भारत में आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़, ISIS और अल-कायदा से जुड़े 12 संदिग्ध गिरफ्तार

The CSR Journal Magazine

भारत में आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड, गंभीर सुरक्षा चिंताओं का सामना

भारत में सुरक्षा बलों ने हाल ही में एक बड़ा ऑपरेशन चलाकर 12 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। ये लोग आतंकवादी संगठनों अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक और सीरिया (ISIS) से जुड़े होने के शक में पकड़े गए हैं। इस बहु-राज्यीय अभियान ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंताओं को उजागर किया है।

राज्यों की संयुक्‍त कार्रवाई

यह गिरफ्तारी विभिन्न राज्यों के सुरक्षा बलों के सहयोग से संभव हुई। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह संयुक्त कार्रवाई उन खतरनाक तत्वों पर काबू पाने के लिए महत्वपूर्ण है, जो भारत की सुरक्षा को चुनौती दे सकते हैं। संदिग्धों के पास से कई आपत्तिजनक सामग्री मिली है, जो उनके आतंकी कृत्यों की योजना को दर्शाती है। सुरक्षा बलों द्वारा ISIS और अल-कायदा (AQIS) से जुड़े संदिग्धों के खिलाफ की गई इस बड़ी कार्रवाई में आंध्र प्रदेश पुलिस के नेतृत्व में एक समन्वित ऑपरेशन के तहत 12 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। यह छापेमारी बिहार, दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और राजस्थान जैसे राज्यों में की गई।

आंध्र प्रदेश से गिरफ़्तारी

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से तीन प्रमुख संदिग्ध मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ (23 वर्ष, बाइक टैक्सी चालक), मिर्जा सोहेल बेग (23 वर्ष, रेस्तरां कर्मचारी) और मोहम्मद दानिश (27 वर्ष, लेजर मार्किंग प्रोफेशनल) की गिरफ़्तारी हुई। इन लोगों ने युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और जिहाद के लिए तैयार करने के उद्देश्य से ‘अल मलिक इस्लामिक यूथ’ नामक एक समूह बनाया था। जांच में इनके संबंध ISIS से जुड़े ‘Benex Com’ नेटवर्क और विदेशी हैंडलर्स (जैसे अल-हकीम शकूर) से होने की बात सामने आई। ये संदिग्ध सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके प्रतिबंधित संगठनों की विचारधारा फैला रहे थे। कथित तौर पर इन्होंने राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया और भारत को एक “इस्लामी राज्य” में बदलने के उद्देश्य से नफरत भरा कंटेंट साझा किया। शुरुआती जांच के अनुसार, ये संदिग्ध प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान और अफगानिस्तान जाने की तैयारी कर रहे थे और अन्य युवाओं को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे थे। राजस्थान के जोधपुर से गिरफ्तार 19 वर्षीय जीशान को इस नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हैंडलर बताया गया है।

विभिन्न राज्यों में गिरफ्तार किए गए संदिग्ध

जोधपुर (राजस्थान): इस ऑपरेशन में जीशान (19 वर्ष) को एक मुख्य हैंडलर के रूप में पहचाना गया है। पुलिस के अनुसार, वह विदेशी आकाओं के संपर्क में था और भारत में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहा था।
पश्चिम बंगाल: सुरक्षा बलों ने यहाँ से भी संदिग्धों को हिरासत में लिया है। जाँच एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क के तार सीमा पार के चरमपंथी समूहों से जुड़े हो सकते हैं, जो युवाओं को हथियार चलाने और विस्फोटक बनाने का प्रशिक्षण देने का लालच देते थे।
बिहार और दिल्ली: इन क्षेत्रों में की गई छापेमारी में डिजिटल उपकरण, मोबाइल फोन और सिम कार्ड जब्त किए गए हैं। इन उपकरणों से ISIS और AQIS के प्रोपेगेंडा वीडियो और भड़काऊ साहित्य बरामद होने की खबर है।
तेलंगाना और कर्नाटक: यहाँ से पकड़े गए संदिग्धों पर आरोप है कि वे ‘स्लीपर सेल’ की तरह काम कर रहे थे और स्थानीय स्तर पर फंड जुटाने (Crowdfunding) की कोशिशों में शामिल थे।
सुरक्षा एजेंसियों (NIA और राज्य पुलिस की काउंटर-इंटेलिजेंस विंग) का कहना है कि इस समूह का तात्कालिक लक्ष्य युवाओं को अफगानिस्तान और पाकिस्तान भेजकर आतंकी प्रशिक्षण दिलाना था, ताकि वे वापस आकर भारत में अस्थिरता पैदा कर सकें।

