वर्किंग वीमेन हॉस्टल या फर्टिलिटी सेंटर का सीक्रेट अड्डा? हैदराबाद पुलिस की छापेमारी में मिला दवाइयों का जखीरा

The CSR Journal Magazine

हैदराबाद के हॉस्टल में चल रहा था अंडाणु निकालने का गोरखधंधा, पुलिस की छापेमारी से खुलासा

हैदराबाद के एक गर्ल्स हॉस्टल में पुलिस ने छापेमारी की, जिसमें कई संदिग्ध गतिविधियों का पता चला है। पुलिस को संदेह है कि लड़कियों के हॉस्टल के नाम पर यह गोरखधंधा पिछले करीब एक साल से चलाया जा रहा था, जहां बाहरी राज्यों से गरीब महिलाओं को लाकर उनके अंडाणु अवैध रूप से निकाले जाते थे और कॉरपोरेट फर्टिलिटी सेंटरों को बेचे जाते थे। इस मामले में करीब 10 युवतियों को पाया गया। पुलिस ने बताया कि हॉस्टल में सिरिंज और गर्भनिरोधक गोलियां भी मिलीं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

बेगमपेट और सरूरनगर में छापेमारी

पुलिस ने सबसे पहले हैदराबाद के बेगमपेट स्थित प्रकाश नगर के ‘अमी नीता गर्ल्स हॉस्टल’ (Ami Neeta Girls Hostel) पर आधी रात को छापा मारा। इसके तुरंत बाद सरूरनगर के ‘शेट्टी वर्किंग वीमेंस हॉस्टल’ में भी इसी तरह के रैकेट का पता चला। बेगमपेट हॉस्टल से बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा की लगभग 10 युवा महिलाओं को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इन गरीब महिलाओं को पैसों का लालच देकर हैदराबाद लाया गया था। सरूरनगर पुलिस ने भी एक मुख्य आरोपी दुर्गा प्रसाद को हिरासत में लिया है और वहां से 18 महिलाओं से पूछताछ की जा रही है।

क्या चल रहा था हॉस्टल में?

पुलिस की जांच में पता चला है कि इस हॉस्टल में महिलाओं को अलग-अलग राज्यों से लाया जाता था। इन महिलाओं के अंडाणु निकालकर उन्हें फर्टिलिटी सेंटर तक पहुंचाया जाता था। ऐसे केंद्रों पर उन कपल्स का इलाज किया जाता है, जिन्हें बच्चा पैदा करने में कठिनाई होती है। बेगमपेट पुलिस और मल्काजगिरी की स्पेशल ऑपरेशंस टीम ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की।

संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा

पुलिस ने हॉस्टल की तलाशी के दौरान कई संदिग्ध सामान बरामद किए हैं। इन सामग्रियों को मेडिकल जांच के लिए गांधी अस्पताल भेजा गया है। बेगमपेट थाने के SHO पी. सैदुलु ने कहा कि अभी तक आरोप साबित नहीं हुए हैं, लेकिन जांच जारी है। डॉक्टरों और जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी (DHMO) की टीम भी इस मामले की गहराई से जांच कर रही है।

क्या था अंडाणु निकालने का शक?

पुलिस को शक है कि हॉस्टल में अंडाणु निकालने की प्रक्रिया चल रही थी। इस संदर्भ में सिरिंज और गर्भनिरोधक गोलियों का मिलना इस बात की पुष्टि करता है। SHO ने बताया कि अब तक हॉस्टल में IVF से जुड़ी कोई स्कैनिंग नहीं हुई है, लेकिन यह जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और धारा 127 (गलत तरीके से बंधक बनाना) के तहत मामला दर्ज किया है।

स्पर्म सैंपल का मामला

पुलिस एक और पहलू की जांच कर रही है, जिसमें शक है कि हॉस्टल में पुरुषों के स्पर्म सैंपल भी लिए जा रहे थे। स्पर्म और अंडाणु दोनों ही प्रजनन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। IVF तकनीक में इनकी मदद से लैब में भ्रूण तैयार किया जाता है। पुलिस को शक है कि यह गतिविधि पिछले एक साल से चल रही थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हॉस्टल का संचालन कौन कर रहा था। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि महिलाओं को यहां कौन लेकर आता था और क्या उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी थी। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और करीब 10 महिलाओं से पूछताछ की जा रही है।

महिलाओं की सहमति पर सवाल

इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या महिलाएं अपनी मर्जी से यहां आई थीं? क्या उन्हें बताया गया था कि उन्हें किस काम के लिए बुलाया जा रहा है? या फिर उन्हें किसी तरह के झांसे में रखकर यहां लाया गया? पुलिस इन सवालों के जवाब खोजने में लगी है। पुलिस ने इस मामले में बिचौलियों और संभावित फर्टिलिटी सेंटरों के बीच कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है। जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में क्या-क्या हुआ और कौन जिम्मेदार है। पुलिस की जांच जारी है और मामले में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब अभी बाकी हैं।

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