भारत का रसायन उद्योग 2040 तक एक लाख करोड़ डॉलर का होगा: जेपी नड्डा

The CSR Journal Magazine
भारत का रसायन एवं पेट्रोकेमिकल उद्योग अगले डेढ़ दशक में बड़े बदलाव की ओर अग्रसर है। वर्तमान में यह क्षेत्र लगभग 220 अरब डॉलर के बाजार का हिस्सा है, लेकिन सरकार का मानना है कि यह 2040 तक एक लाख करोड़ डॉलर के आकार को प्राप्त कर लेगा। यह जानकारी रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने दी। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना होगा।

चुनौतियों का सामना करने की आवश्यकता

जेपी नड्डा ने बताया कि इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए घरेलू उत्पादन को बढ़ाना, उच्च मूल्य वाले रसायनों के निर्माण में निवेश करना और आयात पर निर्भरता को कम करना आवश्यक है। नीति आयोग की रिपोर्ट में भी इन क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। यह रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि भारत को अपनी रसायन उद्योग की क्षमता को बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

इंडिया केम-2026 का महत्व

हाल ही में मुंबई में संपन्न हुए इंडिया केम-2026 सम्मेलन में उद्योग जगत और सरकार के बीच इन चुनौतियों पर गहन चर्चा हुई। इस सम्मेलन में विशेष रसायनों, कृषि रसायनों, औद्योगिक बुनियादी ढांचे और पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। जेपी नड्डा ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में रसायन उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

भारत की वैश्विक स्थिति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अवसर

वर्तमान समय में भारत दुनिया का छठा सबसे बड़ा रसायन उत्पादक है और एशिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। यह उद्योग देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग सात प्रतिशत का योगदान देता है। कृषि, दवा, कपड़ा, वाहन, निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अनेक क्षेत्रों में रसायनों की आवश्यकता होती है। इसलिए, इस उद्योग का विस्तार देश के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि और रोजगार सृजन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इंडिया केम-2026 में जापान को साझेदार देश के रूप में शामिल किया गया। इस सम्मेलन ने भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के अवसरों पर भी विचार किया। यह सहयोग भारत के रसायन उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगा।

निवेश का महत्व

सरकार का अनुमान है कि इस उद्योग का बाजार 2040 तक करीब एक लाख करोड़ डॉलर और 2047 तक 1.6 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि उद्योग में निवेश को बढ़ावा दिया जाए। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार को सुविधाजनक नीतियों और समर्थन प्रदान करना होगा। भारत का रसायन उद्योग आने वाले वर्षों में कई नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाने की दिशा में अग्रसर है। उच्च मूल्य वाले रसायनों के उत्पादन में निवेश और अनुसंधान एवं विकास पर जोर देने से भारत इस क्षेत्र में अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकता है। इसके साथ ही, घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए आवश्यक नीतियों को लागू करना भी महत्वपूर्ण होगा।

रसायन उद्योग का भविष्य

भारत का रसायन उद्योग न केवल आर्थिक विकास में योगदान देगा, बल्कि यह रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। इस क्षेत्र का विकास देश के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। आने वाले वर्षों में, अगर सही दिशा में कदम उठाए गए, तो भारत इस उद्योग में वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है।

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