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March 11, 2026

भारत ने चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए FDI नीति में बड़ा बदलाव, निवेश का मिलेगा बड़ा मौका

The CSR Journal Magazine
भारत सरकार ने हाल ही में विदेशी निवेश को लेकर कुछ अहम बदलावों को मंजूरी दी है। यह बदलाव सीमावर्ती देशों से आने वाले निवेश के लिए लागू किया गया है, जिससे स्टार्टअप, डीप-टेक और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा। इस निर्णय की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दी गई। भारत अपने पड़ोसी देशों, जैसे चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान से साझा सीमाओं को ध्यान में रखते हुए यह फैसला ले रहा है।

निवेश नियमों में क्या है बदलाव?

इससे पहले, 2020 में कैबिनेट ने सख्त नियम लागू किए थे जिसमें यह अनिवार्य था कि भूमि सीमा से जुड़े देशों के निवेशक को सरकारी मंजूरी लेनी पड़ेगी। यह निर्णय कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के अधिग्रहण से बचाव के लिए लिया गया था। नई नीति में अब ‘Beneficial Owner’ की स्पष्ट परिभाषा जोड़ी गई है, जो कि Prevention of Money Laundering Rules, 2005 के अनुरूप होगी।

ऑटोमैटिक रूट का फायदा

नई नीति के तहत, यदि किसी निवेशक की भूमि सीमा साझा करने वाले देश से 10 प्रतिशत तक की गैर-नियंत्रक हिस्सेदारी है, तो उसे ऑटोमैटिक रूट के तहत अनुमति दी जा सकेगी। हालांकि, इसके लिए भारतीय कंपनी को सरकार को सभी विवरण रिपोर्ट करने होंगे। इस बदलाव से निवेश प्रक्रिया में सरलता आएगी, जिससे विदेशी फंड भारत में आसानी से आ सकेंगे।

तेज मंजूरी प्रक्रिया

सरकार ने कुछ चयनित मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों के लिए फास्ट-ट्रैक मंजूरी प्रक्रिया भी स्थापित की है। जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कैपिटल गुड्स आदि में आने वाले प्रस्तावों पर 60 दिनों के भीतर निर्णय लेने की अनिवार्यता होगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इन परियोजनाओं का बहुमत नियंत्रण भारतीय नागरिकों या संस्थानों के पास ही रहे।

भारत का वैश्विक सप्लाई चेन में स्थान मजबूत होगा

केंद्र सरकार के मुताबिक, इस बदलाव के माध्यम से भारत में विदेशी निवेश बढ़ेगा और इससे नई तकनीकें भी आएंगी। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, कैपिटल गुड्स, और सोलर वैल्यू-चेन जैसे क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि को भी मजबूती मिलेगी।

स्थायी परिवर्तन और निवेश की नई दिशा

इस नीति के बदलाव से सरकार का उद्देश्य निवेश को बढ़ाना, नई तकनीकों का समावेश करना और भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना है। इससे न सिर्फ विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में भी संजीवनी मिलेगी।
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