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January 2, 2026

Income Tax 2026: 5 बड़े बदलाव जो आपकी जेब में रखेंगे ज्यादा पैसा, जानें कैसे बचाएं टैक्स

The CSR Journal Magazine
साल 2026 में इनकम टैक्स नियमों में हुए अहम बदलाव सीधे आपकी कमाई और बचत पर असर डालेंगे। बजट 2025 में सरकार ने सैलरीड लोगों, छोटे निवेशकों और सीनियर सिटीज़न्स को ध्यान में रखते हुए कई राहतें दी हैं। टैक्स-फ्री इनकम बढ़ाने से लेकर टीडीएस नियमों में ढील और रिटर्न फाइलिंग की आसान प्रक्रिया तक, इन नए नियमों के कारण आपकी टैक्स प्लानिंग पूरी तरह बदल सकती है। आइए जानते हैं वे 5 बड़े बदलाव।

12.75 लाख तक की इनकम पर जीरो टैक्स

सबसे बड़ी राहत टैक्स रिबेट में बढ़ोतरी है। नए टैक्स रिजीम के तहत अगर आपकी नेट टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख तक है, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा। इसके अलावा, सैलरीड टैक्सपेयर्स को ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलेगा। इसका मतलब है कि ₹12.75 लाख तक की ग्रॉस सैलरी पर भी टैक्स शून्य रहेगा। हालांकि, ₹12 लाख से ऊपर की इनकम पर आपको चुने गए टैक्स रिजीम के अनुसार टैक्स देना होगा।
इलाज और पर्क्विजिट नियमों में बड़ी छूट
सैलरीड कर्मचारियों के लिए मेडिकल खर्च और अन्य पर्क्विजिट्स पर राहत दी गई है। अब विदेश में इलाज या कंपनी द्वारा दिए जाने वाले अन्य अतिरिक्त लाभ (पर्क्विजिट) पर टैक्स-फ्री सीमा बढ़ा दी गई है। यह सीमा सालों से अपरिवर्तित थी, लेकिन बढ़ती महंगाई और खर्चों को देखते हुए इसे अपडेट किया गया है। इसका सीधा फायदा कर्मचारियों को टैक्स छूट के रूप में मिलेगा।
ULIP कमाई पर स्पष्ट टैक्स नियम
यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) को लेकर सरकार ने नियम स्पष्ट किए हैं। जिन ULIP पॉलिसी पर पहले सेक्शन 10(10D) के तहत छूट नहीं मिलती थी, अब उन्हें ‘कैपिटल एसेट’ माना जाएगा। इससे मिलने वाला मुनाफा कैपिटल गेंस की तरह टैक्सेबल होगा। इससे पहले 2021 में ₹2.5 लाख से ज्यादा प्रीमियम वाले ULIP पर टैक्स लगाने के बाद काफी भ्रम था। अब यह नियम निवेशकों के लिए स्पष्टता लाता है।
सीनियर सिटीज़न्स को ब्याज आय में बड़ी राहत
सीनियर सिटीज़न्स के लिए भी राहत दी गई है। अब बैंक एफडी या अन्य ब्याज से होने वाली सालाना आय ₹1 लाख तक टीडीएस से मुक्त रहेगी, पहले यह सीमा ₹50,000 थी। इससे बुजुर्गों को कैश फ्लो में सहूलियत मिलेगी और रिफंड की प्रक्रिया भी आसान होगी।
डिविडेंड इनकम पर TDS की सीमा दोगुनी
छोटे निवेशकों के लिए एक और राहत है। अब सालाना ₹10,000 तक की डिविडेंड आय पर टीडीएस नहीं कटेगा, पहले यह सीमा ₹5,000 थी। यह बदलाव छोटे शेयरहोल्डर्स को सीधे फायदा पहुंचाएगा और उनके निवेश को और आकर्षक बनाएगा।
इन बदलावों से साफ संकेत मिलता है कि सरकार टैक्स सिस्टम को आसान, पारदर्शी और टैक्सपेयर्स के अनुकूल बनाने की कोशिश कर रही है। अगर आप सैलरीड कर्मचारी हैं, सीनियर सिटीजन हैं या निवेश करते हैं, तो इन नए नियमों के अनुसार सही योजना बनाकर आप अपनी बचत बढ़ा सकते हैं और अनावश्यक टैक्स से बच सकते हैं।
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