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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस – बेटियों के लिए सरकारी योजनाएं

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बेटियों को सशक्त बनाने के लिए सरकारी योजनाएं
 

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस – बेटियों के लिए सरकारी योजनाएं

बेटियां इस धरती की वो नेमत है जिनके होने से बरकत होती है, बेटियों के होने से घर में रौनक रहती है, घर में खुशियों की खिलखिलाहट होती है, बेटियां वो दौलत है जिनके पैदा होने से एक ग़रीब बाप भी गर्व से कहता है कि मुबारक हो लक्ष्मी आयी है। जहां ऐसी सोच रखने वाले समाज में बहुत कम है वहीं हमारे आसपास ऐसे भी लोग मिल जायेंगे जिन्हें बिटिया बोझ लगती हैं। प्राचीन काल में महिलाओं का बहुत सम्मान किया जाता था। लेकिन समय बीतता गया इनकी स्थिति में काफी बदलाव आया। बेटियों के प्रति लोगों की सोच बदलने लगी। बाल विवाह प्रथा, सती, दहेज़ प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या जैसे रुढ़िवादी प्रथायें देश में इतनी हावी हो गयी कि लड़कियों को शिक्षा, पोषण, कानूनी अधिकार और स्वस्थ्य जैसे अधिकारों से वंचित रखा जाने लगा। और शायद यही कारण है कि इन कुप्रथाओं को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर हमारी बेटियों के हक़ की लड़ाई लड़ी गयी, उनमें से एक है अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस।

बेटियों के लिए क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस (International Day of the Girl Child 2020)

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 2012 से मनाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और उन्हें उनके अधिकार प्रदान करने में मदद करना, ताकि दुनिया भर में उनके सामने आने वाली चुनौतियों का वे सामना कर सकें और अपनी जरूरतों को पूरा कर सकें। साथ ही दुनिया भर में लड़कियों के प्रति होने वाली लैंगिक असमानताओं को खत्म करने के बारे में जागरूकता फैलाना भी है।

बेटियों के लिए इतिहास में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बालिका दिवस मनाने की पहल एक एनजीओ ‘प्लान इंटरनेशनल’ प्रोजेक्ट के रूप में की गई। इस संगठन ने “क्योंकि में एक लड़की हूं” नाम से एक अभियान भी शुरू किया। इस अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने के लिए कनाडा सरकार ने यूनाइटेड नेशंस (United Nations) के 55वें आम सभा में इस प्रस्ताव को रखा। संयुक्त राष्ट्र ने 19 दिसंबर, 2011 को इस प्रस्ताव को पारित किया और इसके लिए 11 अक्टूबर का दिन चुना। इस प्रकार पहला अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 11 अक्टूबर, 2012 को मनाया गया।

बेटियों को सशक्त बनाने के लिए सरकारी योजनाएं

भारत सरकार ने भी बेटियों को सशक्त बनाने के लिए काफी योजनाओं को लागू किया है जिसके तहत “बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओं” एक उल्लेखनीय योजना है। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार भी कई अन्य महत्वपूर्ण योजनायें शुरू कर रही है। बेटियों के जन्‍म को बढ़ावा देने के लिए, उन्‍हें साक्षर और जागरुक बनाने के लिए देश की सरकारें कोई न कोई नई योजनाएं लेकर आते दिखाई दे रही है। इन योजनाओं का सीधा असर हम और आप पर पड़ता है। अपने बच्चों का उज्जवल भविष्य हर मां-बाप का सपना होता है। इस सपने को साकार करने में पैसों की बड़ी अहमियत होती है। खासकर बेटियों की शादी के लिए रुपये जमा करने की चिंता पेरेंट्स को लगी ही रहती है। ऐसे में तमाम सरकारी योजनाएं बेटी के भविष्य के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है। इस योजना में किया गया छोटा-छोटा निवेश आपकी बेटी के व्यस्क होने तक करोड़पति बना सकता है। तो अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस (International Day of the Girl Child 2020) के ख़ास मौके पर जानतें है कि कौन कौन सी है सरकारी योजनाएं जिससे हमारी बिटिया का भविष्य निखर जायेगा।
बेटियों को सशक्त बनाने के लिए सरकारी योजनाएं

