ग्रेटर नोएडा में एक पति ने अपनी पत्नी को करवाचौथ के मौके पर एक अनमोल तोहफा दिया है। 46 वर्षीय संजय ने अपनी पत्नी रूबी को अपनी किडनी दान की है। यह कदम उस समय उठाया गया जब रूबी को किडनी फेल होने के कारण नियमित डायलिसिस पर निर्भर रहना पड़ रहा था। संजय का यह निर्णय उनके गहरे प्रेम और समर्पण को दर्शाता है।
किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया
संजय ने अपनी किडनी का दान शारदाकेयर हेल्थसिटी में करवाया। डॉक्टरों ने बताया कि इस ट्रांसप्लांट के लिए विशेष तैयारी की गई थी, क्योंकि पति-पत्नी के ब्लड ग्रुप अलग थे। रूबी का ब्लड ग्रुप ‘बी पॉजिटिव’ था, जबकि संजय का ‘ए पॉजिटिव’ था। इस जटिल प्रक्रिया के लिए रूबी को ‘डीसेंसिटाइजेशन’ प्रक्रिया के तहत विशेष दवा दी गई।
डॉक्टरों की मेहनत और तैयारी
किडनी ट्रांसप्लांट और यूरोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि इस प्रक्रिया में लैप्रोस्कोपिक डोनर नेफ्रेक्टोमी का उपयोग किया गया। उन्होंने कहा, “इस प्रक्रिया में डोनर की सुरक्षा और रिकवरी का पूरा ध्यान रखा गया।” इसके अलावा, डॉक्टरों ने यह भी बताया कि ट्रांसप्लांट के सफल होने के लिए विशेष तैयारी की गई थी।
रूबी की नई जिंदगी
ट्रांसप्लांट के बाद रूबी के स्वास्थ्य में सुधार देखा गया है। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी किडनी के काम करने की क्षमता में सुधार हुआ है। हॉस्पिटल में रहने के दौरान उनका सीरम क्रिएटिनिन स्तर 0.70 mg/dl तक पहुंच गया। अब उन्हें नियमित दवाइयां लेनी होंगी और किडनी फंक्शन टेस्ट कराना होगा।
भावनाओं का जज़्बा
रूबी ने अपने पति के इस कदम पर कहा, “मेरे पति ने मुझे एक नई उम्मीद दी है। डायलिसिस का दौर मेरे लिए बहुत कठिन था। उनके इस निर्णय ने मुझे जीवन जीने का एक नया मौका दिया है। मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे ऐसा जीवनसाथी मिला है।”
संजय का अनुभव
संजय ने कहा, “जब मैंने रूबी को डायलिसिस से गुजरते देखा, तो मैं उसकी मदद के लिए कुछ भी करने को तैयार था। मुझे खुशी है कि अब हम एक नई उम्मीद के साथ जीवन जी सकते हैं।” उनके इस प्रेम भरे निर्णय ने उन्हें एक नई दिशा दी है।
स्वास्थ्य में सुधार और छुट्टी
रूबी के किडनी फंक्शन में सुधार होने के बाद उन्हें चिकित्सीय रूप से स्थिर हालत में हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई। संजय भी लैप्रोस्कोपिक लेफ्ट डोनर नेफ्रेक्टोमी के बाद अच्छे से ठीक हो गए हैं।
प्यार और समर्पण की मिसाल
इस करवाचौथ पर संजय ने अपनी पत्नी को किडनी दान करके प्यार और समर्पण की एक अनमोल मिसाल पेश की है। उनका यह निर्णय परंपरा से आगे बढ़कर पत्नी को जीवन का एक नया मौका देने का प्रतीक बन गया है। संजय की इस उदारता की हर कोई तारीफ कर रहा है।
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