साथ जेल परिसर के भीतर ही प्रदर्शन किए हैं।

 2026 के नए प्रदर्शन और दमन

दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए नए आर्थिक और राजनीतिक विरोधों के बाद हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जेलों के भीतर इन नए बंदियों को भी तत्काल फांसी का खतरा है, जिसके खिलाफ कैदी संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है। जेल प्रशासन इन विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए कैदियों को एकांत कारावास में भेजने और उनके परिवारों से मिलने पर रोक लगाने जैसी कड़ी सजाएं दे रहा है। मानवाधिकार संगठन Iran Human Rights (IHR) के अनुसार, 2026 के पहले तीन महीनों में ही 657 लोगों को फांसी दी जा चुकी है, जो पिछले साल के रिकॉर्ड को भी पार कर सकती है।

सामाजिक बहस का विषय

ईरान में फांसी की सजा को लेकर कई तरह की बातें सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का यह मानना है कि यह दंड अपराधों को रोकने का एक तरीका है, जबकि दूसरी ओर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसा करना मानवता के खिलाफ है। इनके बीच एक टकराव है, जो कि सामाजिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन गया है।

अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण

विश्व स्तर पर, इस तरह की बढ़ती हुई फांसी की सजा को लेकर कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चिंता जताई है। दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने ईरान के इस कदम की कड़ी निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने इसे “राज्य द्वारा डराने-धमकाने का उपकरण” करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने ईरान से फांसी की सजा पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। यूरोपीय संघ ने ईरान की न्यायपालिका द्वारा फांसी का उपयोग असंतोष को दबाने के लिए करने की आलोचना की है। प्रत्युत्तर में, EU ने मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ईरानी अधिकारियों और संस्थानों पर संपत्ति फ्रीज करने और यात्रा प्रतिबंध जैसे कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ ने इन आंकड़ों को “भयानक” बताया है और चेतावनी दी है कि ईरान बिना निष्पक्ष सुनवाई के लोगों को फांसी दे रहा है। इसमें कहा गया है कि ईरान को मानवाधिकारों का सम्मान करना चाहिए और कठोर सजाओं को समाप्त करना चाहिए। ऐसे में ईरान का यह रवैया न केवल उसके नागरिकों के लिए, बल्कि वैश्विक समुदाय के लिए भी समस्या पैदा कर सकता है।

भविष्य में क्या होगा?

आने वाले दिनों में देखना यह है कि क्या ईरान अपनी न्याय प्रणाली में सुधार करेगा या फिर यह खतरनाक प्रवृत्ति और आगे बढ़ेगी। इस संदर्भ में स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तर पर आवाजें उठ रही हैं। लेकिन सवाल यही है कि क्या ईरान इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाएगा?

न्याय का आलोक कौन लाएगा?

अब इस पूरे घटनाक्रम में जरूरत है एक व्यापक समझदारी की। क्या ईरान की सरकार अपने नागरिकों की भलाई को ध्यान में रखकर कुछ कदम उठाएगी? या फांसी की सजा का यह खौफनाक रिकॉर्ड इसी तरह बढ़ता रहेगा? ऐसे कई सवाल हैं जिनका उत्तर समय ही देगा।

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