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना

बेटी बचाओ बेटी पढाओ बेटियों के लिए केंद्र सरकार की एक योजना है जो पूरे देश में लागू है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य लिंग–पक्षपातपूर्ण गर्भपात जैसी सामाजिक बीमारियों से बेटियों को बचाना है और पूरे देश में बालिकाओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाना है। बालिकाओं के अस्तित्व, संरक्षण और शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 22 जनवरी, 2015 को पानीपत, हरियाणा में इस कार्यक्रम की शुरूआत की गई थी| इस योजना को शुरू में उन जिलों में लागू किया गया था, जिनमें पुरुष बच्चों की तुलना में कम लिंगानुपात यानी कम महिला बच्चों को मान्यता दी गई थी, लेकिन बाद में इसका विस्तार देश के अन्य हिस्सों में भी किया गया। यह मुख्य रूप से सामाजिक दृष्टिकोण को बदलने में मदद करने के लिए एक शिक्षा–आधारित योजना है और इसमें डायरेक्ट कैश ट्रांसफर शामिल नहीं है।

बेटियों के लिए सुकन्या समृद्धि योजना

सुकन्या समृद्धि योजना केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाने वाली विशेष बचत योजना है, जिसमें बेटियों को प्राथमिक खाताधारक के रूप में रखा जाता है, जबकि माता–पिता / कानूनी अभिभावक खाते के ज्वाइंट होल्डर होते हैं। यह खाता बालिका के 10 वर्ष के होने से पहले खोला जा सकता है और खाता खोलने के बाद इसमें 15 वर्षों तक योगदान करने की आवश्यकता होती है।
सुकन्या समृद्धि योजना की कुछ विशेषताएं –
प्रारंभिक जमा के आसान विकल्प (1000 रुपये से लेकर 1.5 लाख रू. तक)
रिटर्न की तय दर वित्तीय वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही के अनुसार वर्तमान में 8.5% है
इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 80 C के तहत टैक्स लाभ
पूरी तरह से टैक्स फ्री निवेश है, मैच्योरिटी राशि और ब्याज सभी पर टैक्स छूट हैं, बेटियों की उच्च शिक्षा के लिए कुछ पैसा निकाल सकते हैं
किसी भी सरकारी बैंक, इंडिया पोस्ट ऑफिस और चुनिंदा प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में पूरे भारत में लाभ उठाया जा सकता है
खाता खोलने के बाद 15 वर्षों के लिए निवेश के रूप में लॉन्ग-टर्म में निवेश

बालिका समृद्धि योजना

बालिका समृद्धि योजना एक छात्रवृत्ति योजना है जो गरीबी रेखा से नीचे वाली बेटियों और उनकी माताओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए बनाई गई है। योजना का मुख्य उद्देश्य समाज में उनकी स्थिति में सुधार करना, लड़कियों की विवाह योग्य आयु को बढ़ाना और नामांकन में सुधार के साथ–साथ स्कूलों में लड़कियों की संख्या को बढ़ाना है। यह बालिका लाभ योजना शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में उपलब्ध है। नवजात शिशु के जन्म के बाद बेटियों की मां को 500 रू. प्रदान किए जाते हैं। स्कूल जाते समय, एक बालिका को 300 रुपये से 1000 रू. तक की वार्षिक छात्रवृत्ति मिल सकती है। बालिका की 18 वर्ष की आयु के बाद शेष राशि में से पैसा निकाल सकते हैं

देश की बेटियों के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना चलायी गयी है। इस योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना होता है ताकि वह खुद के साथ-साथ अपने नवजात की भी देखभाल कर सकें। इस योजना को 2013 के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत चलाया जाता है। इस योजना के तहत गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिला व माताओं को ₹6000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का उददेश्य है गर्भावस्था, प्रसव और स्तनपान के दौरान महिलाओं को जागरूक करना और जच्चा-बच्चा देखभाल और संस्थागत सेवा के उपयोग को बढ़ावा देना। महिलाओं को पहले छह महीनों के लिए प्रारंभिक और विशेष स्तनपान और पोषण प्रथाओं का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करना। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए नकद प्रोत्साहन प्रदान करना।
किसे मिलेगा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ
सभी गर्भवती महिलाएं एवं स्तनपान कराने वाली माताएं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ लेने के लिए पात्र मानी गई हैं। योजना का लाभ पाने के लिए जरूरी है कि महिला की उम्र 19 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। हां, एक बात ध्यान करने वाली यह है कि सरकारी कर्मचारी, किसी अन्य कानून से लाभ पा रही प्राइवेट कर्मचारी या फिर पहले सभी किस्तें पा चुकी महिला को इसके लाभ से वंचित रहना होगा।
तीन किस्तों में मिलती है मदद राशि
पहली किस्त- यह किस्त ₹1000 की होती है जो कि गर्भावस्था के दौरान पंजीकरण के समय प्रदान की जाती है।
दूसरी किस्त- इस किस्त को गर्भावस्था के 6 महीने बाद और प्रसव के पहले दिया जाता है। दूसरी किस्त में लाभार्थी को ₹2000 मिलते हैं।
तीसरी किस्त- तीसरी किस्त बच्चे के जन्म और उसके पंजीकरण तथा तमाम टीकाकरण के प्रथम चक्र पूरा होने पर मिलती है। इसके तहत लाभार्थी को ₹2000 दिए जाते हैं।
हां, ₹1000 का अतिरिक्त लाभ जननी सुरक्षा योजना के तहत महिला को प्रसव के ही दौरान दे दिया जाता है।
कैसे करें आवेदन
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का संचालन किया जाता है। महिलाएं वहां जा कर इस योजना के लिए पंजीकरण करा सकती हैं। स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों पर भी इस योजना के लिए पंजीकरण कराया जा सकता है। इसमें आशा कार्यकर्ता मदद करती हैं।

सीबीएसई उड़ान स्कीम

लड़कियों के लिए सीबीएसई (CBSE) उड़ान योजना केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा चलाई जाती है। इस योजना का फोकस पूरे भारत में प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग और तकनीकी कॉलेजों में लड़कियों के एडमिशन को बढ़ाना है। इस योजना में वे प्रयास शामिल हैं जो समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों की छात्राओं के विशेष ध्यान के साथ सीखने के अनुभव को बढ़ाने के लिए किए जाते हैं।
सीबीएसई (CBSE) उड़ान योजना की प्रमुख विशेषताएं –
11 वीं और 12 वीं कक्षा में छात्राओं के लिए मुफ्त पढ़ाई के सामान साथ ही छात्राओं के लिए वीकेंड पर ऑनलाइन क्लास
भारत में रहने वाली भारतीय छात्राएँ
CBSE से जुड़े स्कूलों में कक्षा 11 वीं और 12 वीं में पढ़ने वाली छात्राओं को भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान या गणित स्ट्रीम में दाखिला लेना चाहिए
छात्रा की वार्षिक पारिवारिक आय 6 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए
विशिष्ट नियमों के तहत मेरिट–आधारित चयन

माध्यमिक शिक्षा के लिए लड़कियों के लिए प्रोत्साहन की राष्ट्रीय योजना

माध्यमिक शिक्षा योजना के लिए लड़कियों के लिए प्रोत्साहन की राष्ट्रीय योजना भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा संचालित अखिल भारतीय योजना है। यह मुख्य रूप से भारत के पिछड़े वर्गों की लड़कियों को लाभ देने के लिए है। सभी SC / ST लड़कियां जिन्होंने कक्षा 8 की परीक्षा पास की है। अन्य सामाजिक वर्गों की छात्राएं भी योग्य हैं यदि उन्होंने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से कक्षा 8 की परीक्षा पास की है। योजना के लिए योग्य लड़कियों की आयु 16 वर्ष से कम होनी चाहिए, जिन छात्राओं की शादी हो चुकी है या वे विभिन्न केंद्रीय सरकारी योजनाओं जैसे CBS, NVS और KVS से लाभ ले रहे हैं, वे इस योजना के लिए योग्य नहीं हैं। एक बार एक योग्य छात्रा का चयन हो जाने के बाद उसकी ओर से सावधि जमा के रूप में 3000 रु. जमा किया जाता है। जब छात्रा 10 वीं कक्षा की परीक्षा पास करती है और 18 वर्ष की आयु पूरी करती है तो यह राशि ब्याज के साथ वापस ली जा सकती है।

राज्य सरकार की बालिका योजनाएं

केंद्र सरकार की योजनाओं के अलावा, भारत के हर राज्य में बालिका कल्याण की अपनी-अपनी योजनाएं भी हैं। भारत में सबसे प्रसिद्ध राज्य–वार बालिका योजनाओं में से कुछ प्रमख योजनाएं निम्नलिखित हैं –

