करवाचौथ पर भद्रा का साया! एक्सपर्ट ऐस्ट्रोलॉजर से जानें वायरल दावों का सच

The CSR Journal Magazine
करवाचौथ का व्रत हर सुहागन महिला के लिए बेहद खास होता है। यह व्रत अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में सुख-शांति के लिए रखा जाता है। इस दिन करवा माता की पूजा की जाती है, साथ ही भगवान शिव, मां पार्वती और गणेशजी की भी पूजा का विधान है। इस साल करवाचौथ का व्रत 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

सोशल मीडिया पर भद्रा का दावा

करवाचौथ के आस-पास सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें वायरल हो रही हैं। कहा जा रहा है कि इस बार करवा चौथ पर भद्रा का साया रहने वाला है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि भद्रा क्या है और इसका धार्मिक महत्व क्या है। क्या भद्रा के कारण करवाचौथ पर कोई बाधा आएगी? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए हम बात करते हैं ऐस्ट्रोलॉजर पिनाकी मिश्रा से।

भद्रा का धार्मिक महत्व

ऐस्ट्रोलॉजर पिनाकी मिश्रा के अनुसार, भद्रा को विष्टि करण कहा जाता है। यह करण तिथि का आधा भाग होता है और इसकी गणना खगोलीय स्थितियों के आधार पर की जाती है। शास्त्रों में कहा गया है कि भद्रा के समय कुछ शुभ कार्यों को शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। भद्रा के दौरान होने वाले धार्मिक कार्य अशुभ या निष्फल हो जाते हैं।

भद्रा का समय

पंचांग के अनुसार, भद्रा 28 अक्टूबर 2026 को दोपहर लगभग 2 बजकर 37 मिनट से शुरू होगी और 28 अक्टूबर की मध्यरात्रि 1 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। कुछ पंचांगों में गणना और स्थानीय समय के कारण मिनटों का अंतर हो सकता है। इस गणना के अनुसार, 29 अक्टूबर को सूर्योदय से पहले ही भद्रा समाप्त हो जाएगी। इसलिए करवाचौथ की पूजा के समय भद्रा का साया नहीं रहेगा।

क्या भद्रा का असर पड़ेगा?

ऐस्ट्रोलॉजर पिनाकी मिश्रा के अनुसार, भद्रा के दौरान शुभ कार्य करने के लिए मना किया जाता है। लेकिन, करवा चौथ की पूजा के संदर्भ में केवल भद्रा का नाम सुनकर डरने की जरूरत नहीं है। क्योंकि भद्रा सुबह होने से पहले ही समाप्त हो रही है, इसलिए इसका प्रभाव नहीं रहेगा।

सरगी खाने में बाधा?

कई क्षेत्रों में करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से पहले सरगी खाने की परंपरा के साथ शुरू होता है। चूंकि भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी, इसलिए सरगी खाने में कोई बाधा नहीं आएगी। ऐस्ट्रोलॉजर पिनाकी मिश्रा का कहना है कि करवा चौथ पर भद्रा को लेकर भ्रम दूर करने के लिए सबसे पहले पंचांग की सही गणना देखनी चाहिए।

क्या करें और क्या न करें?

29 अक्टूबर को सूर्योदय से पहले भद्रा समाप्त हो रही है, इसलिए शाम की पूजा के समय भद्रा रहने की बात सही नहीं है। सरगी सूर्योदय से पहले ग्रहण करें और शाम की पूजा अपने शहर के मुहूर्त के अनुसार करें। चंद्र दर्शन के बाद पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत खोलें। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store – https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos