आयकर नियमों में महत्त्वपूर्ण बदलाव
1 अप्रैल से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ देश में आयकर नियमों में कई अहम बदलाव होने जा रहे हैं। इन बदलावों का प्रभाव टैक्स दाताओं पर पड़ेगा, लेकिन कुछ राहत भी मिलेगी। नए नियमों के तहत, आयकर रिटर्न (ITR) की डेडलाइन, सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (TDS) में प्रमुख बदलाव होंगे। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये नए नियम असेसमेंट ईयर 2026-27 से लागू होंगे।
ITR की डेडलाइन में बदलाव
नए नियमों के अनुसार, आयकर रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन में विस्तार किया गया है। इससे टैक्स दाताओं को रिटर्न भरने में आसानी होगी और उन्हें ज्यादा समय मिलेगा। इससे उम्मीद है कि लोग समय पर अपना रिटर्न दाखिल कर पाएंगे। यह कदम उन लोगों के लिए राहत का कारण बनेगा, जो समयाभाव में रिटर्न भरने में संघर्ष करते हैं। टैक्सपेयर्स को रिटर्न भरने के लिए अब अधिक समय मिलेगा।
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नॉन-ऑडिट केस (ITR-3, ITR-4): व्यवसायियों और प्रोफेशनल्स के लिए डेडलाइन 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है।
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सैलरीड क्लास (ITR-1, ITR-2): वेतनभोगियों के लिए डेडलाइन पहले की तरह 31 जुलाई ही रहेगी।
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रिवाइज्ड रिटर्न (Revised Return): अगर रिटर्न में कोई गलती हो जाती है, तो उसे सुधारने का समय 9 महीने से बढ़ाकर 12 महीने (टैक्स वर्ष खत्म होने के बाद) कर दिया गया है। यानी अब आप 31 मार्च तक सुधार कर सकेंगे।
STT और TDS में नई पहल
सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। इससे शेयर बाजार में किए गए लेन-देन पर लगने वाला टैक्स भी प्रभावित होगा। व्यापारी और निवेशक इसे लेकर उत्सुक हैं कि इस बदलाव का उनके निवेश पर क्या असर होगा। इसी प्रकार, टैक्स डिडक्शन एट सोर्स का दायरा भी बढ़ाया गया है, जिसके तहत कुछ नयी श्रेणियों को शामिल किया गया है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश पैसे भेजने (शिक्षा या इलाज के लिए) और विदेशी टूर पैकेज पर लगने वाला TCS अब घटाकर फ्लैट 2% कर दिया गया है। यदि आप किसी NRI (अनिवासी भारतीय) से प्रॉपर्टी खरीदते हैं, तो अब आपको TAN नंबर लेने की जरूरत नहीं है। आप अपने PAN का उपयोग करके ही TDS काट सकते हैं। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाले मुआवजे के ब्याज को अब TDS मुक्त और पूरी तरह टैक्स-फ्री कर दिया गया है।
ट्रेडिंग हुई महंगी (STT में वृद्धि)
शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग करने वालों पर टैक्स का बोझ बढ़ा है:
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फ्यूचर्स (Futures): सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है।
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ऑप्शंस (Options): सेल साइड पर STT को 0.1% से बढ़ाकर 0.15% किया गया है। इससे इंट्राडे और डेरिवेटिव ट्रेडर्स की लागत बढ़ेगी।
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इनकम टैक्स स्लैब (2026-27 के लिए नई व्यवस्था)
नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को और आकर्षक बनाया गया है:
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₹0 से ₹4 लाख: शून्य (0%)
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₹4 लाख से ₹8 लाख: 5%
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₹8 लाख से ₹12 लाख: 10%
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₹12 लाख से ₹16 लाख: 15%
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₹16 लाख से ₹20 लाख: 20%
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₹20 लाख से ऊपर: 30%
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स्टैंडर्ड डिडक्शन: वेतनभोगियों के लिए इसे ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है।
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