हरियाणा की लाडली योजना

लाडली योजना हरियाणा सरकार द्वारा समाज में बालिकाओं की स्थिति को बढ़ाने के लिए चलाई जाती है। यह योजना अतिरिक्त रूप से यह सुनिश्चित करने पर ज़्यादा ध्यान देते हैं कि समाज की मानसिकता और बालिकाओं के प्रति रवैया इस तरह बदला जाए कि कन्या भ्रूण हत्या सहित सामाजिक कुरीतियों को समाप्त किया जा सके। यह योजना हरियाणा राज्य सरकार द्वारा 20 अगस्त 2015 शुरू की गई थी।
लाडली योजना कैसे काम करती है?
यह एक नकद प्रोत्साहन यानि आर्थिक मदद की योजना है जो किसी भी परिवार में 20 अगस्त 2015 के बाद दूसरी बेटी के जन्म पर 5000 रू. की आर्थिक मदद प्रदान करती है। यह पैसा बालिका व उसके साता व पिता के नाम पर एक किसान विकास पत्र में निवेश किया जाता है। और यह निवेश बालिका के 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद ब्याज सहित परिवार को दे दी जाती है। हरियाणा की लाडली योजना के लिए आवेदन करने के लिए नज़दीकी आगनवाड़ी केंद्रों में जा कर लाभ उठाया जा सकता है। फॉर्म को पहली व दूसरी बालिका दोनों के जन्म प्रमाण पत्र के साथ स्थानीय क्षेत्र के आगनवाड़ी कार्यकर्ता या स्वास्थ्य कर्मचारी के साथ भरना होगा और जमा करना होगा । आप लाडली योजना आवेदन फॉर्म को आधिकारिक सरकारी वेबसाइट से भी डाउनलोड कर सकते हैं।

मध्य प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना

मध्य प्रदेश लाड़ली लक्ष्मी योजना महाराष्ट्र–प्रायोजित बालिका योजना है जो राज्य में बालिकाओं और महिलाओं की स्थिति में सुधार करना चाहती है। यह योजना वर्ष 2006 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य बाल विवाह और कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों को रोकना था। लाभार्थी के अप्रूवल के बाद लाभार्थी के नाम पर पहले 5 वर्षों के लिए हर साल 6000 रू. के राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC) खरीदे जाएंगे। इस निवेश में से 2000 रू. का निवेश 6 वीं कक्षा में लड़की के प्रवेश के बाद किया जाएगा और बाद में 9 वीं कक्षा में लड़की के प्रवेश पर 4000 का निवेश किया जाएगा ।
लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए योग्यता शर्तें
परिवार मध्य प्रदेश का निवासी होना चाहिए और टैक्स योग्य आय नहीं होनी चाहिए
एक दूसरे बच्चे के जन्म के बाद, उस परिवार को परिवार नियोजन अपनाना होगा और पहली बालिकाओं का जन्म 1 अप्रैल 2008 के बाद हुआ हो
लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए आवेदन कैसे करें
लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए साइन अप करने का फॉर्म उनके गांव / इलाके के स्थानीय आंगनवाड़ी केंद्र से प्राप्त किया जा सकता है जिसमें उनका घर स्थित है। फॉर्म को आवश्यक दस्तावेजों की कॉपी के साथ लड़की के जन्म के 1 वर्ष के भीतर उनके गांव / इलाके के आंगनवाड़ी केंद्र में जमा करना होगा।

राजस्थान की मुख्‍यमंत्री शुभलक्ष्‍मी योजना

मुख्‍यमंत्री शुभलक्ष्‍मी यह राजस्‍थान में बेटी जन्‍म को प्रोत्‍साहित करने एवं मातृ मृतु दर को कम करने के उद्देश्‍य से लागू की गई थी। इस योजना के अंतर्गत शासकीय चिकित्‍सालयों में बालिका के जन्‍म होने पर प्रसूता को 2100 रुपए का चेक दिया जाता है और बेटी के जन्‍म के 1 साल पूरे होने पर टीके लगवाने पर 2100 रुपए का चेक फिर दिया जाता है। पांच वर्ष पूरे होने पर मां को 3100 रुपए का चेक। कुल मिलाकर बेटी की मां को 7 हजार 3 सौ रुपए की राशि प्रदान की जाती है।

