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February 24, 2026

भारत का इजराइल-फिलिस्तीन के साथ रिश्तों के बीच बैलेंस, कैसे बनाए रखता है मजबूत रिश्ते?

The CSR Journal Magazine

भारत की कूटनीतिक चतुराई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजराइल के दौरे पर जा रहे हैं, जो उनके लिए दूसरी बार होगा। 2017 में हुई पहली यात्रा के बाद, मोदी का यह दौरा दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों की पुष्टि करता है। इजराइल और फिलिस्तीन के बीच भले ही अलगाव हो, लेकिन भारत ने दोनों के साथ रिश्ते बनाए रखने में महारत हासिल की है। भारत ने इजराइल और फिलिस्तीन के साथ रिश्तों को संतुलित रखा, दोनों के प्रति अपनी कूटनीति को मजबूत किया है।

दुश्मनी के बीच दोस्ती

इजराइल और फिलिस्तीन में लंबे समय से विवाद चल रहा है, जिसमें जमीन, बॉर्डर और अधिकारों जैसे मुद्दों पर गंभीर टकराव हो चुका है। इस सबसे अलग, भारत इन दोनों के साथ दोस्ताना रिश्ते कायम रखता है। इजराइल हिंदुस्तान से खुश है, और फिलिस्तीन भी नाराज नहीं है। कैसे संभव हुआ यह सब, आइए जानते हैं।

इतिहास की परतें

भारत की इस कूटनीति की जड़ें आजादी के समय से जुड़ी हुई हैं। 1947 में, पंडित नेहरू और महात्मा गांधी ने फिलिस्तीन मुद्दे का समर्थन किया। 1950 में भारत ने इजराइल को अलग राष्ट्र के रूप में मान्यता दी, लेकिन शुरुआती रिश्ते आसानी से नहीं बने। 1962 में नेहरू सरकार ने इजराइल से मदद मांगी थी, जो रिश्ते को आगे बढ़ाने में सहायक साबित हुआ।

पीएलओ की मान्यता

1975 में भारत ने फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) को मान्यता दी और उसे नई दिल्ली में ऑफिस खोलने की अनुमति दी। यह कदम भारत के लिए एक बड़ा बदलाव था, क्योंकि भारत ने PLO को फिलिस्तीनी लोगों का सही प्रतिनिधि माना। 1988 में, भारत फिलिस्तीन को मान्यता देने वाले पहले गैर-अरब देशों में शामिल हुआ।

बीजेपी का उदय और इजराइल से रिश्ते

बीजेपी के सत्तारूढ होने के बाद, भारत का इजराइल के प्रति नजरिया भी बदला। कारगिल युद्ध के दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा, और भारत को इजराइल से हथियार मिलना रिश्तों को और मजबूती प्रदान करता है। 2000 में, भारत ने इजराइल के साथ एंटी-टेररिज्म कमीशन भी बनाया।

मोदी सरकार का प्रभाव

2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत-इजराइल के रिश्तों में और तेजी आई। मोदी ने 2017 में इजराइल का दौरा किया, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और रक्षा संबंध बढ़े। व्यापार 900 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2024 में 6.5 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

फिलिस्तीन के साथ निरंतर समर्थन

मोदी ने 2018 में फिलिस्तीन का दौरा किया और राष्ट्रपति अब्बास ने उनका स्वागत किया। पीएम मोदी ने माना कि भारत फिलिस्तीनी लोगों के हितों के प्रति संवेदनशील है। जियोपॉलिटिक्स के विशेषज्ञों के अनुसार, मोदी के दौर में भारत ने दोनों के साथ अपने रिश्तों को मजबूत किया है।

मानवीय सहायता और परेशानियाँ

भारत ने गाजा में मानवीय संकट को लेकर चिंता जताई है और वहां की जनता के लिए मदद प्रदान की है। यहाँ तक कि भारत ने फिलिस्तीन के लिए कई बार मानवीय सहायता पहुँचाई है। भारत UN में भी फिलिस्तीन की मेंबरशिप का समर्थन करता है, जिससे उसकी नीतियों में स्थिरता बनी रहती है।

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