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March 14, 2026

भारत का गौरव ‘मोर’ सुंदरता, संस्कृति और प्रकृति का अद्भुत प्रतीक

The CSR Journal Magazine
भारत का राष्ट्रीय पक्षी Indian Peacock अपनी अद्भुत सुंदरता, रंग-बिरंगे पंखों और सांस्कृतिक महत्व के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध है। खेतों, जंगलों और गांवों में आसानी से दिखने वाला यह पक्षी न केवल प्रकृति की सुंदरता का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा में भी विशेष स्थान रखता है।

भारत का राष्ट्रीय पक्षी

भारत सरकार ने वर्ष 1963 में मोर को देश का राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया था। इस निर्णय के पीछे कई कारण थे, मोर की आकर्षक बनावट, भारत के लगभग हर हिस्से में उसकी मौजूदगी और भारतीय संस्कृति से उसका गहरा संबंध। India में यह पक्षी लोगों के लिए आसानी से पहचाने जाने वाला और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। भारतीय परंपराओं और धार्मिक कथाओं में भी मोर का विशेष महत्व है। कई चित्रों में भगवान कृष्ण के मुकुट में मोर पंख दिखाया जाता है, जो ज्ञान और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इस पक्षी को राष्ट्रीय पहचान देने का निर्णय लिया गया।

मोर की अद्भुत सुंदरता और पंखों की खासियत

मोर को दुनिया के सबसे सुंदर पक्षियों में गिना जाता है। नर मोर के लंबे और चमकीले पंख उसकी सबसे बड़ी पहचान हैं।
जब वह अपने पंख फैलाकर नृत्य करता है, तो उसका पंख लगभग छह फीट तक फैल सकता है और उसमें नीले, हरे और सुनहरे रंग की चमक दिखाई देती है। इन पंखों पर आंख जैसी आकृतियां होती हैं जिन्हें “ओसेली” कहा जाता है। यही पंख मोर को अन्य पक्षियों से अलग बनाते हैं। आम तौर पर यह पंख हर साल प्राकृतिक रूप से झड़ते हैं और नए उग आते हैं। मोर के पंखों का उपयोग सजावट, धार्मिक अनुष्ठानों और कला में भी किया जाता है। हालांकि वन्यजीव कानूनों के तहत मोर को नुकसान पहुंचाना या उसके पंखों के लिए शिकार करना प्रतिबंधित है, क्योंकि यह पक्षी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित है।

कहां-कहां पाए जाते हैं मोर

मोर मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाते हैं। भारत के अलावा नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश के कुछ क्षेत्रों में भी इनकी मौजूदगी देखी जाती है। भारत में ये पक्षी खुले जंगलों, घास के मैदानों, कृषि क्षेत्रों और गांवों के आसपास आसानी से दिखाई देते हैं। खासकर राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत के कई इलाकों में मोरों की संख्या काफी अधिक है।

Rajasthan में तो मोर बड़ी संख्या में पाए जाते हैं और यहां के ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह-शाम इनकी आवाज और नृत्य अक्सर देखने को मिलता है। यह पक्षी समुद्र तल से लेकर लगभग 2000 मीटर की ऊंचाई तक के क्षेत्रों में भी रह सकता है।

क्या खाते हैं और प्रकृति में क्या भूमिका है

मोर सर्वाहारी पक्षी होते हैं, यानी वे पौधों और छोटे जीवों दोनों को खाते हैं। इनके भोजन में अनाज, बीज, फल, फूल, कीड़े-मकोड़े, छिपकलियां, मेंढक और कभी-कभी छोटे सांप भी शामिल होते हैं। खेती वाले इलाकों में यह पक्षी खेतों में मिलने वाले कीटों को खाकर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इस कारण कई किसान भी इन्हें खेतों के आसपास रहने देते हैं। मोर का जीवनकाल लगभग 20 से 23 वर्ष तक हो सकता है और यह ज्यादातर जमीन पर चलने वाला पक्षी है, हालांकि खतरे की स्थिति में यह छोटी दूरी तक उड़ भी सकता है।

मोर केवल भारत का राष्ट्रीय पक्षी ही नहीं बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक भी है।

इसके चमकीले पंख, आकर्षक नृत्य और पर्यावरण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका इसे प्रकृति का अनमोल उपहार बनाती है।

इसलिए इस सुंदर पक्षी और उसके प्राकृतिक आवास की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

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