भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते के बाद जम्मू-कश्मीर के सेब और ड्राई फ्रूट उद्योग में चिंता की लहर है। आशंका जताई जा रही है कि अमेरिकी सेब और ड्राई फ्रूट्स पर ज़ीरो कस्टम ड्यूटी लागू होने से स्थानीय किसानों और कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि डील की पूरी शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं, लेकिन उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका पर असर की आशंका गहराती जा रही है।
ज़ीरो ड्यूटी से बढ़ी प्रतिस्पर्धा, किसानों में मायूसी
भारत और अमेरिका ने हाल ही में एक अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे को अंतिम रूप दिया है। इस समझौते के तहत अमेरिका से आने वाले सेब और ड्राई फ्रूट्स पर कस्टम ड्यूटी शून्य रहने की बात सामने आई है। इससे जम्मू-कश्मीर के किसानों को डर है कि सस्ते आयातित उत्पाद बाजार में आने से उनके उत्पादों की कीमतें गिर जाएंगी। अगर अमेरिकी सेब 800–900 रुपये प्रति 10 किलो बिकेगा तो स्थानीय सेब की कीमत 1300 रुपये से गिरकर आधी हो सकती है। पहले से बढ़ती कीटनाशक और मजदूरी लागत के बीच यह गिरावट किसानों के लिए घातक साबित हो सकती है।
कश्मीर की अर्थव्यवस्था में सेब उद्योग की अहम भूमिका
जम्मू-कश्मीर की जीडीपी में सेब उद्योग का योगदान लगभग 7 से 8 प्रतिशत माना जाता है। अकेले सेब उद्योग से कम से कम सात लाख लोग सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। कश्मीर फ्रूट ग्रोवर्स एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष शहीद लतीफ चौधरी के अनुसार, अगर दिल्ली की मंडी में स्थानीय सेब 100 रुपये किलो बिक रहा है और आयातित सेब 80-85 रुपये किलो में बिकेगा, तो स्थानीय उत्पाद की कीमत 40-45 रुपये तक गिर सकती है। ऐसे में किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। पिछले वर्ष श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग के बंद रहने से उद्योग को लगभग दो हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। ऐसे में यह नई चुनौती उद्योग के लिए और भारी पड़ सकती है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने उठाए सवाल
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने इस डील को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिन उत्पादों को ज़ीरो ड्यूटी पर शामिल किया गया है, उनमें ट्री नट्स जैसे अखरोट और बादाम भी हैं, जो जम्मू-कश्मीर की प्रमुख पैदावार हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार हॉर्टिकल्चर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की बात कर रही है, तो ऐसे में विदेशी उत्पादों को एंट्री फ्री करना स्थानीय उद्योग के हित में कैसे है। उन्होंने विशेष रूप से सेब उद्योग को सुरक्षा देने की मांग की।

