पाकिस्तान में 7 महीने से जहाज पर फंसे 6 भारतीय, ईरानी कंपनी पर उठे सवाल

The CSR Journal Magazine

कराची पोर्ट पर फंसे भारतीय नागरिकों की दास्तान

पाकिस्तान के कराची पोर्ट पर एक जहाज पिछले सात महीने से खड़ा है, जिसमें छह भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। ये लोग अपने वतन लौटने की उम्मीद में दिन गिन रहे हैं। जहाज पर बिजली की कमी और मोबाइल नेटवर्क की अनुपलब्धता ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। परिवार से बात करने का मौका भी उन्हें हर 15 दिन में एक बार ही मिल पाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इन भारतीयों की वतन वापसी कब होगी?

परिवारों की गुहार, सरकार से मदद की अपील

इन भारतीयों के परिवार अब प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और विदेश मंत्रालय से मदद की गुहार लगा रहे हैं। उनके लिए पिछले सात महीने किसी लंबे इंतजार से कम नहीं हैं। घर से हजारों किलोमीटर दूर, इन नागरिकों को यह नहीं पता कि उनकी वतन वापसी कब होगी। परिवार का कहना है कि जहाज पर बिजली नहीं है और मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलता, जिससे अपनों से बात करना मुश्किल हो गया है।

विनीत किशोर मिश्रा की कहानी

इन छह भारतीयों में एक नाम प्रयागराज के विनीत किशोर मिश्रा का है। विनीत जहाज पर चीफ ऑफिसर के पद पर तैनात थे। पिछले 10 साल से मर्चेंट नेवी में काम कर रहे विनीत के परिवार ने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा और पति खुद एक ऐसे इंतजार में फंस जाएगा, जिसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा। विनीत की पत्नी नेहा और उनके पिता ललित किशोर मिश्रा, जो रिटायर्ड आर्मी पर्सन हैं, लगातार अपने बेटे की सुरक्षित वतन वापसी की कोशिश कर रहे हैं।

ईरानी कंपनी का विवाद और जहाज की स्थिति

विनीत के दो छोटे बच्चे भी हैं, जो अपने पिता के घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि विनीत ने इसी साल 25 फरवरी को ईरान की KEVER शिपिंग कंपनी जॉइन की थी। कंपनी के एक जहाज को लेकर वह ओमान से रवाना हुए और 17 अप्रैल 2026 को जहाज पाकिस्तान के कराची पोर्ट पहुंचा। परिवार का आरोप है कि कराची पहुंचते ही जहाज को रोक लिया गया।

कॉन्ट्रैक्ट खत्म, फिर भी जहाज पर फंसे

परिवार के मुताबिक, विनीत का कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो चुका है, लेकिन उन्हें जहाज से साइन ऑफ यानी औपचारिक रूप से ड्यूटी से मुक्त करके वापस लौटने की अनुमति नहीं मिली है। इस स्थिति ने परिवार को और भी चिंतित कर दिया है। विनीत की पत्नी और परिवार ने भारतीय दूतावास से संपर्क किया है।

दूतावास से मिली कोई राहत नहीं

परिवार ने भारतीय दूतावास को पत्र लिखकर विनीत और बाकी भारतीयों की सुरक्षित वापसी की मांग की है। परिवार का कहना है कि दूतावास से आश्वासन मिला, लेकिन सात महीने बीत जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। अब परिवार दिल्ली पहुंचकर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और विदेश मंत्रालय से मदद मांग रहा है।

स्थानीय नेताओं से भी मदद की कोशिश

स्थानीय विधायक और सांसद के माध्यम से भी इस मामले को विदेश मंत्रालय तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। परिवार के सवाल हैं कि अगर विवाद किसी कंपनी और पोर्ट अधिकारियों के बीच है, तो भारतीय नागरिकों को उसके बीच फंसाकर क्यों रखा गया है? उनके दस्तावेज कब लौटाए जाएंगे और उन्हें अपने देश आने की अनुमति आखिर कब मिलेगी?

सरकार से उम्मीदें

परिवार को उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से उम्मीद है कि इस मामले में जल्द हस्तक्षेप होगा और पाकिस्तान के कराची पोर्ट पर फंसे सभी छह भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाएगी। इस मामले ने न केवल परिवारों को बल्कि पूरे देश को चिंता में डाल दिया है।

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