आतंकवाद का बढ़ता खतरा

हाल के दिनों में आतंकवाद के बढ़ते खतरे के कारण भारत में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। विशेष रूप से ISIS और al-Qaeda जैसे संगठनों के बढ़ते प्रभाव से निपटना चुनौतीपूर्ण हो गया है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि नागरिकों की सुरक्षा में कोई कमी न आए। इसके लिए प्रशासन ने कई नए कदम उठाए हैं। गिरफ्तार किए गए संदिग्धों की पहचान विभिन्न राज्य पुलिसों की जांचों से हुई है। बताया जा रहा है कि इन संदिग्धों ने कुछ समय से आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने का काम किया है। इनकी गतिविधियों पर नजर रखने वाले सुरक्षा बलों ने आगाह किया है कि ये लोग युवाओं को भड़का सकते हैं।

सुरक्षा बलों और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की अगली कार्रवाई

 गिरफ्तार किए गए 12 संदिग्धों को अदालत में पेश कर पुलिस या NIA रिमांड पर लिया जाएगा। पूछताछ के दौरान उनके विदेशी हैंडलर्स (जैसे अल-हकीम शकूर) और ‘Benex Com’ जैसे ऑनलाइन नेटवर्क के साथ संबंधों की गहराई से जांच की जाएगी। संदिग्धों के पास से जब्त किए गए मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों को फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा। जांच एजेंसियां उनके सोशल मीडिया संदेशों, टेलीग्राम/डिस्कॉर्ड जैसे एनक्रिप्टेड ऐप्स और गेमिंग ऐप्स के जरिए की गई बातचीत को ट्रैक करेंगी ताकि अन्य छिपे हुए ‘स्लीपर सेल्स’ का पता लगाया जा सके। सूत्रों के अनुसार, इन संदिग्धों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर आने वाले दिनों में बिहार, राजस्थान, कश्मीर और महाराष्ट्र सहित कई अन्य राज्यों में छापेमारी जारी रह सकती है। एजेंसियों का मुख्य लक्ष्य उस व्यापारी और लॉजिस्टिक नेटवर्क को पकड़ना है जिसने इन्हें फंड और ट्रेनिंग के लिए संसाधन मुहैया कराए। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और NIA मिलकर इस बात की जांच करेंगे कि क्या इस नेटवर्क को क्रिप्टोकरेंसी या ‘हवाला’ के जरिए विदेशों से धन मिल रहा था। एजेंसियां उन रास्तों की पहचान कर रही हैं जिनका उपयोग ये संदिग्ध प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान और अफगानिस्तान जाने के लिए करने वाले थे।

कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका

कानून प्रवर्तन एजेंसियां अब और भी सक्रिय हो गई हैं। गिरफ्तारियों के बाद, उन पर पूछताछ की जाएगी, ताकि उनके समर्पण और संपर्कों के बारे में जानकारी मिल सके। NIA जल्द ही इस मामले में एक औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जांच को पूरी तरह से अपने हाथ में ले सकती है, जिसके बाद आरोपियों के खिलाफ UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही यह भी चिह्नित किया जाएगा कि क्या इनके पीछे कोई बड़े नेटवर्क का हाथ है। सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी कहा है कि यह ऑपरेशन केवल शुरुआत है। आगे आने वाले समय में ऐसे और भी ऑपरेशन चलाए जाएंगे, ताकि आतंकवाद के खतरे को जड़ से उखाड़ फेंका जा सके। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, नागरिकों को भी चौकस रहने की सलाह दी गई है।

नागरिकों की जागरूकता आवश्यक

इस घटना के बाद अब नागरिकों को भी सतर्क होने की आवश्यकता है। अधिकारियों ने कहा है कि यदि किसी को संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिले तो तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करना चाहिए। यह सामूहिक सुरक्षा का एक हिस्सा है।

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