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February 21, 2026

भारत में सालाना 54 हजार करोड़ रुपए का होता है दान, धार्मिक संस्थाओं को सबसे ज्यादा

The CSR Journal Magazine
भारत में व्यक्तिगत दान का 45.9% हिस्सा धार्मिक संगठनों को जाता है। हाल ही में आई ‘हाउ इंडिया गिव्स’ रिपोर्ट के तीसरे संस्करण में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, 68% लोग किसी न किसी रूप में मदद के लिए तैयार हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल घरेलू दान हर साल 54 हजार करोड़ रुपए का है।

जरूरतमंदों की मदद के लिए बढ़ा दान

41.8% दान सीधे बेहद गरीब, जरूरतमंद और भिक्षा मांगने वालों को मिलता है। हालांकि, गैर-धार्मिक संगठनों को केवल 14.9% दान प्राप्त होता है। यह दर्शाता है कि भारतीय समाज में दान का सबसे बड़ा आधार आम घर हैं।

खाने का दान: सेवा का प्रचलित तरीका

दान में बहुत सारा खाना मुफ्त सामुदायिक रसोइयों तक जाता है। भारतीयों द्वारा सेवा का आम रूप धार्मिक संस्थानों में काम करना है। भारत में घरों के रोजमर्रा के दान का पैमाना, पैटर्न और वजहें भी इस रिपोर्ट में स्पष्ट की गई हैं। जिसमें बताया गया है कि भारतीय दुनिया के सबसे उदार लोगों में से एक हैं।

दान के तरीके और पैटर्न का विश्लेषण

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 48% दान भोजन, कपड़े और आवश्यक वस्तुओं के रूप में है, जबकि 44% दान नकद रूप में प्राप्त होता है। करीब 30% लोगों ने वॉलंटियरिंग, यानि समय देकर सेवा करने की बात कही है। ये आंकड़े दान के रिश्तों और समुदाय के स्वरूप को दर्शाते हैं।

उच्च आय समूह में दान की प्रवृत्ति

रिपोर्ट बताती है कि ऊंची आय वाले घरों में दान की प्रवृत्ति 80% तक पहुंच जाती है। 4000-5000 रुपए महीने की आय वाले आधे घर भी दान करते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि आय बढ़ने पर दान में भागीदारी भी तेजी से बढ़ती है।

दान की नैतिक जिम्मेदारी

रिपोर्ट के अनुसार, 90% से अधिक लोग इसे धार्मिक कर्तव्य मानते हैं। सामने की अपील या अपील करने का तरीका भी प्रभावशाली होता है। कुल दान में नकद का हिस्सा 44% है, जिससे यह साफ होता है कि भारतीय समाज में दान की बहुत अधिक अहमियत है।

दानदाताओं के प्रकार की पहचान

इस अध्ययन ने दानदाताओं के चार प्रकारों को भी पहचाना है: ग्रासरूट, एस्पिरेशनल, प्रैक्टिकल और वेल-ऑफ गिवर्स। इनमें से प्रत्येक की प्रेरणा और जागरूकता का स्तर अलग है।

भारत की उदारता का नया चेहरा

रिपोर्ट लॉन्च करते हुए सीएसआईपी की डायरेक्टर जिनी उप्पल ने कहा कि ‘हाउ इंडिया गिव्स 2025-26’ की रिपोर्ट भारत की उदारता को सामने लाती है। यह दर्शाती है कि देश के विकास के साथ दान करने की प्रवृत्ति कैसे बदलती है।

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