उत्तराखंड की नंदा देवी कन्या योजना

उत्तराखंड की राज्य सरकार ने महिला और बाल कल्याण विभाग के सहयोग से, उन माता-पिता को, जिनको एक बालिका है, वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए नंदा देवी कन्या योजना शुरू की है। रु 1500/- की सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) राज्य में नवजात कन्याओं के नाम पर किया जाता है। यह राशि लड़की को तब दी जाती है जब वह 18 साल की हो जाती है और अपनी हाई स्कूल की परीक्षा पूरी कर लेती है। उत्तराखंड सरकार ने बालिकाओं के लिए यह अच्छी पहल की है। यह योजना उन परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने में मदद करती है, जिनमें एक बालिका है। यह बालिका जन्म के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करता है, लड़कियों के स्वास्थ्य और शैक्षिक स्थिति में सुधार करता है, कन्या भ्रूण हत्या को रोकता है, बाल विवाह को कम करता है और उन्हें बेहतर भविष्य प्रदान करता है।
योग्यता
आवेदक उत्तराखंड राज्य का निवासी होना चाहिए। माता-पिता की आय शहरी क्षेत्रों में रु 42,000/- वार्षिक से कम होनी चाहिए और ग्रामीण क्षेत्रों में रु 36,000/- वार्षिक से कम होनी चाहिए। आवेदक के पास बीपीएल कार्ड होना चाहिए। प्रत्येक परिवार की केवल दो लड़कियां इस योजना का लाभ उठा सकती हैं।
आवेदन कैसे करें
आवेदक को राज्य में निकटतम आंगनवाड़ी केंद्र में जाना होगा। उन्हें उत्तराखंड राज्य में महिला सशक्तिकरण और बाल विकास विभाग से संपर्क करना होगा।

बिहार की मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना

मुख्मंत्री कन्या सुरक्षा योजना बिहार राज्य में बीपीएल परिवारों की लड़कियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी, जो बच्चियां नवंबर 2007 के बाद पैदा हुई हैं उनको यह सुविधा प्रदान की गई है। प्रत्येक बालिका को जन्म के एक वर्ष के भीतर पंजीकृत कर दिया जाना चाहिए और फिर रु 2000/- जन्म पंजीकरण प्रमाण पत्र दिखाने के बाद दिया जाता है। इस योजना को बिहार सरकार और यूटीआई म्यूचुअल फंड के बीच संयोजन करके पेश किया गया था। इस योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि बच्ची के किशोरवयीन हो जाने के बाद उसे सम्मिलित राशि दी जाएगी। राज्य द्वारा गरीबी रेखा से नीचे आने वाले एक परिवार की पहली दो लड़कियों, जो नवंबर 2007 के बाद पैदा हुई हैं, को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। जब बच्ची 18 वर्ष की हो जाएगी, तो लड़की को परिपक्वता मूल्य के बराबर राशि दी जाती है। यदि बालिका की मृत्यु हो जाती है, तो उस राशि का भुगतान महिला विकास निगम, पटना को दिया जाना चाहिए।
योग्यता
आवेदक बीपीएल श्रेणी से होना चाहिए और यह सुविधा केवल एक परिवार की दो बालिकाओं को दी जाएगी जिनका जन्म नवंबर 2007 के बाद हुआ हो। जन्म का पंजीकरण जन्म के एक वर्ष के भीतर किया जाना चाहिए।
आवेदन कैसे करें
आवेदक संबंधित क्षेत्र या जिले के बाल विकास परियोजना अधिकारी से संपर्क करें। इस योजना का लाभ उठाने वाले माता-पिता को आंगनवाड़ी केंद्र में जाकर नोडल केंद्र से संपर्क करना चाहिए जो खास इस उद्देश्य से बनाया गया है, और योजना को समाज कल्याण निदेशालय, बिहार के माध्यम से लागू किया जाना चाहिए।

कर्नाटक भाग्यश्री योजना

भाग्यश्री योजना एक कर्नाटक सरकार की योजना है जो गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के बीच बालिकाओं के जन्म को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। इस योजना के तहत बालिकाओं को फाइनेंशियल सहायता प्रदान की जाती है। बालिकाओं को अधिकतम  25000 रु. तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलता है। बालिका को 10वीं कक्षा तक 300 रू. से 1000. तक की वार्षिक छात्रवृत्ति भी दी जाती है।
भाग्यश्री योजना के लिए योग्यता शर्तें
BPL परिवार की बालिकाओं को इस योजना का लाभ मिलता है बशर्ते कि उनका जन्म 31 मार्च 2006 के बाद हुआ हो बच्चे के जन्म के 1 साल बाद तक नामांकन की अनुमति है और अधिकतम दो बच्चों को इस योजना के तहत कवर किया जा सकता है। लाभार्थी को अन्य आर्थिक लाभ भी उपलब्ध कराए जाते हैं बशर्ते वे कुछ योग्यता शर्तें पूरी करता हो

