जयपुर में अवैध भ्रूण लिंग जांच का खुलासा फर्जी नेटवर्क का पर्दाफाश, डॉक्टर समेत तीन गिरफ्तार

The CSR Journal Magazine
जयपुर के सांगानेर क्षेत्र में एक फ्लैट में चल रहे अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण के रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। PCPNDT टीम ने कार्रवाई करते हुए डॉक्टर, दलाल और एक महिला को गिरफ्तार किया। मामले में कोर्ट ने दो आरोपियों को रिमांड पर भेजा है, जबकि एक को जेल भेज दिया गया है।

सांगानेर में फ्लैट से चल रहा था अवैध धंधा

जयपुर में भ्रूण लिंग परीक्षण जैसे गंभीर अपराध का बड़ा मामला सामने आया है।
PCPNDT टीम ने सांगानेर के मुहाना क्षेत्र स्थित मयूर रेजीडेंसी के एक फ्लैट पर छापा मारकर इस अवैध गतिविधि का खुलासा किया। यहां गुप्त रूप से गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग बताया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान टीम ने मौके से पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन भी बरामद की, जिससे यह साबित होता है कि पूरा नेटवर्क योजनाबद्ध तरीके से संचालित हो रहा था।

डॉक्टर और दलाल की भूमिका संदिग्ध

ASP डॉ. हेमंत जाखड़ के अनुसार, इस रैकेट में डॉक्टर शेरसिंह राजावत और दलाल हरी कुमावत की मुख्य भूमिका सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ कि डॉक्टर के पास आने वाले मरीजों को हरी कुमावत के पास भेजा जाता था। हरी कुमावत खुद को विशेषज्ञ बताकर गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी करता और भ्रूण का लिंग बताता था। हैरानी की बात यह है कि हरी कुमावत केवल 10वीं पास है, फिर भी वह इस गैरकानूनी काम को अंजाम दे रहा था।

डिग्री और रजिस्ट्रेशन की हो रही जांच

गिरफ्तार डॉक्टर शेरसिंह राजावत की शैक्षणिक योग्यता और रजिस्ट्रेशन पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उसने कानपुर की एक यूनिवर्सिटी से BAMS की डिग्री ली है और राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में पंजीकरण भी कराया हुआ है। हालांकि, अब उसकी डिग्री और मेडिकल प्रैक्टिस की वैधता की गहन जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह किस आधार पर इस तरह की गतिविधियों में शामिल था।

कोर्ट का फैसला और फरार आरोपी की तलाश

मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां डॉक्टर शेरसिंह राजावत और हरी कुमावत को एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। वहीं, इस मामले में पकड़ी गई महिला शिला देवी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि इस गिरोह का एक अन्य सदस्य अभी फरार है, जिसकी तलाश में टीम लगातार दबिश दे रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।

समाज के लिए गंभीर चुनौती

भ्रूण लिंग परीक्षण पर कानूनी प्रतिबंध के बावजूद इस तरह के मामले सामने आना चिंता का विषय है। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज में लैंगिक असंतुलन को भी बढ़ावा देता है। प्रशासन ने साफ किया है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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