महाराष्ट्र सरकार की तरफ से माझी कन्या भाग्यश्री योजना

माझी कन्या भाग्यश्री योजना महाराष्ट्र सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजना है जो BPL और समाज के अन्य कमजोर वर्गों के बीच बालिकाओं की स्थिति में सुधार करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन की गई है। बालिका की माँ को कन्या के जन्म के बाद पहले 5 वर्षों तक हर साल 5000 रू. दिए जाते हैं।  इसके बाद, 5 वीं कक्षा में दाखिला लेने तक बालिका को 2500 रू. प्रति वर्ष प्रदान किया जाता है। इसके बाद, यह आर्थिक सहायता बढ़ाकर 3000 रू. प्रति वर्ष कर दी जाती है जब तक बालिका कक्षा 12 में दाखिला न ले। 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद, उसे उसकी उच्च शिक्षा के लिए 1 लाख रू. दिया जाता है ।
माझी कन्या भाग्यश्री योजना आवेदन फॉर्म
माझी कन्या भाग्यश्री योजना के लिए आवेदन फॉर्म स्थानीय आंगनवाड़ी से प्राप्त किया जा सकता है और स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के साथ सभी आवश्यक दस्तावेजों जैसे कि लड़की के जन्म प्रमाण पत्र के साथ जमा किया जा सकता है। आप इस बालिका योजना के बारे में महाराष्ट्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट से और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

पश्चिम बंगाल की कन्याश्री प्रकल्प

पश्चिम बंगाल की कन्याश्री प्रकल्प बेटियों के लिए एक राज्य की पहल है, जिसे विशेष रूप से कमजोर सामाजिक–आर्थिक वर्गों की लड़कियों की भलाई के साथ–साथ उनकी स्थिति में सुधार के लिए बनाया गया है। यह योजना महिला विकास और समाज कल्याण विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा सशर्त कैश ट्रांसफर के रूप में कार्यान्वित की जाती है। कन्याश्री योजना में 13 वर्ष से 18 वर्ष के बीच की बेटियों के लिए 750 रु. की छात्रवृत्ति दी जाती है । 18 से 19 वर्ष के बीच की लड़कियों के लिए 25000 रू. का एकमुश्त अनुदान दिया जाता है।
कन्याश्री प्रकल्प के लिए योग्यता शर्तें
लाभार्थी को पश्चिम बंगाल का निवासी होना चाहिए और उसके नाम पर एक बैंक खाता होना चाहिए
बेटियों को एक शैक्षणिक संस्थान में होना चाहिए व अविवाहित होना चाहिए
लड़की के परिवार की अधिकतम वार्षिक आय 1.2 लाख रू. सालाना होनी चाहिए
कन्याश्री प्रकल्प के लिए आवेदन
इस योजना के तहत बेटियां वार्षिक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर सकती है यदि वह 13 वर्ष की आयु के हैं, बशर्ते वे कक्षा 8 या उससे अधिक में नामांकित हों। कन्याश्री प्रकल्प के तहत एक बार का अनुदान आवेदन 18 से 19 वर्ष की आयु के बीच किया जा सकता है। कन्याश्री योजना आवेदन फॉर्म उस संस्थान से लिया जा सकता है, जहां बालिका अध्ययनरत है। इसे भरने और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत करना होता है। साथ ही एक डिक्लेरेश्न जो यह बताता हो कि आवेदक अविवाहित है और वार्षिक इनकम स्टेटमेंट के साथ यह पुष्टि करता है कि परिवार की इनकम 1.2 लाख सालाना या उससे कम है।
भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा देश भर में तमाम योजनाएं चलायी जा रहीं है। इन योजनाओं के माध्यम से इतना तो स्पष्ट हो जाता है कि सरकार महिलाओं के समग्र विकास के लिए हर तरह के प्रयास काफी लम्बे समय से करती आ रही है और यही कारण है कि आज समाज में महिलाओं की भूमिकाओं में बहुत तरह के बदलाव भी दिखायी देने लगे हैं | आज शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र होगा जहां पर महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज ना करायी हो। हमारी बेटियां राष्ट्र का भविष्य होती हैं। हमारे देश भारत की प्रगति में उनका बहुत बड़ा योगदान है और यह प्रगति ऐसे ही जारी रहे इसके लिए राष्ट्र उनके बेहतर विकास पर काम रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा हमारी बेटियां तरक्की कर सकें और देश का नाम ऐसे ही रोशन करती रहे।